Opening the text

Rishi: Atharvanic tradition (late AV book; specific ṛṣi attribution varies in ancillary lists)
Devata: Āñjana/Protective charm; Savitar as paradigmatic stabilizer; implicitly the quarters (diś) as pacified powers
Chandas: Mixed/late style; predominantly Anuṣṭubh-like cadence (edition-dependent metrical analysis needed)
Mantra 1
आञ्जनम्। ऋ॒णादृ॒णमि॑व सं॒नय॑न् कृ॒त्यां कृ॑त्या॒कृतो॑ गृ॒हम्। चक्षु॑र्मन्त्रस्य दु॒र्हार्दः॑ पृ॒ष्टीरपि॑ शृणाञ्जन
हे अंजन, जैसे कोई कर्ज़ उतरता है, वैसे तू बुराई का हिसाब ले। उस आदमी का काम खत्म कर जिसने यह बुराई की। तू मंत्र का नज़र है, तू बहुत ताकतवर है। उनकी पीठ तोड़ दे, हे अंजन।
Mantra 2
यद॒स्मासु॑ दु॒ष्वप्न्यं॒ यद् गोषु॒ यच्च॑ नो गृ॒हे। अना॑मग॒स्तं च॑ दु॒र्हार्दः॑ प्रि॒यः प्रति॑ मुञ्चताम्
हमारे बीच जो बुरा सपने आए, हमारे गाय-भैंस में जो बीमारी हो, हमारे घर में जो परेशानी हो, वो सब अंजन दूर करे। वो बीमारी से आज़ाद है, वो अच्छा है। वो सब बुराई वापस भेज दे।
Mantra 3
अ॒पामू॒र्ज ओज॑सो वावृधा॒नम॒ग्नेर्जा॒तमधि॑ जा॒तवे॑दसः । चतु॑र्वीरं पर्व॒तीयं॒ यदाञ्ज॑नं॒ दिशः॑ प्र॒दिशः॑ कर॒दिच्छि॒वास्ते॑
यह अंजन पानी की ताकत से बड़ा हो रहा है। यह अग्नि से पैदा हुआ है, जो सब कुछ जाननेवाला है। इसमें चार तरफ से ताकत है, यह परवत से आया है। भगवान करे कि यह अंजन तुम्हारे लिए हर दिशा को अच्छी बना दे।
Mantra 4
चतु॑र्वीरं बध्यत॒ आञ्ज॑नं ते॒ सर्वा॒ दिशो॒ अभ॑यास्ते भवन्तु । ध्रु॒वस्ति॑ष्ठासि सवि॒तेव॒ चार्य॑ इ॒मा विशो॑ अ॒भि ह॑रन्तु ते ब॒लिम्
अंजना नाम की चीज़ चार तरफ से रक्षा करती है। इस्से बाँध ले, किसी तरफ से डर नहीं लगेगा। तू सविता सूरज की तरह चल, स्थिर रहा करो। लोग तेरे पास आके तोहफे लाएंगे।
Mantra 5
आक्ष्वैकं॑ म॒णिमेकं॑ कृष्णुष्व स्ना॒ह्येके॒ना पि॒बैक॑मेषाम्। चतु॑र्वीरं नैरृ॒तेभ्य॑श्च॒तुर्भ्यो॒ ग्राह्या॑ ब॒न्धेभ्यः॒ परि॑ पात्व॒स्मान्
एक को मल ले, एक को काला कर, एक से नहा ले, और एक को पी ले। चार तरफ से रक्षा वाली यह चीज़ हमें बुरी ताकतों से बचा ले। जो बाँध के रखे वो हमें चैन नहीं पा।
Mantra 6
अ॒ग्निर्मा॒ग्निना॑वतु प्रा॒णाया॑पा॒नायायु॑षे॒ वर्च॑स॒ ओज॑से॒ तेज॑से स्व॒स्तये॑ सुभू॒तये॒ स्वाहा॑
अग्नि अपनी ताकत से मुझे रक्षा करे। मेरा साँस चले, उम्र लंबी हो, चमक हो, ताकत हो, तेज़ हो। सब ठीक रहे, खुशाली हो। स्वाहा।
Mantra 7
इन्द्रो॑ मेन्द्रि॒येणा॑वतु प्रा॒णाया॑पा॒नायायु॑षे॒ वर्च॑स॒ ओज॑से॒ तेज॑से स्व॒स्तये॑ सुभू॒तये॒ स्वाहा॑
इंद्र अपनी ताकत से मुझे रक्षा करे। मेरा साँस चले, उम्र लंबी हो, चमक हो, ताकत हो, तेज़ हो। सब ठीक रहे, खुशाली हो। स्वाहा।
Mantra 8
सोमो॑ मा॒ सौम्ये॑नावतु प्रा॒णाया॑पा॒नायायु॑षे॒ वर्च॑स॒ ओज॑से॒ तेज॑से स्व॒स्तये॑ सुभू॒तये॒ स्वाहा॑
सोम मुझे बचाए। वो अपनी हीलिंग क्वालिटी से मुझे प्रोटेक्ट करे। मेरा साँस चलता रहे, ज़िन्दगी लम्बी हो। चमक आए, ताकत मिले, एनर्जी रहे। सब ठीक रहे, खुशाली हो। स्वाहा।
Mantra 9
भगो॑ मा॒ भगे॑नावतु प्रा॒णाया॑पा॒नायायु॑षे॒ वर्च॑स॒ ओज॑से॒ तेज॑से स्व॒स्तये॑ सुभू॒तये॒ स्वाहा॑
भगवान भग मुझे अपनी शक्ति से बचाए। साँस लेने के लिए, जीने के लिए, चमकने के लिए, ताकत के लिए, तेज़ के लिए, भलाई के लिए। सब ठीक रहे, यही दुआ है।
Mantra 10
म॒रुतो॑ मा ग॒णैर॑वन्तु प्रा॒णाया॑पा॒नायु॑षे॒ वर्च॑स॒ ओज॑से॒ तेज॑से स्व॒स्तये॑ सुभू॒तये॒ स्वाहा॑
मरुत देवता अपनी टोली के साथ मुझे बचाए। साँस लेने के लिए, जीने के लिए, चमकने के लिए, ताकत के लिए, तेज़ के लिए, भलाई के लिए। सब ठीक रहे, यही दुआ है।
Here āñjana is treated as a ritually empowered black unguent/collyrium that functions as a protective charm. It can be applied or worn, and it is praised as ‘mountain-born’ and strengthened by Waters and Agni.
Many Atharvanic dangers are imagined as approaching from any side. The hymn’s goal is to pacify all directions and sub-directions so the client is ‘fearless’ everywhere, not only in one place.
It indicates social acknowledgment and support—people drawing near with offerings, respect, or due shares. In paustika usage, it signals the client’s stabilized standing and increased prosperity rather than coercion.
Answers come straight from the texts, with the shlokas they draw on. Ask in your own words.
A free sign-in with Google or Apple keeps your chat saved across web and the app.
Read Atharva Veda in the Vedapath app
Scan the QR code to open this directly in the app, with word-by-word meanings, Sanskrit recitation where available, and more.