Opening the text

Rishi: Rgvedic attribution (likely Vasiṣṭha-family Indra hymn material); AV 20 preserves Rgveda-derived suktas—exact r̥ṣi to be confirmed against AV 20 anukramaṇī.
Devata: Indra
Chandas: Mixed; refrain suggests a repeated pāda-structure typical of Rgvedic strophic composition (to be verified per anukramaṇī).
Mantra 1
यच्चि॒द्धि स॑त्य सोमपा अनाश॒स्ता इ॑व॒ स्मसि॑ । आ तू न॑ इन्द्र शंसय॒ गोष्वश्वे॑षु शु॒भ्रिषु॑ स॒हस्रे॑षु तुवीमघ
इंद्र, तुम सोम रस पीते हो और सच्चे हो। अगर लोग हमारी तारीफ नहीं करते, तो कोई बात नहीं। तुम हमारी बड़ाई करो। हमारे पास गाये, घोड़े, अच्छी चीज़ें हों। हज़ारों चीज़ें हमारे पास आएँ। तुम जो देते हो वो बाँटने वाला हो।
Mantra 2
शिप्रि॑न् वाजानां पते॒ शची॑व॒स्तव॑ दं॒सना॑ । आ तू न॑ इन्द्र शंसय॒ गोष्वश्वे॑षु शु॒भ्रिषु॑ स॒हस्रे॑षु तुवीमघ
इंद्र, तुम बहुत ताकत वाले हो और इनामों के मालिक हो। तुम्हारी करते कमाल की बातें हैं। हमें भी लोग अच्छे से जानें। हमारे पास गाये, घोड़े, अच्छी चीज़ें हों। हज़ारों चीज़ें हमारे पास आएँ। तुम बड़े देने वाले हो।
Mantra 3
नि ष्वा॑पया मिथू॒दृशा॑ स॒स्तामबु॑ध्यमाने । आ तू न॑ इन्द्र शंसय॒ गोष्वश्वे॑षु शु॒भ्रिषु॑ स॒हस्रे॑षु तुवीमघ
इंद्र, उन लोगों को सुला दे जो हमारे पे बुरी नज़र रखते हैं। वो ऐसे सो जाएँ जैसे जाग ही न पाएँ। हमें लोग अच्छे से जानें। हमारे पास गाये, घोड़े, अच्छी चीज़ें हों। हज़ारों चीज़ें हमारे पास आएँ। तुम बड़े देने वाले हो।
Mantra 4
स॒सन्तु॒ त्या अरा॑तयो॒ बोध॑न्तु शूर रा॒तयः॑ । आ तू न॑ इन्द्र शंसय॒ गोष्वश्वे॑षु शु॒भ्रिषु॑ स॒हस्रे॑षु तुवीमघ
जो लोग अच्छे नहीं हैं, उनका काम बिगड़ जाए। और जो देना है वो जाग जाए, हे बहादुर। हमें लोग अच्छे से जानें। हमारे पास गाये, घोड़े, अच्छी चीज़ें हों। हज़ारों चीज़ें हमारे पास आएँ। तुम बड़े देने वाले हो।
Mantra 5
समि॑न्द्र गर्द॒भं मृ॑ण नु॒वन्तं॑ पा॒पया॑मु॒या। आ तू न॑ इन्द्र शंसय॒ गोष्वश्वे॑षु शु॒भ्रिषु॑ स॒हस्रे॑षु तुवीमघ
हे इंद्र, उस गधे को मार डाल जो चिल्लाता है। उसकी बुरी हरकत को खत्म कर दे। इंद्र, हमारा नाम अच्छा कर दे। गाय और घोड़े के बीच, माल के बीच, हज़ारों चीज़ों के बीच हमारा काम कर। तू ही बड़ा दाता है।
Mantra 6
पता॑ति कुण्डृ॒णाच्या॑ दू॒रं वातो॒ वना॒दधि॑ । आ तू न॑ इन्द्र शंसय॒ गोष्वश्वे॑षु शु॒भ्रिषु॑ स॒हस्रे॑षु तुवीमघ
वो बुरी चीज़ कुंड्र्नाची से दूर उड़ गई। हवा ने उसे जंगल से भगा दिया। हे इंद्र, हमें ऐसा कर दे कि लोग हमारे बारे में कहें। हमारे पास गायें हों, घोड़े हों, और बहुत दौलत हों। तू ही दे सकता है यह सब।
Mantra 7
सर्वं॑ परिक्रो॒शं ज॑हि ज॒म्भया॑ कृकदा॒श्वऽम्। आ तू न॑ इन्द्र शंसय॒ गोष्वश्वे॑षु शु॒भ्रिषु॑ स॒हस्रे॑षु तुवीमघ
सारी बुरी आवाज़ें और दुश्मनों की चीख को खत्म कर दे। क्रिकदाश्व नाम के दुश्मन को कुचल दे। हे इंद्र, हमें ऐसा कर दे कि लोग हमारे बारे में कहें। हमारे पास गायें हों, घोड़े हों, और बहुत दौलत हों। तू ही दे सकता है यह सब।
It asks Indra to make the patron “well-spoken-of” (social repute) and prosperous—especially in cows, horses, and abundant possessions—repeatedly sealed by the refrain.
Because prosperity in Vedic society is tied to rivalry and public speech: the hymn seeks to neutralize hostile ungenerosity/foes (arāti) and to silence intimidating or damaging clamor (parikrośa) so wealth and gifts can flow.
Not explicitly. It functions primarily through recitation and intention; optional supportive items (water, lamp, symbolic cattle/horse tokens) may be used, but they are not mandated by the text.
Answers come straight from the texts, with the shlokas they draw on. Ask in your own words.
A free sign-in with Google or Apple keeps your chat saved across web and the app.
Read Atharva Veda in the Vedapath app
Scan the QR code to open this directly in the app, with word-by-word meanings, Sanskrit recitation where available, and more.