
भीष्मस्योत्तरायणप्रतीक्षा तथा युधिष्ठिरागमनम् | Bhīṣma’s uttarāyaṇa moment and Yudhiṣṭhira’s arrival
Upa-parva: Bhīṣma–Yudhiṣṭhira Saṃvāda (Śaratkalpa-upasaṃhāra: Uttarāyaṇa and final instructions)
Vaiśaṃpāyana narrates Yudhiṣṭhira’s post-coronation actions: he honors the urban and provincial populace, consoles bereaved women, and stabilizes the realm. After fifty nights in the capital, he recalls Bhīṣma’s appointed time and departs with priests and ritual fires, noting the sun’s transition and the commencement of uttarāyaṇa. He sends ahead materials for Bhīṣma’s rites—ghee, garlands, fragrances, textiles, sandalwood and agaru, and precious items. The procession includes Dhṛtarāṣṭra, Gāndhārī, Kuntī, the Pāṇḍavas, Kṛṣṇa (Janārdana), Vidura, Yuyutsu, and Yuyudhāna, arriving at Kurukṣetra where Bhīṣma lies on the hero’s bed, surrounded by Vyāsa, Nārada, Devala, Asita, other kings, and guards. Yudhiṣṭhira offers formal salutations and requests instructions; Bhīṣma acknowledges the auspicious timing (Māgha, approaching bright fortnight), counsels Dhṛtarāṣṭra not to grieve, affirms Yudhiṣṭhira’s learning and steadfastness, and characterizes the deceased sons as ethically compromised. Bhīṣma then addresses Kṛṣṇa with devotional recognition and requests permission to depart; Kṛṣṇa grants it, praising Bhīṣma’s filial devotion and self-mastery over death. Bhīṣma concludes with a public exhortation to truth and non-cruelty and instructs Yudhiṣṭhira to honor brāhmaṇas, teachers, and officiants.
Chapter Arc: महेश्वर (ईश्वर) मुनिवर से कहते हैं कि पितामह ब्रह्मा से भी श्रेष्ठ, शाश्वत पुरुष हरि—श्रीकृष्ण—सूर्योदय-सा तेजस्वी होकर प्रकट होते हैं। → वर्णन क्रमशः विराट होता जाता है—कृष्ण के दिव्य लक्षण (दशभुज, श्रीवत्स, हृषीकेश), आयुध (शार्ङ्ग, सुदर्शन, नन्दक), और सर्वदेवतापूज्यता का प्रतिपादन; फिर देवताओं का यह स्वीकार कि वे सब उनके श्रीविग्रह में निवास करते हैं, जिससे दर्शन का फल तीर्थ-सदृश हो जाता है। → महावराह-रूप जगत्पति को नित्य नमस्कार—और यह उद्घोष कि समस्त देवता उसी देह में वास करते हैं; साथ ही शेषनाग का पृथ्वी को भोग से आलिंगन कर धारण करना तथा बलराम-कृष्ण—चक्र-लाङ्गलधारी दिव्य पुरुषसिंह—का एक साथ माननीय रूप में प्रतिष्ठापन। → महेश्वर इसे तपोधनों पर अनुग्रह बताकर निष्कर्ष देते हैं कि यदुश्रेष्ठ भगवान् की प्रयत्नपूर्वक पूजा करें—यही पुण्य, यही माहात्म्य, यही उपासना का सार है।
Verse 1
/ (दाक्षिणात्य अधिक पाठके ३ श्लोक मिलाकर कुल ६४ श्लोक हैं) ऑपन--माज बक। अपफि्-"ऋाझ सप्तचत्वारिशर्दाधिकशततमो« ध्याय: वंशपरम्पराका कथन और भगवान् श्रीकृष्णके माहात्म्यका वर्णन ऋषय ऊचु: पिनाकिन् भगनेत्रघ्न सर्वलोकनमस्कृत । माहात्म्यं वासुदेवस्य श्रोतुमिच्छामि शड्कर,ऋषियोंने कहा--भगदेवताके नेत्रोंका विनाश करनेवाले पिनाकधारी विश्ववन्दित भगवान् शंकर! अब हम वासुदेव (श्रीकृष्ण)-का माहात्म्य सुनना चाहते हैं
Para resi berkata: “Wahai Śaṅkara, pemangku busur Pināka—yang termasyhur sebagai pemusnah mata Bhaga dan dihormati oleh seluruh alam—kini kami ingin mendengar kemuliaan Vāsudeva (Śrī Kṛṣṇa).”
Verse 2
ईश्वर उवाच पितामहादपि वर: शाश्वत: पुरुषो हरि: । कृष्णो जाम्बूनदा भासो व्यश्रे सूर्य इबोदित:,महेश्वरने कहा--मुनिवरो! भगवान् सनातन पुरुष श्रीकृष्ण ब्रह्माजीसे भी श्रेष्ठ हैं। वे श्रीहरि जाम्बूनद नामक सुवर्णके समान श्याम कान्तिसे युक्त हैं। बिना बादलके आकाशमें उदित सूर्यके समान तेजस्वी हैं
Īśvara bersabda: “Wahai para resi mulia! Hari, Sang Purusha Abadi, yakni Kṛṣṇa, lebih agung bahkan daripada Pitāmaha (Brahmā). Ia berkilau dengan pesona gelap nan elok laksana emas Jāmbūnada yang murni, dan menyala bagaikan matahari yang terbit di langit tanpa awan.”
Verse 3
दशबाहुर्महातेजा देवतारिनिषूदन: । श्रीवत्साड़को हृषीकेश: सर्वदैवतपूजित:,उनकी भुजाएँ दस हैं, वे महान् तेजस्वी हैं, देवद्रोहियोंका नाश करनेवाले श्रीवत्सभूषित भगवान् हृषीकेश सम्पूर्ण देवताओंद्वारा पूजित होते हैं
Īśvara bersabda: “Ia berlengan sepuluh dan bercahaya mahahebat, pembinasaan bagi para musuh para dewa. Bertanda Śrīvatsa, Sang Hṛṣīkeśa itu dipuja oleh segenap dewa.”
Verse 4
ब्रह्मा तस्योदरभवस्तस्याहं च शिरोभव: । शिरोरुहेभ्यो ज्योतींषि रोमभ्यश्व सुरसुरा:,ब्रह्माजी उनके उदरसे और मैं उनके मस्तकसे प्रकट हुआ हूँ। उनके सिरके केशोंसे नक्षत्रों और ताराओंका प्रादुर्भाव हुआ है। रोमावलियोंसे देवता और असुर प्रकट हुए हैं
Īśvara bersabda: “Dari perut-Nya lahir Brahmā, dan dari kepala-Nya aku sendiri muncul. Dari rambut kepala-Nya memancar cahaya-cahaya langit—bintang dan gugus rasi; dan dari bulu-bulu tubuh-Nya termanifestasi para dewa serta para asura.”
Verse 5
ऋषयो देहसम्भूतास्तस्य लोकाश्न शाश्वता: । पितामहगहं साक्षात् सर्वदेवगृहं च सः,समस्त ऋषि और सनातन लोक उनके श्रीविग्रहसे उत्पन्न हुए हैं। वे श्रीहरि स्वयं ही सम्पूर्ण देवताओंके गृह और ब्रह्माजीके भी निवासस्थान हैं
Dari wujud-Nya sendiri lahir para resi dan alam-alam yang kekal. Ia sendiri, secara nyata, adalah kediaman Sang Pitāmaha (Brahmā) dan tempat bernaung semua dewa.
Verse 6
सो<स्या: पृथिव्या: कृत्स्नाया: स्रष्टा त्रिभुवनेश्वर: । संहर्ता चैव भूतानां स्थावरस्य चरस्य च,इस सम्पूर्ण पृथ्वीके स्रष्टा और तीनों लोकोंके स्वामी भी वे ही हैं। वे ही चराचर प्राणियोंका संहार भी करते हैं
Dialah pencipta seluruh bumi ini dan Penguasa tiga jagat. Dialah pula pelebur segala makhluk—yang tak bergerak maupun yang bergerak.
Verse 7
स हि देववर: साक्षाद् देवनाथ: परंतप: । सर्वज्ञ: सर्वसंश्लिष्ट: सर्वग: सर्वतोमुख:,वे देवताओंमें श्रेष्ठ, देवताओंके रक्षक, शत्रुओंको संताप देनेवाले, सर्वज्ञ, सबमें ओततप्रोत, सर्वव्यायक तथा सब ओर मुखवाले हैं
Dialah yang nyata sebagai yang termulia di antara para dewa—Tuan dan pelindung para dewa—yang membakar musuh-musuh dharma. Mahatahu, meresap dalam segala, hadir di mana-mana, dan menghadap ke segala arah.
Verse 8
परमात्मा हृषीकेश: सर्वव्यापी महेश्वर: । न तस्मात् परमं भूतं त्रिषु लोकेषु किंचन,वे ही परमात्मा, इन्द्रियोंके प्रेरक और सर्वव्यापी महेश्वर हैं। तीनों लोकोंमें उनसे बढ़कर दूसरा कोई नहीं है
Dialah Paramātman, Hṛṣīkeśa—penguasa batin indria—yang meliputi segalanya, Mahēśvara. Di tiga dunia tiada sesuatu pun yang lebih tinggi daripada-Nya.
Verse 9
सनातनो वै मधुहा गोविन्द इति विश्रुत: । स सर्वान् पार्थिवान् संख्ये घातयिष्यति मानद:,वे ही सनातन, मधुसूदन और गोविन्द आदि नामोंसे प्रसिद्ध हैं। सज्जनोंको आदर देनेवाले वे भगवान् श्रीकृष्ण महाभारत-युद्धमें समस्त राजाओंका संहार करायेंगे
Ia sungguh kekal, termasyhur dengan nama Madhuhā (pembunuh Madhu) dan Govinda. Tuhan itu—yang memuliakan orang saleh—akan menyebabkan kebinasaan semua raja di medan perang.
Verse 10
सुरकार्यार्थमुत्पन्नो मानुषं वपुरास्थित: । न हि देवगणा:ः सक्तास्त्रिविक्रमविनाकृता:,वे देवताओंका कार्य सिद्ध करनेके लिये पृथ्वीपर मानव-शरीर धारण करके प्रकट हुए हैं। उन भगवान् त्रिविक्रमकी शक्ति और सहायताके बिना सम्पूर्ण देवता भी कोई कार्य नहीं कर सकते
Demi menuntaskan tugas para dewa, Ia menampakkan diri di bumi dengan mengenakan raga manusia. Tanpa kekuatan dan pertolongan Bhagavān Trivikrama, bahkan segenap dewa pun tak sanggup menyelesaikan suatu pekerjaan.
Verse 11
भुवने देवकार्याणि कर्तु नायकवर्जिता: । नायक: सर्वभूतानां सर्वदेवनमस्कृत:,संसारमें नेताके बिना देवता अपना कोई भी कार्य करनमें असमर्थ हैं और ये भगवान् श्रीकृष्ण सब प्राणियोंके नेता हैं। इसलिये समस्त देवता उनके चरणोंमें मस्तक झुकाते हैं
Di dunia, tanpa seorang pemimpin penuntun, para dewa tak mampu menunaikan tugas-tugas ilahi mereka. Bhagavān Śrī Kṛṣṇa inilah Pemimpin segala makhluk; sebab itu seluruh dewa menundukkan kepala di hadapan kaki-Nya.
Verse 12
एतस्य देवनाथस्य देवकार्यपरस्य च । ब्रह्मभूतस्य सतत ब्रह्मर्षिशरणस्य च,देवताओंकी रक्षा और उनके कार्यसाधनमें संलग्न रहनेवाले वे भगवान् वासुदेव ब्रह्मस्वरूप हैं। वे ही ब्रह्मर्षियोंको सदा शरण देते हैं। ब्रह्माजी उनके शरीरके भीतर अर्थात् उनके गर्भमें बड़े सुखके साथ रहते हैं। सदा सुखी रहनेवाला मैं शिव भी उनके श्रीविग्रहके भीतर सुखपूर्वक निवास करता हूँ
Ia, Sang Vāsudeva—yang senantiasa tekun melindungi para dewa dan menuntaskan maksud-maksud mereka—berhakikat Brahman. Dialah perlindungan abadi bagi para Brahmarṣi.
Verse 13
ब्रह्मा वसति गर्भस्थ: शरीरे सुखसंस्थित: । शर्व: सुखं संश्रितश्न शरीरे सुखसंस्थित:,देवताओंकी रक्षा और उनके कार्यसाधनमें संलग्न रहनेवाले वे भगवान् वासुदेव ब्रह्मस्वरूप हैं। वे ही ब्रह्मर्षियोंको सदा शरण देते हैं। ब्रह्माजी उनके शरीरके भीतर अर्थात् उनके गर्भमें बड़े सुखके साथ रहते हैं। सदा सुखी रहनेवाला मैं शिव भी उनके श्रीविग्रहके भीतर सुखपूर्वक निवास करता हूँ
Brahmā bersemayam di dalam tubuh-Nya, seakan berada dalam kandungan, teguh dalam ketenteraman sempurna. Aku pun—Śarva (Śiva)—bernaung dengan bahagia di dalam tubuh yang sama, mantap dalam kebahagiaan.
Verse 14
सर्वा: सुखं संश्रिताश्न शरीरे तस्य देवता: । स देव: पुण्डरीकाक्ष: श्रीगर्भ: श्रीसहोषित:,* सम्पूर्ण देवता उनके श्रीविग्रहमें सुखपूर्वक निवास करते हैं। वे कमलनयन श्रीहरि अपने गर्भ (वक्ष:स्थल)-में लक्ष्मीको निवास देते हैं। लक्ष्मीके साथ ही वे रहते हैं
Segala dewa bernaung dalam tubuh-Nya dengan tenteram. Dialah Deva bermata teratai, yang mengandung Śrī (Lakṣmī) di dada-Nya dan bersemayam bersama Śrī.
Verse 15
शार््डचक्रायुध: खड्गी सर्वनागरिपुध्वज: । उत्तमेन स शीलेन दमेन च शमेन च,शार्ज्रधनुष, सुदर्शनचक्र और नन््दक नामक खड़ग--उनके आयुध हैं। उनकी ध्वजामें सम्पूर्ण नागोंके शत्रु गरुड़का चिह्न सुशोभित है। वे उत्तम शील, शम, दम, पराक्रम, वीर्य, सुन्दर शरीर, उत्तम दर्शन, सुडौल आकृति, धैर्य, सरलता, कोमलता, रूप और बल आदि सदगुणोंसे सम्पन्न हैं। सब प्रकारके दिव्य और अद्भुत अस्त्र-शस्त्र उनके पास सदा मौजूद रहते हैं
Īśvara bersabda: “Senjatanya ialah busur Śārṅga dan cakra Sudarśana; ia pun pemegang pedang Nandaka. Pada panjinya bersinar lambang Garuḍa, musuh segala ular. Ia dianugerahi budi pekerti tertinggi, pengendalian diri (dama) dan ketenteraman batin (śama), serta senantiasa memiliki senjata-senjata ilahi yang menakjubkan.”
Verse 16
पराक्रमेण वीर्येण वपुषा दर्शनेन च । आरोहेण प्रमाणेन धैर्येणार्जवसम्पदा,शार्ज्रधनुष, सुदर्शनचक्र और नन््दक नामक खड़ग--उनके आयुध हैं। उनकी ध्वजामें सम्पूर्ण नागोंके शत्रु गरुड़का चिह्न सुशोभित है। वे उत्तम शील, शम, दम, पराक्रम, वीर्य, सुन्दर शरीर, उत्तम दर्शन, सुडौल आकृति, धैर्य, सरलता, कोमलता, रूप और बल आदि सदगुणोंसे सम्पन्न हैं। सब प्रकारके दिव्य और अद्भुत अस्त्र-शस्त्र उनके पास सदा मौजूद रहते हैं
Tuhan bersabda: “Ia dianugerahi keberanian dan daya kepahlawanan; tubuhnya elok dan wibawanya memikat. Perawakannya seimbang dan terukur; ia teguh berani serta kaya akan kelurusan hati.”
Verse 17
आनृशंस्येन रूपेण बलेन च समन्वित: । अस्त्रै: समुदित: सर्वर्दिव्यैरद््भुतदर्शनै:,शार्ज्रधनुष, सुदर्शनचक्र और नन््दक नामक खड़ग--उनके आयुध हैं। उनकी ध्वजामें सम्पूर्ण नागोंके शत्रु गरुड़का चिह्न सुशोभित है। वे उत्तम शील, शम, दम, पराक्रम, वीर्य, सुन्दर शरीर, उत्तम दर्शन, सुडौल आकृति, धैर्य, सरलता, कोमलता, रूप और बल आदि सदगुणोंसे सम्पन्न हैं। सब प्रकारके दिव्य और अद्भुत अस्त्र-शस्त्र उनके पास सदा मौजूद रहते हैं
Īśvara bersabda: “Dalam hakikatnya ia berhiaskan welas asih, keelokan, dan kekuatan; serta diperlengkapi dengan segala senjata ilahi yang menakjubkan rupanya. Senjatanya ialah busur Śārṅga, cakra Sudarśana, dan pedang bernama Nandaka; pada panjinya bersinar lambang Garuḍa, musuh para ular. Ia kaya akan kebajikan: budi luhur, śama dan dama, keberanian dan daya, tubuh yang indah, wibawa yang auspisius, bentuk yang seimbang, keteguhan, kelurusan hati, kelembutan, keelokan, dan kekuatan; segala jenis senjata ilahi yang ajaib senantiasa berada dalam kuasanya.”
Verse 18
योगमाय: सहस्राक्षो निरपायो महामना: । वीरो मित्रजनश्लाघी ज्ञातिबन्धुजनप्रिय:,वे योगमायासे सम्पन्न और हजारों नेत्रोंवाले हैं। उनका हृदय विशाल है। वे अविनाशी, वीर, मित्रजनोंके प्रशंसक, ज्ञाति एवं बन्धु-बान्धवोंके प्रिय, क्षमाशील, अहंकाररहित, ब्राह्मणभक्त, वेदोंका उद्धार करनेवाले, भयातुर पुरुषोंका भय दूर करनेवाले और मित्रोंका आनन्द बढ़ानेवाले हैं
Īśvara bersabda: “Ia dianugerahi yogamāyā, bermata seribu, bebas dari bahaya, dan berhati agung. Ia pahlawan yang gemar memuliakan sahabat-sahabatnya, dan dicintai oleh kaum kerabat serta sanak keluarga.”
Verse 19
क्षमावांश्वानहंवादी ब्रह्मण्यो ब्रह्मनायक: । भयहर्ता भयारतनां मित्राणां नन्दिवर्धन:,वे योगमायासे सम्पन्न और हजारों नेत्रोंवाले हैं। उनका हृदय विशाल है। वे अविनाशी, वीर, मित्रजनोंके प्रशंसक, ज्ञाति एवं बन्धु-बान्धवोंके प्रिय, क्षमाशील, अहंकाररहित, ब्राह्मणभक्त, वेदोंका उद्धार करनेवाले, भयातुर पुरुषोंका भय दूर करनेवाले और मित्रोंका आनन्द बढ़ानेवाले हैं
Tuhan bersabda: “Ia penyabar dan pemaaf, bebas dari keakuan; ia pemuja para Brahmana dan pemimpin di antara para pengenal Brahman. Ia melenyapkan ketakutan orang-orang yang dilanda takut, dan menumbuhkan sukacita serta keyakinan para sahabatnya.”
Verse 20
शरण्य: सर्वभूतानां दीनानां पालने रत: । श्रुतवानर्थसम्पन्न: सर्वभूतनमस्कृत:,वे समस्त प्राणियोंको शरण देनेवाले, दीन-दुखियोंके पालनमें तत्पर, शास्त्रज्ञानसम्पन्न, धनवान, सर्वभूतवन्दित, शरणमें आये हुए शत्रुओंको भी वर देनेवाले, धर्मज्ञ, नीतिज्ञ, नीतिमान्, ब्रह्मवगादी और जितेन्द्रिय हैं
Ia adalah tempat berlindung bagi semua makhluk, tekun melindungi yang papa dan tertindas. Berilmu dalam ajaran suci dan dianugerahi kemakmuran, ia dihormati oleh segenap makhluk.
Verse 21
समश्रितानां वरद: शत्रूणामपि धर्मवित् | नीतिज्ञो नीतिसम्पन्नो ब्रह्मवादी जितेन्द्रियः,वे समस्त प्राणियोंको शरण देनेवाले, दीन-दुखियोंके पालनमें तत्पर, शास्त्रज्ञानसम्पन्न, धनवान, सर्वभूतवन्दित, शरणमें आये हुए शत्रुओंको भी वर देनेवाले, धर्मज्ञ, नीतिज्ञ, नीतिमान्, ब्रह्मवगादी और जितेन्द्रिय हैं
Ia menganugerahkan karunia kepada siapa pun yang berlindung padanya; bahkan terhadap musuh pun ia memahami hakikat dharma. Ia mahir dalam nīti (tata kelola), sempurna dalam laku benar, pengenal serta pengucap Brahman, dan penakluk indria.
Verse 22
भवार्थमिह देवानां बुद्धया परमया युत: । प्राजापत्ये शुभे मार्गे मानवे धर्मसंस्कृते,परम बुद्धिसे सम्पन्न भगवान् गोविन्द यहाँ देवताओंकी उन्नतिके लिये प्रजापतिके शुभमार्गपर स्थित हो मनुके धर्म-संस्कृत कुलमें अवतार लेंगे। महात्मा मनुके वंशमें मनुपुत्र अंग नामक राजा होंगे। उनसे अन्तर्धामा नामवाले पुत्रका जन्म होगा
Demi kesejahteraan para dewa, dianugerahi kebijaksanaan tertinggi, Sang Bhagavān akan lahir di sini—menapaki jalan suci Prajāpati—dalam garis manusia yang dimuliakan oleh dharma Manu.
Verse 23
समुत्पत्स्यति गोविन्दो मनोर्वशे महात्मन: । अड्ढजी नाम मनो: पुत्रो अन्तर्थामा ततः पर:,परम बुद्धिसे सम्पन्न भगवान् गोविन्द यहाँ देवताओंकी उन्नतिके लिये प्रजापतिके शुभमार्गपर स्थित हो मनुके धर्म-संस्कृत कुलमें अवतार लेंगे। महात्मा मनुके वंशमें मनुपुत्र अंग नामक राजा होंगे। उनसे अन्तर्धामा नामवाले पुत्रका जन्म होगा
Govinda akan lahir dalam wangsa Manu yang berhati luhur. Manu akan mempunyai seorang putra bernama Aṅga; dan sesudahnya akan muncul keturunan bernama Antardhāmā.
Verse 24
अन्तर्धाम्नो हविर्धामा प्रजापतिरनिन्दित: । प्राचीनबर्हिर्भविता हविर्धाम्न: सुतो महान्,अन्तर्धामासे अनिन्द्य प्रजापति हविर्धामाकी उत्पत्ति होगी। हविर्धामाके पुत्र महाराज प्राचीनबर्हि होंगे
Dari Antardhāmā akan lahir Prajāpati yang tak bercela bernama Havirdhāmā. Dan dari Havirdhāmā akan terbit putranya yang agung, Raja Prācīnabarhis.
Verse 25
तस्य प्रचेत:प्रमुखा भविष्यन्ति दशात्मजा: । प्राचेतसस्तथा दक्षो भवितेह प्रजापति:,प्राचीनबर्हिके प्रचेता आदि दस पुत्र होंगे। उन दसों प्रचेताओंसे इस जगतमें प्रजापति दक्षका प्रादुर्भाव होगा
Darinya akan lahir sepuluh putra, dengan para Pracetas sebagai yang terkemuka. Dari para Pracetas itulah, di dunia ini juga, Dakṣa akan muncul kembali sebagai Prajāpati.
Verse 26
दाक्षायण्यास्तथा5<दित्यो मनुरादित्यतस्तथा । मनोश्व वंशज इला सुद्युम्नश्ष भविष्यति,दक्षकन्या अदितिसे आदित्य (सूर्य) उत्पन्न होंगे। सूर्यसे मनु उत्पन्न होंगे। मनुके वंशमें इला नामक कन्या होगी, जो आगे चलकर सुद्युम्न नामक पुत्रके रूपमें परिणत हो जायगी
Dari Aditi, putri Dakṣa, akan lahir Āditya (Sang Surya). Dari Āditya akan lahir Manu. Dalam garis keturunan Manu akan ada seorang putri bernama Ilā, yang kelak berubah menjadi putra bernama Sudyumna.
Verse 27
बुधात् पुरूरवाश्षापि तस्मादायुर्भविष्यति । नहुषो भविता तस्माद् ययातिस्तस्य चात्मज:,कन्यावस्थामें बुधसे समागम होनेपर उससे पुरूरवाका जन्म होगा। पुरूरवासे आयु नामक पुत्रकी उत्पत्ति होगी। आयुके पुत्र नहुष और नहुषके ययाति होंगे
Dari Budha akan lahir Purūravas. Dari Purūravas akan muncul putra bernama Āyu. Dari Āyu akan datang Nahuṣa, dan dari Nahuṣa lahir putranya, Yayāti.
Verse 28
यदुस्तस्मान्महासत्त्व: क्रोष्टा तस्माद् भविष्यति । क्रोष्टश्नैव महान् पुत्रो वजिनीवान् भविष्यति,ययातिसे महान् बलशाली यदु होंगे। बहुसे क्रोष्टाका जन्म होगा, क्रोष्टासे महान् पुत्र वृजिनीवान् होंगे
Dari Yayāti akan lahir Yadu yang sangat perkasa; dari Yadu akan muncul Kroṣṭā yang berhati luhur. Dan dari Kroṣṭā akan lahir putra termasyhur bernama Vṛjinīvān.
Verse 29
वृजिनीवतश्न भविता उषड्गुरपराजित: । उषड्गोर्भविता पुत्र: शूरश्रित्ररथस्तथा,वृजिनीवानसे विजय वीर उषंगुका जन्म होगा। उपषंगुका पुत्र शूरवीर चित्ररथ होगा
Dari Vṛjinīvān akan lahir Uṣaḍgu, yang tak terkalahkan oleh musuh. Dan kepada Uṣaḍgu akan lahir seorang putra pula, sang pahlawan Citraratha.
Verse 30
तस्य त्ववरज: पुत्र: शूरो नाम भविष्यति | तेषां विख्यातवीर्याणां चरित्रगुणशालिनाम्,उसका छोटा पुत्र शूर नामसे विख्यात होगा। वे सभी यदुवंशी विख्यात पराक्रमी, सदाचार और सदगुणसे सुशोभित, यज्ञशील और विशुद्ध आचार-विचारवाले होंगे। उनका कुल ब्राह्मणोंद्वारा सम्मानित होगा। उस कुलमें महापराक्रमी, महायशस्वी और दूसरोंको सम्मान देनेवाले क्षत्रिय-शिरोमणि शूर अपने वंशका विस्तार करनेवाले वसुदेव नामक पुत्रको जन्म देंगे, जिसका दूसरा नाम आनकदुन्दुभि होगा। उन्हींके पुत्र चार भुजाधारी भगवान् वासुदेव होंगे
Putra bungsunya akan bernama Śūra. Keturunannya akan termasyhur karena keberanian, serta berhias oleh laku mulia dan kebajikan.
Verse 31
यज्वनां सुविशुद्धानां वंशे ब्राह्मणसम्मते । स शूर: क्षत्रियश्रेष्ठोी महावीयों महायशा: । स्ववंशविस्तरकरं जनयिष्यति मानद:,उसका छोटा पुत्र शूर नामसे विख्यात होगा। वे सभी यदुवंशी विख्यात पराक्रमी, सदाचार और सदगुणसे सुशोभित, यज्ञशील और विशुद्ध आचार-विचारवाले होंगे। उनका कुल ब्राह्मणोंद्वारा सम्मानित होगा। उस कुलमें महापराक्रमी, महायशस्वी और दूसरोंको सम्मान देनेवाले क्षत्रिय-शिरोमणि शूर अपने वंशका विस्तार करनेवाले वसुदेव नामक पुत्रको जन्म देंगे, जिसका दूसरा नाम आनकदुन्दुभि होगा। उन्हींके पुत्र चार भुजाधारी भगवान् वासुदेव होंगे
Dalam garis keturunan para pelaksana yajña, yang amat suci perilakunya dan dihormati para brāhmaṇa, akan lahir Śūra—terunggul di antara para kṣatriya, perkasa dan masyhur. Ia, yang memuliakan orang lain, akan memperanakkan putra yang memperluas garis keturunannya.
Verse 32
वसुदेव इति ख्यातं पुत्रमानकदुन्दुभिम् । तस्य पुत्रश्नतुर्बाहुर्वासुदेवो भविष्यति,उसका छोटा पुत्र शूर नामसे विख्यात होगा। वे सभी यदुवंशी विख्यात पराक्रमी, सदाचार और सदगुणसे सुशोभित, यज्ञशील और विशुद्ध आचार-विचारवाले होंगे। उनका कुल ब्राह्मणोंद्वारा सम्मानित होगा। उस कुलमें महापराक्रमी, महायशस्वी और दूसरोंको सम्मान देनेवाले क्षत्रिय-शिरोमणि शूर अपने वंशका विस्तार करनेवाले वसुदेव नामक पुत्रको जन्म देंगे, जिसका दूसरा नाम आनकदुन्दुभि होगा। उन्हींके पुत्र चार भुजाधारी भगवान् वासुदेव होंगे
Ia akan memperanakkan putra yang termasyhur bernama Vasudeva, juga dikenal sebagai Ānakadundubhi. Dari dirinya akan lahir Bhagavān Vāsudeva yang berlengan empat.
Verse 33
दाता ब्राह्मणसत्कर्ता ब्रह्मभूतो द्विजप्रिय: | राज्ञो मागधसंरुद्धान् मोक्षयिष्यति यादव:,भगवान् वासुदेव दानी, ब्राह्मणोंका सत्कार करनेवाले, ब्रह्मभूत और ब्राह्मणप्रिय होंगे। वे यदुकुलतिलक श्रीकृष्ण मगधराज जरासंधकी कैदमें पड़े हुए राजाओंको बन्धनसे छुड़ायेंगे
Ia akan menjadi dermawan, pemulia brāhmaṇa, teguh dalam rasa Brahman, dan dikasihi para dvija. Yādava itu akan membebaskan para raja yang dipenjarakan oleh penguasa Magadha, melepaskan mereka dari belenggu.
Verse 34
जरासंध॑ तु राजानं निर्जित्य गिरिगद्नरे । सर्वपार्थिवरत्नाढ्यो भविष्यति स वीर्यवान्,वे पराक्रमी श्रीहरि पर्वतकी कन्दरा (राजगृह)-में राजा जरासंधको जीतकर समस्त राजाओंके द्वारा उपहृत रत्नोंसे सम्पन्न होंगे
Setelah menaklukkan Raja Jarāsandha di Girigadnara (Rājagṛha, benteng pegunungan), ia yang perkasa akan diperkaya oleh permata dan harta berharga yang dipersembahkan oleh semua raja.
Verse 35
पृथिव्यामप्रतिहतो वीर्येण च भविष्यति । विक्रमेण च सम्पन्न: सर्वपार्थिवपार्थिव:,वे इस भूमण्डलमें अपने बल-पराक्रमद्वारा अजेय होंगे। विक्रमसे सम्पन्न तथा समस्त राजाओंके भी राजा होंगे
Di bumi ini ia akan tak terkalahkan karena kekuatannya. Berhias keberanian dan kepahlawanan, ia akan menjadi raja di atas para raja—penguasa tertinggi di antara semua penguasa duniawi.
Verse 36
शूरसेनेषु भूत्वा स द्वारकायां वसन प्रभु: । पालयिष्यति गां देवीं विजित्य नयवित् सदा,नीतिवेत्ता भगवान् श्रीकृष्ण शूरसेन देश (मथुरा-मण्डल)-में अवतीर्ण होकर वहाँसे द्वारकापुरीमें जाकर रहेंगे और समस्त राजाओंको जीतकर सदा इस पृथ्वीदेवीका पालन करेंगे
Terlahir di tengah bangsa Śūrasena dan bersemayam sebagai penguasa di Dvārakā, Sang Prabhu akan menaklukkan para raja. Senantiasa berpegang pada nīti (tata kebijakan yang benar), Ia akan melindungi Dewi Bumi ini.
Verse 37
त॑ भवन्त: समासाद्य वाड्माल्यैरह्णैवरै: | अर्चयन्तु यथान्यायं ब्रह्माणमिव शाश्वतम्,आपलोग उन्हीं भगवानकी शरण लेकर अपनी वाड्मयी मालाओं तथा श्रेष्ठ पूजनोपचारोंसे सनातन ब्रह्माकी भाँति उनका यथोचित पूजन करें
Maka hendaklah kalian berlindung pada-Nya, mendekat kepada-Nya, dan memuja-Nya dengan semestinya—mempersembahkan rangkaian pujian berupa kata-kata suci serta upacara harian yang terbaik—menghormati-Nya laksana Brahmā yang kekal.
Verse 38
यो हि मां द्रष्टमिच्छेत ब्रह्माणं च पितामहम् । द्रष्टव्यस्तेन भगवान् वासुदेव: प्रतापवान्,जो मेरा और पितामह ब्रह्माजीका दर्शन करना चाहता हो, उसे प्रतापी भगवान् वासुदेवका दर्शन करना चाहिये
Barangsiapa sungguh ingin memandang Aku dan juga Brahmā, sang Pitāmaha, hendaklah ia mencari darśana Bhagavān Vāsudeva yang penuh kemuliaan.
Verse 39
दृष्टे तस्मिन्नहं दृष्टो न मे5त्रास्ति विचारणा । पितामहो वा देवेश इति वित्त तपोधना:,तपोधनो! उनका दर्शन हो जानेपर मेरा ही दर्शन हो गया, अथवा उनके दर्शनसे देवेश्वर ब्रह्माजीका दर्शन हो गया ऐसे समझो, इस विषयमें मुझे कोई विचार नहीं करना है अर्थात् संदेह नहीं है
Wahai para tapodhāna (yang kaya tapa)! Bila Ia telah dipandang, maka Aku pun telah dipandang—di sini tiada keraguan bagiku. Atau pahamilah: dengan memandang-Nya, Brahmā sang Pitāmaha, penguasa para dewa, pun telah dipandang.
Verse 40
स यस्य पुण्डरीकाक्ष: प्रीतियुक्तो भविष्यति | तस्य देवगण: प्रीतो ब्रह्मपूर्वो भविष्यति,जिसपर कमलनयन भगवान् श्रीकृष्ण प्रसन्न होंगे, उसके ऊपर ब्रह्मा आदि देवताओंका समुदाय प्रसन्न हो जायगा
Barangsiapa menjadi sasaran kasih dan keridaan Tuhan bermata-teratai, Śrī Kṛṣṇa, maka kepadanya seluruh golongan para dewa—dengan Brahmā di depan—juga akan berkenan.
Verse 41
मानवलोकमें जो भगवान् श्रीकृष्णकी शरण लेगा, उसे कीर्ति, विजय तथा उत्तम स्वर्गकी प्राप्ति होगी
Siapa pun yang, di dunia manusia, berlindung kepada Bhagavān Śrī Kṛṣṇa, akan meraih kemasyhuran, kemenangan, dan juga surga yang tertinggi.
Verse 42
धर्माणां देशिक: साक्षात् स भविष्यति धर्मभाक् । धर्मवद्धिः स देवेशो नमस्कार्य: सदोद्यतै:,इतना ही नहीं, वह धर्मोका उपदेश देनेवाला साक्षात् धर्माचार्य एवं धर्मफलका भागी होगा। अतः धर्मात्मा पुरुषोंको चाहिये कि वे सदा उत्साहित रहकर देवेश्वर भगवान् वासुदेवको नमस्कार करें
Ia akan menjadi pengajar dharma secara langsung dan turut memperoleh buah dharma. Karena itu, orang-orang yang teguh dalam kebajikan hendaknya senantiasa dengan semangat menunduk hormat kepada Vāsudeva, Tuhan para dewa, yang menjadi peneguh dan peningkat dharma.
Verse 43
यश्न तं मानवे लोके संश्रयिष्यति केशवम् | तस्य कीर्तिरजयश्रैव स्वर्गश्नैव भविष्यति,धर्म एव परो हि स्यात् तस्मिन्नभ्यर्चिते विभौ । स हि देवो महातेजा: प्रजाहितचिकीर्षया उन सर्वव्यापी परमेश्वरकी पूजा करनेसे परम धर्मकी सिद्धि होगी। वे महान् तेजस्वी देवता हैं। उन पुरुषसिंह श्रीकृष्णने प्रजाका हित करनेकी इच्छासे धर्मका अनुष्ठान करनेके लिये करोड़ों ऋषियोंकी सृष्टि की है। भगवान्के उत्पन्न किये हुए वे सनत्कुमार आदि ऋषि गन्धमादन पर्वतपर सदा तपस्यामें संलग्न रहते हैं। अतः द्विजवरो! उन प्रवचन-कुशल, धर्मज्ञ वासुदेवको सदा प्रणाम करना चाहिये
Siapa pun di dunia manusia yang berlindung kepada Keśava, baginya kemasyhuran tak terkalahkan dan surga pun menjadi bagiannya. Bila Sang Mahakuasa itu dipuja menurut tata cara, dharma sendiri menjadi yang tertinggi dan tegak kokoh. Ia adalah dewa bercahaya agung, bertindak demi kesejahteraan makhluk.
Verse 44
धर्मार्थ पुरुषव्यात्र ऋषिकोटी: ससर्ज ह । ता: सृष्टास्तेन विभुना पर्वते गन्धमादने,उन सर्वव्यापी परमेश्वरकी पूजा करनेसे परम धर्मकी सिद्धि होगी। वे महान् तेजस्वी देवता हैं। उन पुरुषसिंह श्रीकृष्णने प्रजाका हित करनेकी इच्छासे धर्मका अनुष्ठान करनेके लिये करोड़ों ऋषियोंकी सृष्टि की है। भगवान्के उत्पन्न किये हुए वे सनत्कुमार आदि ऋषि गन्धमादन पर्वतपर सदा तपस्यामें संलग्न रहते हैं। अतः द्विजवरो! उन प्रवचन-कुशल, धर्मज्ञ वासुदेवको सदा प्रणाम करना चाहिये
Wahai harimau di antara manusia, demi dharma dan artha, Sang Penguasa yang meliputi segalanya menciptakan berjuta-juta resi. Para resi yang diciptakan-Nya itu berdiam di Gunung Gandhamādana.
Verse 45
सनत्कुमारप्रमुखास्तिष्ठन्ति तपसान्विता: । तस्मात् स वाग्मी धर्मज्ञो नमस्यो द्विजपुज्रवा:,उन सर्वव्यापी परमेश्वरकी पूजा करनेसे परम धर्मकी सिद्धि होगी। वे महान् तेजस्वी देवता हैं। उन पुरुषसिंह श्रीकृष्णने प्रजाका हित करनेकी इच्छासे धर्मका अनुष्ठान करनेके लिये करोड़ों ऋषियोंकी सृष्टि की है। भगवान्के उत्पन्न किये हुए वे सनत्कुमार आदि ऋषि गन्धमादन पर्वतपर सदा तपस्यामें संलग्न रहते हैं। अतः द्विजवरो! उन प्रवचन-कुशल, धर्मज्ञ वासुदेवको सदा प्रणाम करना चाहिये
Sanatkumāra dan para resi utama lainnya berdiam, dipenuhi daya tapa. Karena itu, wahai yang terbaik di antara kaum dwija, Tuhan yang fasih dan mengetahui dharma itu—Vāsudeva, Yang Mahameresapi—patut disembah dengan hormat; sebab pemujaan kepada Yang Mahatinggi membawa tercapainya dharma tertinggi. Ia adalah dewa yang agung dan bercahaya. Demi kesejahteraan rakyat, Sang Narasiṃha Śrī Kṛṣṇa menciptakan berjuta-juta resi agar dharma dapat ditegakkan melalui laku suci. Para resi ciptaan-Nya, Sanatkumāra dan yang lain, senantiasa bertapa di Gunung Gandhamādana; maka hendaklah engkau selalu bersujud kepada Vāsudeva, yang mahir bertutur dan arif dalam dharma.
Verse 46
दिवि श्रेष्ठो हि भगवान् हरिनारायण: प्रभु: । वन्दितो हि स वन्देत मानितो मानयीत च । अहहितश्चाहयेन्नित्यं पूजित: प्रतिपूजयेत्,वे भगवान् नारायण हरि देवलोकमें सबसे श्रेष्ठ हैं। जो उनकी वन्दना करता है, उसकी वे भी वन्दना करते हैं। जो उनका आदर करता है, उसका वे भी आदर करते हैं। इसी प्रकार अर्चित होनेपर वे भी अर्चना करते और पूजित या प्रशंसित होनेपर वे भी पूजा या प्रशंसा करते हैं
Di surga, Tuhan Hari-Nārāyaṇa adalah Penguasa yang paling utama. Siapa yang memuliakan-Nya, akan dimuliakan-Nya pula; siapa yang menghormati-Nya, akan dibalas-Nya dengan hormat. Siapa yang beritikad baik kepada-Nya, kepada orang itu Ia senantiasa berkenan; dan bila Ia dipuja, Ia menganugerahkan kembali karunia yang sepadan—demikianlah bhakti dijawab dengan rahmat yang setara.
Verse 47
दृष्ट: पश्येदहरह: संश्रित: प्रतिसंश्रयेत् । अर्चितश्षार्चयेन्नित्यं स देवो द्विजसत्तमा:,श्रेष्ठ ब्राह्मणो! जो प्रतिदिन उनका दर्शन करता है, उसकी ओर वे भी कृपादृष्टि करते हैं। जो उनका आश्रय लेता है, उसके हृदयमें वे भी आश्रय लेते हैं तथा जो उनकी पूजा करता है, उसकी वे भी सदा पूजा करते हैं
Wahai yang terbaik di antara kaum dwija! Siapa yang memandang-Nya hari demi hari, akan disambut oleh pandangan rahmat-Nya; siapa yang berlindung kepada-Nya, akan mendapati Tuhan bersemayam sebagai sandaran di dalam hatinya; dan siapa yang memuja-Nya, akan senantiasa dimuliakan-Nya sebagai yang patut dihormati.
Verse 48
एतत् तस्यानवद्यस्य विष्णोर्व परमं व्रतम् । आदिदेवस्य महत:ः सज्जनाचरितं सदा,उन प्रशंसनीय आदि देवता भगवान् महाविष्णुका यह उत्तम व्रत है, जिसका साधु पुरुष सदा आचरण करते आये हैं
Inilah laku suci tertinggi milik Viṣṇu, Sang Dewa Purba yang agung dan tanpa cela—sebuah brata mulia yang sejak dahulu senantiasa dijalankan oleh orang-orang saleh.
Verse 49
भुवने<भ्यर्चितो नित्यं देवेरेपि सनातन: । अभयेनानुरूपेण युज्यन्ते तमनुव्रता:,वे सनातन देवता हैं, अतः इस त्रिभुवनमें देवता भी सदा उन्हींकी पूजा करते हैं। जो उनके अनन्य भक्त हैं, वे अपने भजनके अनुरूप ही निर्भय पद प्राप्त करते हैं
Ia adalah Dewa yang kekal; karena itu di tiga dunia pun para dewa senantiasa memuja-Nya. Mereka yang berbakti tanpa terbagi kepada-Nya meraih kedudukan tanpa takut, sepadan dengan mutu dan kedalaman bhakti mereka.
Verse 50
कर्मणा मनसा वाचा स नमस्यो द्विजै: सदा । यत्नवद्धिरुपस्थाय द्रष्टव्यो देवकीसुत:,द्विजोंको चाहिये कि वे मन, वाणी और कर्मसे सदा उन भगवानको प्रणाम करें और यत्नपूर्वक उपासना करके उन देवकीनन्दनका दर्शन करें
Kaum dwija hendaknya senantiasa bersujud hormat kepada-Nya dengan perbuatan, pikiran, dan ucapan; serta dengan upaya yang tekun berbakti dalam pemujaan dan mencari darśana Putra Devakī.
Verse 51
एष वो>भिहितो मार्गो मया वै मुनिसत्तमा: | त॑ दृष्टवा सर्वशो देवं दृष्टा: स्यु: सुरसत्तमा:,मुनिवरो! यह मैंने आपलोगोंको उत्तम मार्ग बता दिया है। उन भगवान् वासुदेवका सब प्रकारसे दर्शन कर लेनेपर सम्पूर्ण श्रेष्ठ देवताओंका दर्शन करना हो जायगा
Wahai para resi termulia, inilah jalan yang telah kukatakan kepadamu. Bila seseorang memandang Sang Dewa, Vāsudeva, dalam segala segi, maka seakan-akan ia telah memandang semua dewa yang paling utama.
Verse 52
महावराहं त॑ देवं॑ सर्वलोकपितामहम् । अहं चैव नमस्यामि नित्यमेव जगत्पतिम्,मैं भी महावराहरूप धारण करनेवाले उन सर्वलोक-पितामह जगदीश्वरको नित्य प्रणाम करता हूँ
Aku pun senantiasa bersujud kepada Sang Dewa yang menjelma sebagai Mahāvarāha, sang Pitāmaha bagi segenap dunia, Penguasa jagat raya.
Verse 53
तत्र च त्रितयं दृष्टं भविष्यति न संशय: । समस्ता हि वयं देवास्तस्य देहे वसामहे,हम सब देवता उनके श्रीविग्रहमें निवास करते हैं। अतः: उनका दर्शन करनेसे तीनों देवताओं (ब्रह्मा, विष्णु और शिव)-का दर्शन हो जाता है, इसमें संशय नहीं है
Di sana, penglihatan atas triad ilahi pun akan diperoleh—tanpa keraguan. Sebab kami semua para dewa bersemayam dalam tubuh-Nya; maka dengan memandang-Nya, triad itu pun terpandang.
Verse 54
तस्य चैवाग्रजो भ्राता सिताद्रिनिचयप्रभ: । हली बल इति ख्यातो भविष्यति धराधर:,उनके बड़े भाई कैलासकी पर्वतमालाओंके समान श्वेत कान्तिसे प्रकाशित होनेवाले हलधर और बलरामके नामसे विख्यात होंगे। पृथ्वीको धारण करनेवाले शेषनाग ही बलरामके रूपमें अवतीर्ण होंगे
Dan kakaknya, bercahaya putih laksana gugusan puncak Gunung Kailāsa, akan termasyhur sebagai Halī dan sebagai Bala (Balarāma). Ia akan menjadi ‘penyangga bumi’—Śeṣa Nāga sendiri menjelma dalam wujud Balarāma.
Verse 55
त्रिशिरास्तस्य दिव्यश्व॒ शातकुम्भमयो द्रुम: । ध्वजस्तृणेन्द्रो देवस्प भविष्यति रथाश्रित:,बलदेवजीके रथपर तीन शिखाओंसे युक्त दिव्य सुवर्णमय तालवृक्ष ध्वजके रूपमें सुशोभित होगा
Īśvara bersabda: “Panji pada keretanya akan berupa pohon palem (tāla) ilahi dari emas murni, berpuncak tiga; ia akan termasyhur dengan nama ‘Tṛṇendra’ dan ‘Devaspā.’”
Verse 56
शिरो नागैर्महाभोगै: परिकीर्ण महात्मभि: । भविष्यति महाबाहो: सर्वलोके श्चरस्य च,सर्वलोकेश्वर महाबाहु बलरामजीका मस्तक बड़े-बड़े फनवाले विशालकाय सर्पोंसे घिरा हुआ होगा
Īśvara bersabda: “Kepala Balarāma, sang Mahabahu, Penguasa segala loka, akan dikelilingi dan diselubungi oleh para nāga agung berhud besar, mulia tabiatnya.”
Verse 57
चिन्तितानि समेष्यन्ति शस्त्राण्यस्त्राणि चैव ह । अनन्तश्न स एवोक्तो भगवान् हरिरव्यय:,उनके चिन्तन करते ही सम्पूर्ण दिव्य अस्त्र-शस्त्र उन्हें प्राप्त हो जायँगे। अविनाशी भगवान् श्रीहरि ही अनन्त शेषनाग कहे गये हैं
Begitu ia memikirkannya, seluruh senjata ilahi—baik senjata genggam maupun senjata lontar—akan datang kepadanya. Sungguh, Tuhan Hari yang tak binasa sendiri dinyatakan sebagai Ananta (Śeṣa), Yang Tak Berujung.
Verse 58
समादिष"्ट श्न विबुधैर्दर्शय त्वमिति प्रभो । सुपर्णो यस्य वीर्येण कश्यपस्यात्मजो बली । अन्तं नैवाशकद् द्रष्टं देवस्पथ परमात्मन:,पूर्वकालमें देवताओंने गरुड़जीसे यह अनुरोध किया कि “आप हमें भगवान् शेषका अन्त दिखा दीजिये।' तब कश्यपके बलवान पुत्र गरुड़ अपनी सारी शक्ति लगाकर भी उन परमात्मदेव अनन्तका अन्त न देख सके
Pada masa silam para dewa memohon kepada Garuḍa, “Wahai Tuan, perlihatkan kepada kami batas Ananta.” Maka Suparṇa Garuḍa, putra perkasa Kaśyapa, mengerahkan segenap dayanya; namun ia tetap tak mampu menyaksikan ujung Ananta, Sang Paramātman, tumpuan dan jalan para dewa.
Verse 59
सच शेषो विचरते परया वै मुदा युतः । अन्तर्वसति भोगेन परिरभ्य वसुन्धराम्,वे भगवान् शेष बड़े आनन्दके साथ सर्वत्र विचरते हैं और अपने विशाल शरीरसे पृथिवीको आलिंगनपाशमें बाँधकर पाताललोकमें निवास करते हैं
Īśvara bersabda: “Śeṣa yang ilahi itu bergerak ke mana-mana, dipenuhi sukacita tertinggi. Dengan lilitan tubuh ular raksasanya ia memeluk Bumi, dan bersemayam di alam bawah (Pātāla).”
Verse 60
य एव विष्णु: सो5नन्तो भगवान् वसुधाधर: । यो राम: स हृषीकेशो यो5च्युत: स धराधर:,जो भगवान् विष्णु हैं, वे ही इस पृथ्वीको धारण करनेवाले भगवान् अनन्त हैं। जो बलराम हैं वे ही श्रीकृष्ण हैं, जो श्रीकृष्ण हैं वे ही भूमिधर बलराम हैं
Dia yang adalah Viṣṇu, Dialah juga Bhagavān Ananta, penopang bumi. Dia yang adalah Rāma (Balarāma), Dialah Hṛṣīkeśa (Śrī Kṛṣṇa); dan Dia yang adalah Acyuta (Śrī Kṛṣṇa), Dialah pula sang penyangga bumi (Balarāma).
Verse 61
तावुभौ पुरुषव्याप्रौ दिव्यौ दिव्यपराक्रमौ | द्रष्टटया माननीयौ च चक्रलाड्नलधारिणौ,वे दोनों दिव्य रूप और दिव्य पराक्रमसे सम्पन्न पुरुषसिंह बलराम और श्रीकृष्ण क्रमश: चक्र एवं हल धारण करनेवाले हैं। तुम्हें उन दोनोंका दर्शन एवं सम्मान करना चाहिये
Keduanya adalah harimau di antara manusia—berwujud ilahi dan berdaya-utama ilahi. Mereka patut dipandang dan dihormati, sebab merekalah pemegang cakra dan bajak: Balarāma dan Śrī Kṛṣṇa.
Verse 62
एष वोनुग्रह: प्रोक्तो मया पुण्यस्तपोधना: । यद् भवन्तो यदुश्रेष्ठ पूजयेयु: प्रयत्नतः,तपोधनो! आपलोगोंपर अनुग्रह करके मैंने भगवानका पवित्र माहात्म्य इसलिये बताया है कि आप प्रयत्नपूर्वक उन यदुकुलतिलक श्रीकृष्णकी पूजा करें
Wahai yang kaya tapa, ajaran suci ini telah kukatakan sebagai anugerah bagimu. Aku menyebutkan kemuliaan ini agar engkau—wahai yang terbaik di antara Yadu—beribadah (kepada Śrī Kṛṣṇa) dengan sungguh-sungguh.
Verse 147
इति श्रीमहा भारते अनुशासनपर्वणि दानधर्मपर्वणि पुरुषमाहात्म्ये सप्तचत्वारिंशदधिकशततमो< ध्याय:,इस प्रकार श्रीमह्याभारत अनुशासनपर्वके अन्तर्गत दानधर्मपर्वमें परमपुरुष श्रीकृष्णका माहात्म्यविषयक एक सौ सैंतालीसवाँ अध्याय पूरा हुआ
Demikianlah, dalam Śrī Mahābhārata, pada Anuśāsana Parva, dalam bagian Dāna-dharma Parva, pada topik kemuliaan Sang Purusha, berakhirlah bab ke-147.
The chapter frames a governance dilemma: how to convert wartime succession into ethically legitimate rule—balancing public consolation, ritual obligations, and deference to elders while accepting irreversible outcomes without destabilizing grief.
Bhīṣma elevates satya as “paramaṃ balam” (the highest strength) and pairs it with ānṛśaṃsya and disciplined conduct, presenting ethical truthfulness and non-cruelty as the stabilizing foundations of post-conflict society.
No explicit phalaśruti is stated; the meta-function is situational authorization—Bhīṣma’s sanctioned, time-marked departure (uttarāyaṇa) and his final injunctions legitimize Yudhiṣṭhira’s rule as dharma-aligned instruction rather than mere political victory.