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Sukta 5.55
Atri (Ātreya tradition) (traditional ascription for Mandala 5 Atri hymns; specific verse-level attribution follows the sukta)
Maruts
Triṣṭubh (probable; refrain-like cadence appears through the sukta)
This hymn praises the Maruts as radiant, well-armed storm-gods who ride swiftly with well-yoked steeds and whose chariots move on an auspicious path. It invokes them to dispel hostility and harm, to guide the worshippers toward what is better (vasyaḥ), and to accept the offering so the community may gain abundance (rayi) and well-being.
Mantra 1
प्रयज्यवो मरुतो भ्राजदृष्टयो बृहद्वयो दधिरे रुक्मवक्षसः । ईयन्ते अश्वैः सुयमेभिराशुभिः शुभं यातामनु रथा अवृत्सत ॥
मरुत देवता यज्ञ में सबसे पहले पूजे जाते हैं। उनके हाथ में चमकते हुए भाले हैं, उनकी छाती सुनहरी है। वो तेज़ घोड़ों की गाड़ी में चलते हैं। उनकी रथ अच्छी रास्ते पर चले, और अंदर की अच्छाई की तरफ ले जाए।
Mantra 2
स्वयं दधिध्वे तविषीं यथा विद बृहन्महान्त उर्विया वि राजथ । उतान्तरिक्षं ममिरे व्योजसा शुभं यातामनु रथा अवृत्सत ॥
मरुत खुद अपनी ताकत दिखा रहे हैं। वो बड़े हैं, आसमान में फैल के चमक रहे हैं। उनकी शक्ति इतनी है कि वो आसमान नाप सकते हैं। उनकी रथ अच्छी रास्ते पर चले।
Mantra 3
साकं जाताः सुभ्वः साकमुक्षिताः श्रिये चिदा प्रतरं वावृधुर्नरः । विरोकिणः सूर्यस्येव रश्मयः शुभं यातामनु रथा अवृत्सत ॥
मरुत साथ में पैदा हुए, साथ में बड़े हुए। वो चमक के साथ आगे बढ़ रहे हैं। सूरज की किरणों की तरह चमक रहे हैं। उनकी रथ अच्छी रास्ते पर चले।
Mantra 4
आभूषेण्यं वो मरुतो महित्वनं दिदृक्षेण्यं सूर्यस्येव चक्षणम् । उतो अस्माँ अमृतत्वे दधातन शुभं यातामनु रथा अवृत्सत ॥
मरुत की बड़ाई सबको पसंद है। वो दिखने में इतने अच्छे हैं जैसे सूरज चमकता है। हमें भी अमरत्व दो, हमें भी मरने से बचाओ। उनकी रथ अच्छी रास्ते पर चले।
Mantra 5
उदीरयथा मरुतः समुद्रतो यूयं वृष्टिं वर्षयथा पुरीषिणः । न वो दस्रा उप दस्यन्ति धेनवः शुभं यातामनु रथा अवृत्सत ॥
मरुत समुंदर से पानी उठा लाते हैं। वो बारिश बरसाते हैं, उनके पास बहुत कुछ है। उनकी नदियाँ कभी सूखी नहीं होती। उनकी रथ अच्छी रास्ते पर चले।
Mantra 6
यदश्वान्धूर्षु पृषतीरयुग्ध्वं हिरण्ययान्प्रत्यत्काँ अमुग्ध्वम् । विश्वा इत्स्पृधो मरुतो व्यस्यथ शुभं यातामनु रथा अवृत्सत ॥
मरुत, जब तुमने अपनी घोड़ियाँ गाड़ी में जोड़ी और सोना लगाया, तब तुमने सारी दुश्मनी छोड़ दी। भगवान, तुम्हारी गाड़ी सही रास्ते पे चले।
Mantra 7
न पर्वता न नद्यो वरन्त वो यत्राचिध्वं मरुतो गच्छथेदु तत् । उत द्यावापृथिवी याथना परि शुभं यातामनु रथा अवृत्सत ॥
ना पहाड़ तुम्हे रोक सकता है, ना नदियाँ। जहाँ भी रास्ता दिखा, वहाँ चले गए। आसमान और धरती दोनों पे घूमते हो। तुम्हारी गाड़ी सही रास्ते पे चले।
Mantra 8
यत्पूर्व्यं मरुतो यच्च नूतनं यदुद्यते वसवो यच्च शस्यते । विश्वस्य तस्य भवथा नवेदसः शुभं यातामनु रथा अवृत्सत ॥
मरुत, तुम्हारे पास पुराना भी है और नया भी। जो नया उठता है, जो लोग गाते हैं, तुम सब जानते हो। तुम्हारी गाड़ी सही रास्ते पे चले और हमारे पास आए।
Mantra 9
मृळत नो मरुतो मा वधिष्टनास्मभ्यं शर्म बहुलं वि यन्तन । अधि स्तोत्रस्य सख्यस्य गातन शुभं यातामनु रथा अवृत्सत ॥
मरुत, हमपे कृपा करो, हमे मत मारो। हमें बड़ा सुरक्षा और शांति दो। हमारी पूजा और दोस्ती को अपना लो। तुम्हारी गाड़ी सही रास्ते पे चले और हमारे पास आए।
Mantra 10
यूयमस्मान्नयत वस्यो अच्छा निरंहतिभ्यो मरुतो गृणानाः । जुषध्वं नो हव्यदातिं यजत्रा वयं स्याम पतयो रयीणाम् ॥
मरुत, तुम हमे आगे ले जाओ, बुरी चीज़ों से बचा के। जब हम तुम्हारी पूजा करते हैं, हमारी भेंट क़ुबूल करो। हम बड़े आदमी बनें, खुश रहें।
The Maruts are a group of powerful storm deities—radiant, swift, and well-armed—who protect, energize, and scatter obstacles. They are often linked with Indra and the forces of wind and thunder.
The hymn asks the Maruts to drive away hostility and harm, to guide the worshippers toward what is better (vasyaḥ), and to grant abundance and strength (rayi).
Rayi means “plenitude” or “wealth,” including material prosperity, strength, and supportive resources. In a deeper sense it also suggests fullness of life and flourishing.
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