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Sukta 5.52
Śyāvāśva (as addressed; hymn in Śyāvāśva Ātreya cycle is traditional for Maruts in Mandala 5)
Maruts
Triṣṭubh (probable; Marut hymns commonly Triṣṭubh and the verse length fits)
This hymn is a vigorous invocation to the Maruts—youthful storm-gods—praising their straight, treachery-free glory, their roaring power, and their swift chariots that break obstacles and release abundance. It asks them to come to the sacrifice, strengthen the singer’s fame and protection, and grant rādhas (boons) such as cattle, horses, and victorious energy. The imagery moves between cosmic storm-action (cloud, stone, river) and the inner awakening of ardor and courage in the worshipper.
Mantra 1
प्र श्यावाश्व धृष्णुयार्चा मरुद्भिॠक्वभिः । ये अद्रोघमनुष्वधं श्रवो मदन्ति यज्ञियाः ॥
हे श्यावाश्व, मरुत देवताओं के लिए ज़ोर से स्तुति गाओ। यह वो शक्तियाँ हैं जो धोखा नहीं देती। यह सच्ची बड़ाई में खुश रहती हैं। इनके लिए यज्ञ करो, यह सीधी और तेज़ हैं।
Mantra 2
ते हि स्थिरस्य शवसः सखायः सन्ति धृष्णुया । ते यामन्ना धृषद्विनस्त्मना पान्ति शश्वतः ॥
मरुत शक्तियाँ मज़बूत हैं और साथ देती हैं। यह रास्ते में हमारी रक्षा करती हैं। अपनी ताकत से यह हमेशा संभालती रहती हैं। यह ऊपर की तरफ ले जाने वाली राह को बचाती हैं।
Mantra 3
ते स्यन्द्रासो नोक्षणोऽति ष्कन्दन्ति शर्वरीः । मरुतामधा महो दिवि क्षमा च मन्महे ॥
यह शक्तियाँ तेज़ हैं और रात के अंधेर को पार कर जाती हैं, जैसे मज़दूर बैल दौड़ते हैं। हम मरुत देवताओं की बड़ी ताकत को सोचते हैं। यह आसमान में भी हैं और धरती पर भी।
Mantra 4
मरुत्सु वो दधीमहि स्तोमं यज्ञं च धृष्णुया । विश्वे ये मानुषा युगा पान्ति मर्त्यं रिषः ॥
हम मरुत देवताओं के लिए स्तुति गाते हैं और यज्ञ करते हैं। यह वो शक्तियाँ हैं जो इंसानी ज़िन्दगी भर हमारी रक्षा करती हैं। यह हमें बुराई से बचाती हैं।
Mantra 5
अर्हन्तो ये सुदानवो नरो असामिशवसः । प्र यज्ञं यज्ञियेभ्यो दिवो अर्चा मरुद्भ्यः ॥
यह लोग बहुत बड़े दिल वाले हैं, इनमे कोई कमी नहीं। यह बहुत ताकतवर भी हैं। इनके लिए यज्ञ तैयार करो क्योंकि यह इसके हकदार हैं। आसमान से आवाज़ उठाओ और मरुत देवताओं को पुकारो।
Mantra 6
आ रुक्मैरा युधा नर ऋष्वा ऋष्टीरसृक्षत । अन्वेनाँ अह विद्युतो मरुतो जज्झतीरिव भानुरर्त त्मना दिवः ॥
यह वीर अपने सोने के जैसी चमक वाले हथियार लेके आए हैं। उन्होंने अपने लंबे भाले चला दिए। उनके पीछे बिजली चमक रही है, जैसे आग जल रही हो। आसमान की रोशनी अपनी ताकत से चल रही है।
Mantra 7
ये वावृधन्त पार्थिवा य उरावन्तरिक्ष आ । वृजने वा नदीनां सधस्थे वा महो दिवः ॥
यह मरुत देवता ज़मीन पर बड़े हो गए हैं, आसमान के बीच में भी हैं। नदियों के पास रहते हैं या बड़े आसमान में। जहाँ भी हैं, वहाँ अपनी ताकत से खड़े हैं।
Mantra 9
उत स्म ते परुष्ण्यामूर्णा वसत शुन्ध्यवः । उत पव्या रथानामद्रिं भिन्दन्त्योजसा ॥
तुम साफ़ लोग परुष्णी नदी में रहते हो, जैसे बादल ढाँके जैसा। तुम अपने रथ के पहिए से इतनी ताकत से पत्थर तोड़ देते हो।
Mantra 10
आपथयो विपथयोऽन्तस्पथा अनुपथाः । एतेभिर्मह्यं नामभिर्यज्ञं विष्टार ओहते ॥
यह रास्ते बनाते हैं और तोड़ते भी हैं। अंदर की राह जानते हैं और पीछे वाली राह भी। इन सब नाम से यह मेरा यज्ञ फैला देते हैं और आगे ले जाते हैं।
Mantra 11
अधा नरो न्योहतेऽधा नियुत ओहते । अधा पारावता इति चित्रा रूपाणि दर्श्या ॥
फिर वोह वीर पास आते हैं। अपनी ताकत लेकर साथ में आते हैं। वोह इतने दूर से आते हैं जैसे आसमान से। उनके अलग-अलग रूप साफ दिखने लगते हैं।
Mantra 13
य ऋष्वा ऋष्टिविद्युतः कवयः सन्ति वेधसः । तमृषे मारुतं गणं नमस्या रमया गिरा ॥
वोह लोग बड़े हैं, उनके हाथ में भाले चमकते हैं। वोह रिशि हैं और ज्ञानी हैं। रिशि, मरुत गण के आगे झुक जाओ। उन्हे अच्छी बात से खुश कर दो।
Mantra 14
अच्छ ऋषे मारुतं गणं दाना मित्रं न योषणा । दिवो वा धृष्णव ओजसा स्तुता धीभिरिषण्यत ॥
रिशि, मरुत गण के पास आ जाओ। वोह देनेवाले हैं, जैसे कोई अच्छा दोस्त हो, जैसे कोई प्यारा हो। वोह आसमान से आते हैं, बड़ी ताकत से। जब उनकी तारीफ होती है, वोह आगे बढ़ने को कहते हैं।
Mantra 15
नू मन्वान एषां देवाँ अच्छा न वक्षणा । दाना सचेत सूरिभिर्यामश्रुतेभिरञ्जिभिः ॥
अब जाग के इन देवियों के पास जाओ। पीछे मत रहो। देनेवाले से जुड़ जाओ। जो लोग सच सुनते हैं और तेज़ी से चलते हैं, उनके साथ रहो।
Mantra 16
प्र ये मे बन्ध्वेषे गां वोचन्त सूरयः पृश्निं वोचन्त मातरम् । अधा पितरमिष्मिणं रुद्रं वोचन्त शिक्वसः ॥
वोह लोग मुझे बताते हैं जो सच ढूंढते हैं। वोह गाय का नाम लेते हैं। प्रिश्नि को माँ बोलते हैं। फिर रुद्र को बाप बोलते हैं, जो सबसे बड़ा है।
Mantra 17
सप्त मे सप्त शाकिन एकमेका शता ददुः । यमुनायामधि श्रुतमुद्राधो गव्यं मृजे नि राधो अश्व्यं मृजे ॥
सात बड़े लोगों ने मुझे दिया है, हर एक ने सौ गुना। यमुना नदी पर जो सच्ची बात सुनाई दी, मैं उसको पकड़ लेता हूँ। गाय-भैंस की शक्ति मुझे मिल रही है। घोड़े की ताकत भी अंदर आ रही है।
The Maruts are a troop of youthful storm-deities who roar, ride in swift chariots, bring rain, and protect the sacrificer by breaking obstacles and driving away harm.
It asks for protection, victorious strength, and rādhas—practical boons like cattle and horses, along with enduring fame and energetic uplift for the worshipper and community.
In Vedic imagery it can be the hard obstruction that holds back waters and fertility; inwardly it also suggests breaking inner blockage—fear, inertia, or darkness—so force and clarity can flow.
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