अपरे त्वब्रुव॑स्तत्र क्षत्रिया भृशविक्षता:,दूसरे अत्यन्त घायल हुए क्षत्रिय वहाँ इस प्रकार कहने लगे--“अरे! दुर्योधनसे यहाँ क्या काम है? यदि वे जीवित होंगे तो तुम सब लोग उन्हें देख ही लोगे। इस समय तो सब लोग एक साथ होकर केवल युद्ध करो। राजा तुम्हारी क्या (सहायता) करेंगे”
当时,有些刹帝利身受重创,便说道:“杜尤陀那在此有何用处?若他尚活,你们自会见到他。此刻你们众人当同心合力,只管奋战。你们的国王在这当下又能助你们什么呢?”
संजय उवाच