Opening the text

Rishi: Atharvanic tradition (exact r̥ṣi attribution varies by anukramaṇī for this hymn)
Devata: Oṣadhi (personified Herb), with Ṛta as legitimating principle
Chandas: Anuṣṭubh-like cadence (refrain-driven Atharvanic style)
Mantra 1
रोगोपशमनम्। एका॑ च मे॒ दश॑ च मे ऽपव॒क्तार॑ ओषधे । ऋत॑जात॒ ऋता॑वरि॒ मधु॑ मे मधु॒ला क॑रः
यह मंत्र बीमारी को ठीक करने के लिए है। एक से लेकर दस तक, सारी जड़ी-बूटियाँ मेरे लिए काम करें। यह सब सीधी जगह से आई हैं, सीधे काम के लिए हैं। मेरे लिए मीठा फल लाएँ, अच्छा करें।
Mantra 2
द्वे च॑ मे विंश॒तिश्च॑ मे ऽपव॒क्तार॑ ओषधे । ऋत॑जात॒ ऋता॑वरि॒ मधु॑ मे मधु॒ला क॑रः
हे जड़ी बूटी, मैं तुमसे दुआ कर रहा हूँ। बीस और दो, मान लो यह सब मेरे लिए हैं। तुम बुरी चीज़ों को भगाने वाली हो। तुम सच से पैदा हुई हो और सच को बचाती हो। मेरे लिए मीठा बनाओ, मेरे लिए अच्छा बनाओ।
Mantra 3
ति॒स्रश्च॑ मे त्रिं॒शच्च॑ मे ऽपव॒क्तार॑ ओषधे । ऋत॑जात॒ ऋता॑वरि॒ मधु॑ मे मधु॒ला क॑रः
हे जड़ी-बूटी, तीन और तीस बीमारियाँ मेरे से दूर कर। तू सच से पैदा हुई है, सच की रक्षा करती है। मेरी लाइफ को मीठी बना, जैसे शहद हो।
Mantra 4
चत॑स्रश्च मे चत्वारिं॒शच्च॑ मे ऽपव॒क्तार॑ ओषधे । ऋत॑जात॒ ऋता॑वरि॒ मधु॑ मे मधु॒ला क॑रः
हे जड़ी-बूटी, चार और चालीस बीमारियाँ मेरे से दूर कर। तू सच से पैदा हुई है, सच की रक्षा करती है। मेरी लाइफ को मीठी बना, जैसे शहद हो।
Mantra 5
प॒ञ्च च॑ मे पञ्चा॒शच्च॑ मे ऽपव॒क्तार॑ ओषधे । ऋत॑जात॒ ऋता॑वरि॒ मधु॑ मे मधु॒ला क॑रः
हे जड़ी-बूटी, पाँच और पचास बीमारियाँ मेरे से दूर कर। तू सच से पैदा हुई है, सच की रक्षा करती है। मेरी लाइफ को मीठी बना, जैसे शहद हो।
Mantra 6
षट् च॑ मे ष॒ष्टिश्च॑ मे ऽपव॒क्तार॑ ओषधे । ऋत॑जात॒ ऋता॑वरि॒ मधु॑ मे मधु॒ला क॑रः
हे जड़ी-बूटी, छह और साठ बीमारियाँ मेरे से दूर कर। तू सच से पैदा हुई है, सच की रक्षा करती है। मेरी लाइफ को मीठी बना, जैसे शहद हो।
Mantra 7
स॒प्त च॑ मे सप्त॒तिश्च॑ मे ऽपव॒क्तार॑ ओषधे । ऋत॑जात॒ ऋता॑वरि॒ मधु॑ मे मधु॒ला क॑रः
यह जड़ी-बूटी कहता है, मैं तुम्हारे लिए सात और सत्तर रक्षक भेजता हूँ। यह सब सत्य से पैदा हुए हैं और सत्य की रक्षा करते हैं। इनसे तुम्हारा काम मीठा हो जाए, तुम खुद मीठा बन जाओ।
Mantra 8
अ॒ष्ट च॑ मेऽशी॒तिश्च॑ मे ऽपव॒क्तार॑ ओषधे । ऋत॑जात॒ ऋता॑वरि॒ मधु॑ मे मधु॒ला क॑रः
आठ मेरे लिए और अस्सी मेरे लिए। आयुर्वेद की यह पोड़ी बुराई को भगाए। यह सच से पैदा हुई है और सच को ढालती है। मेरे लिए मीठापन ला, सब कुछ मधु जैसा कर दे।
Mantra 9
नव॑ च मे नव॒तिश्च॑ मे ऽपव॒क्तार॑ ओषधे । ऋत॑जात॒ ऋता॑वरि॒ मधु॑ मे मधु॒ला क॑रः
नौ मेरे लिए और नब्बे मेरे लिए। आयुर्वेद की यह पोड़ी बुराई को भगाए। यह सच से पैदा हुई है और सच को ढालती है। मेरे लिए मीठापन ला, सब कुछ मधु जैसा कर दे।
Mantra 10
दश॑ च मे श॒तं च मे॑ ऽपव॒क्तार॑ ओषधे । ऋत॑जात॒ ऋता॑वरि॒ मधु॑ मे मधु॒ला क॑रः
दस मेरे लिए और सौ मेरे लिए। आयुर्वेद की यह पोड़ी बुराई को भगाए। यह सच से पैदा हुई है और सच को ढालती है। मेरे लिए मीठापन ला, सब कुछ मधु जैसा कर दे।
Mantra 11
श॒तं च॑ मे स॒हस्रं॑ चापव॒क्तार॑ ओषधे । ऋत॑जात॒ ऋता॑वरि॒ मधु॑ मे मधु॒ला क॑रः
सौ मेरे लिए और हज़ार मेरे लिए। आयुर्वेद की यह पोड़ी बुराई को भगाए। यह सच से पैदा हुई है और सच को ढालती है। मेरे लिए मीठापन ला, सब कुछ मधु जैसा कर दे।
The hymn addresses Oṣadhi, the medicinal herb, as a personified power. Its authority is grounded in Ṛta, meaning the cure is framed as truth-aligned and therefore dependable.
The numbers function as ritual intensifiers: they multiply the herb’s ‘repelling’ capacities (apavaktāraḥ). The repeated pattern builds a sense of layered, overwhelming protection against illness and harm.
Both. Madhu can be literal honey used as an auspicious carrier, and it also signifies the desired result: a ‘sweetened’ condition—pleasantness, nourishment, and restored vitality replacing the bitterness of disease.
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