Opening the text

Rishi: Atharvanic/Angiras-type martial seer tradition (consult Anukramaṇī for exact attribution).
Devata: Dundubhi (personified war-drum) / Indraic martial force by implication.
Chandas: Mixed; predominantly Triṣṭubh-like cadence in the long pāda sequence (AV battle hymns often loosen strict RV meters).
Mantra 1
शत्रुसेनात्रासनम्। उ॒च्चैर्घो॑षो दुन्दु॒भिः स॑त्वना॒यन् वा॑नस्प॒त्यः संभृ॑त उ॒स्रिया॑भिः । वाचं॑ क्षुणुवा॒नो द॒मय॑न्त्स॒पत्ना॑न्त्सिं॒ह इ॑व जे॒ष्यन्न॒भि तंस्तनीहि
दुश्मन की सेना डर जाए। दुंदुभी बजाओ और आवाज़ ऊँची करो। यह लकड़ी से बना है और चम्मे से बँधा है। अपनी आवाज़ से दुश्मन को हराओ, जैसे शेर जीतना चाहता है। उनपर ज़ोर से बजाओ।
Mantra 2
सिं॒ह इ॑वास्तानीद् द्रु॒वयो॒ विब॑द्धोऽभि॒क्रन्द॑न्नृष॒भो वा॑सि॒तामि॑व । वृषा॒ त्वं वध्र॑यस्ते स॒पत्ना॑ ऐ॒न्द्रस्ते॒ शुष्मो॑ अभिमातिषा॒हः
यह शब्द एक शेर की तरह गूँजता है, पक्का बंधा हुआ, ज़ोर से चिल्लाता है दुश्मनों पे। बैल की तरह गाता है, दुम बाजे जैसे। तू एक बैल है, अपने दुश्मनों को गिरा देता है। तेरा बल इंद्र का है, जो हर अटैक पे जीतता है।
Mantra 3
वृषे॑व यू॒थे सह॑सा विदा॒नो ग॒व्यन्न॒भि रु॑व संधनाजित्। शु॒चा वि॑ध्य॒ हृद॑यं॒ परे॑षां हि॒त्वा ग्रामा॒न् प्रच्यु॑ता यन्तु॒ शत्र॑वः
जैसे हर्ड में बुल अपनी ताकत से रास्ता ढूंढता है, वैसे दुश्मन पर गूँज। अपनी ताकत से उनका दिल जला दे। दुश्मन गाँव छोड़ के भाग जाएँ।
Mantra 4
सं॒जय॒न् पृत॑ना ऊ॒र्ध्वमा॑यु॒र्गृह्या॑ गृह्णा॒नो ब॑हु॒धा वि च॑क्ष्व । दैवीं॒ वाचं॑ दुन्दुभ॒ आ गु॑रस्व वे॒धाः शत्रू॑णा॒मुप॑ भरस्व॒ वेदः॑
लड़ाई जीत के, जीवन ऊपर उठा, जो लेने का है वो ले ले। ढोल की आवाज़ गूँजती है, भगवान की आवाज़ जैसे। अपनी समझ से दुश्मन पर अटैक कर।
Mantra 5
दु॒न्दु॒भेर्वाचं॒ प्रय॑तां॒ वद॑न्तीमाशृण्व॒ती ना॑थि॒ता घोष॑बुद्धा । नारी॑ पु॒त्रं धा॑वतु हस्त॒गह्या॑मि॒त्री भी॒ता स॑म॒रे व॒धाना॑म्
ढोल की आवाज़ सुन के दुश्मन औरत डर जाती है। वो अपने बेटे का हाथ पकड़ के भागती है। लड़ाई में मारे जाने का डर उसके दिमाग में बैठ जाता है।
Mantra 6
पूर्वो॑ दुन्दुभे॒ प्र व॑दासि॒ वाचं॒ भूम्याः॑ पृ॒ष्ठे व॑द॒ रोच॑मानः । अ॒मि॒त्र॒से॒नाम॑भि॒जञ्ज॑भानो द्यु॒मद् व॑द दुन्दुभे सू॒नृता॑वत्
ढोल, तुम सबसे पहले आवाज़ करो। धरती पर तुम्हारी आवाज़ चमके। दुश्मन की सेना को तोड़ दो। सच और अच्छी बात बोलो, ढोल तुम्हारी आवाज़ में ताकत है।
Mantra 7
अ॒न्त॒रेमे नभ॑सी॒ घोषो॑ अस्तु॒ पृथ॑क् ते ध्व॒नयो॑ यन्तु॒ शीभ॑म्। अ॒भि क्र॑न्द स्त॒नयो॒त्पिपा॑नः श्लोक॒कृन्मि॑त्र॒तूर्या॑य स्व॒र्धी
आसमान में दो हिस्सों के बीच आवाज़ गूँजती रहे। तेरी आवाज़ अलग-अलग तरफ़ फैलती रहे, जल्दी से। जैसे बादल गरजता है, वैसे ज़ोर से चिल्लाना, अपनी शक्ति दिखाना। यह आवाज़ मित्र के लिए जंग का सिग्नल है, जीत की रोशनी लाने के लिए।
Mantra 8
धी॒भिः कृ॒तः प्र व॑दाति॒ वाच॒मुद्ध॑र्षय॒ सत्व॑ना॒मायु॑धानि । इन्द्र॑मेदी॒ सत्व॑नो॒ नि ह्व॑यस्व मि॒त्रैर॒मित्राँ॒ अव॑ जङ्घनीहि
अच्छे ख्यालों से बना हुआ यह शक्तिशाली शब्द बोलता है। लड़ा के हथियारों को उठा। इंद्र को बुलाने वाले, इंद्र को पुकार। अपने दोस्तों के साथ दुश्मन को मार डाल।
Mantra 9
सं॒क्रन्दनः॑ प्रव॒दो धृ॒ष्णुषे॑णः प्रवेद॒कृद् ब॑हु॒धा ग्रा॑मघो॒षी। श्रेयो॑ वन्वा॒नो व॒युना॑नि वि॒द्वान् की॒र्तिं ब॒हुभ्यो॒ वि ह॑र द्विरा॒जे
यह लड़ा का नारा उठाने वाला है। बहुत हिम्मत वाला सेनापति है। पहले से जान लेता है क्या होगा। गाँव-गाँव में उसकी आवाज़ गूँजती है। भलाई चाहता है, चालाकी से जानता है। इतने लोगों में से नाम और कीर्ति ले कर आ।
Mantra 10
श्रेयः॑केतो वसु॒जित् सहीयान्त्संग्राम॒जित् संशि॑तो॒ ब्रह्म॑णासि । अं॒शूनि॑व॒ ग्रावा॑धि॒षव॑णे॒ अद्रि॑र्ग॒व्य॑न् दु॑न्दु॒भेऽधि॑ नृत्य॒ वेदः॑
इसपर भलाई का निशान है। धन जीतने वाला, और बड़ा बलवान। लड़ाई में जीतने वाला, तेज़ करके रखा है। मंत्र से बना है यह। जैसे धूप की किरण, जैसे पत्थर पे दबा के रस निकलता है, जैसे पत्थर गाये ढूँढ़ता है। ढोलक पर नाच, हे ज्ञान वाले।
Mantra 11
श॒त्रू॒षाण् नी॒षाड॑भिमातिषा॒हो ग॒वेष॑णः॒ सह॑मान उ॒द्भित्। वा॒ग्वीव॒ मन्त्रं॒ प्र भ॑रस्व॒ वाचं॒ सांग्रा॑मजित्या॒येष॒मुद् व॑दे॒ह
हे सेनापति, दुश्मन के हमले को तोड़। गाये ढूँढ़, जीत कर, आगे बढ़। जैसे कोई बोलने का मास्टर हो, वैसे मंत्र निकाल, शब्द निकाल। लड़ाई जीतने के लिए, यह ज़ोर से बोल।
Mantra 12
अ॒च्यु॒त॒च्युत् स॒मदो॒ गमि॑ष्ठो॒ मृधो॒ जेता॑ पुरए॒तायो॒ध्यः । इन्द्रे॑ण गु॒प्तो वि॒दथा॑ नि॒चिक्य॑द्धृ॒द्द्योत॑नो द्विष॒तां या॑हि॒ शीभ॑म्
यह मंत्र एक ऐसा शक्तिशाली देवता को बुलाता है जो सबसे तेज़ है। जो हिलता नहीं वो उसे हिला सकता है। जंग में वो सबसे आगे बढ़ता है, दुश्मन को हराता है। इंद्र उसकी रक्षा करता है। वो सब बात समझता है, दिल को रोशन करता है। दुश्मनों के पास जल्दी जाओ।
Primarily the dundubhi (war-drum) as a personified power whose sound is treated like thunder; Indra is invoked by implication and explicitly near the end as the guardian of victory.
It is a battle-oriented (abhicārika/saṅgrāmika) charm: its goal is to intimidate and scatter an enemy force, strengthen one’s own side, and drive a swift, protected advance.
By reciting while striking and tuning the war-drum at the time of forming ranks and advancing. The ritual logic is that the mantra installs coercive power into the drum’s roar, making it a weapon of morale and coordination.
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