
Rishi: Anukramaṇī attribution uncertain for this enumerative segment (often treated as liturgical formulae rather than seer-specific); consult Śaunaka Anukramaṇī for 19.23.
Devata: Ṛc (the verse) as a personified liturgical power; indirectly Agni as carrier via svāhā.
Chandas: Not a metrical verse; a yajus-like formula (prose/short liturgical utterance).
Mantra 1
आ॒थ॒र्व॒णानां चतुरृ॒चेभ्यः॒ स्वाहा॑
अथर्व वेद की चार लाइन वाले मंत्र के लिए स्वाहा। यह पूजा में बोलते हैं जब चार लाइन का मंत्र पढ़ते हैं।
Mantra 2
प॒ञ्च॒र्चेभ्यः॒ स्वाहा॑
पाँच लाइन वाले मंत्र के लिए स्वाहा। पूजा में जब पाँच लाइन का मंत्र आता है तब यह बोलते हैं।
Mantra 3
ष॒ळृ॒चेभ्यः॒ स्वाहा॑
छह लाइन वाले मंत्र के लिए स्वाहा। जब छह लाइन का मंत्र पढ़ते हैं ना, तब यह कहते हैं।
Mantra 4
स॒प्त॒र्चेभ्यः॒ स्वाहा॑
यह मंत्र सात वर्सेज वाले मंत्र के लिए है। इसमें स्वाहा बोल के आहुति दी जाती है। सात वर्सेज का ग्रुप है, उसके लिए यह ऑफरिंग है।
Mantra 5
अ॒ष्ट॒र्चेभ्यः॒ स्वाहा॑
आठ मंत्रियों के लिए आहुति देना है। जब पूजा में कुछ समर्पित करते हैं, तो स्वाहा बोलते हैं। यह आठ मंत्रियों को समर्पित किया जा रहा है।
Mantra 6
न॒व॒र्चेभ्यः॒ स्वाहा॑
अब नौ मंत्रियों के लिए आहुति देना है। पूजा में जब कुछ भगवान को ऑफर करते हैं, स्वाहा का शब्द बोलते हैं। यह नौ मंत्रियों के लिए है।
Mantra 7
द॒श॒र्चेभ्यः॒ स्वाहा॑
दस मंत्रियों के लिए भी आहुति देना है। यह भी पूजा का हिस्सा है। स्वाहा बोल के भगवान को समर्पित करते हैं। यह दस मंत्रियों के लिए है।
Mantra 8
ए॒का॒द॒श॒र्चेभ्यः॒ स्वाहा॑
ग्यारह मंत्रियों के लिए भी आहुति देनी है। पूजा में स्वाहा बोल के समर्पित करते हैं। यह ग्यारह मंत्रियों को भगवान के लिए ऑफर किया जा रहा है।
Mantra 9
द्वा॒द॒श॒र्चेभ्यः॒ स्वाहा॑
यह मंत्र बारह लाइन वाले गानों के लिए है। हवन में समग्री डालते वक़्त 'स्वाहा' बोलते हैं। यह बारह रचना वाले श्लोकों को भगवान के पास पहुँचाने की दुआ है।
Mantra 10
त्र॒यो॒द॒श॒र्चेभ्यः॒ स्वाहा॑
यह मंत्र बोला जा रहा है। तेरह ऋच मंत्रों के लिए हवन में घी डाला जा रहा है। स्वाहा, यह शब्द यूज़ होता है जब आग में कुछ डालते हैं।
Mantra 11
च॒तु॒र्द॒श॒र्चेभ्यः॒ स्वाहा॑
अब चौदह ऋच मंत्रों की बारी है। इनके लिए भी हवन में घी डाला जा रहा है। स्वाहा, आग को समर्पित किया जा रहा है।
Mantra 12
प॒ञ्च॒द॒श॒र्चेभ्यः॒ स्वाहा॑
पंद्रह ऋच मंत्रों के लिए अब आग में घी डालो। यह भी वेद के पार्ट हैं। स्वाहा, भगवान को समर्पित किया जा रहा है।
Mantra 13
षो॒ड॒श॒र्चेभ्यः॒ स्वाहा॑
सोलह ऋच मंत्रों के लिए भी यही काम हो रहा है। हवन में घी डालते हैं और स्वाहा बोलते हैं। हर मंत्र के लिए अलग से आग में समर्पित करते हैं।
Mantra 14
स॒प्त॒द॒श॒र्चेभ्यः॒ स्वाहा॑
यह मंत्र सत्तर के बीस मंत्रों के लिए है। जो भी आग में डाल रहे हो, उससे उन सत्तर के बीस मंत्रों को समर्पित करते हैं। स्वाहा बोल के यह समर्पण पूरा होता है।
Mantra 15
अ॒ष्टा॒द॒श॒र्चेभ्यः॒ स्वाहा॑
हवन में आहुति दी जाती है। यह स्वाहा कहते हैं। यह अठारह ऋच के लिए है।
Mantra 16
ए॒को॒न॒विं॒श॒तिः स्वाहा॑
हवन की आहुति है, स्वाहा। यह उन्नीस के लिए है।
Mantra 17
विं॒श॒तिः स्वाहा॑
हवन की आहुति है, स्वाहा। यह बीस के लिए है।
Mantra 18
म॒ह॒त्का॒ण्डाय॒ स्वाहा॑
हवन की आहुति है, स्वाहा। यह बड़े खंड के लिए है।
Mantra 19
तृ॒चेभ्यः॒ स्वाहा॑
यह मंत्र तीन लाइन वाले मंत्र के लिए है। जब तीन लाइन का मंत्र पढ़ के आग में सामग्री डालते हैं, तब स्वाहा बोलते हैं। यह आग को पुकारने का तरीका है।
Mantra 20
ए॒क॒र्चेभ्यः॒ स्वाहा॑
जिन मंत्रों में एक ही शब्द या लाइन है, उन सब के लिए हवन में घी डालते हैं। स्वाहा।
Mantra 21
क्षु॒द्रेभ्यः॒ स्वाहा॑
छोटे छोटे मंत्रों के लिए भी हवन में घी डालते हैं। स्वाहा।
Mantra 22
ए॒का॒नृ॒चेभ्यः॒ स्वाहा॑
जिन मंत्रों में एक ही बात न हो, अलग अलग बातें हो, उन सब के लिए भी घी डालते हैं। स्वाहा।
Mantra 23
रो॒हि॒तेभ्यः॒ स्वाहा॑
लाल रंग के देवता रोहित के लिए भी हवन में समर्पित करते हैं। स्वाहा।
Mantra 24
सू॒र्याभ्यां॒ स्वाहा॑
दो सूर्य हैं, दोनों को हवन में समर्पित करते हैं। स्वाहा बोल के यह बलि दे रहे हैं।
Mantra 25
व्रा॒त्याभ्यां॒ स्वाहा॑
दो व्रात्य के लिए स्वाहा बोल के आहुति देते हैं। व्रात्य वो लोग होते हैं जो अपना अलग धरम फॉलो करते हैं। उन दोनों के नाम यह ऑफरिंग है।
Mantra 26
प्रा॒जा॒प॒त्याभ्यां॒ स्वाहा॑
प्रजापति के दो बेटे या दो लोगों के लिए यह आहुति है। स्वाहा बोल के उन्हें भी ऑफरिंग दी जाती है। प्रजापति भगवान के दो लोगों को यह मंत्र समर्पित करता है।
Mantra 27
वि॒षा॒स॒ह्यै स्वाहा॑
ज़हर को हराने वाली शक्ति के लिए स्वाहा बोलते हैं। यह आहुति उस ताकत को दी जाती है जो ज़हर को खत्म कर सकती है। बीमारी और बुराई को दूर करने के लिए यह मंत्र है।
Mantra 28
म॒ङ्ग॒लि॒केभ्यः॒ स्वाहा॑
मंगल करने वाले लोगों के लिए स्वाहा बोल के आहुति देते हैं। जो लोग शुभ काम करते हैं, उनके लिए यह ऑफरिंग है। अच्छी चीज़ें लाने वाले के नाम यह मंत्र है।
Mantra 29
ब्र॒ह्मणे॒ स्वाहा॑
यह मंत्र ब्रह्मन के लिए है। ब्रह्मन वो सबसे बड़ी शक्ति है। इसमें स्वाहा का शब्द है जो हवन में उसे होता है। जब यह बोलते हैं तो ब्रह्मन को बलि चढ़ाते हैं।
Mantra 30
ब्रह्म॑ज्येष्ठा॒ संभृ॑ता वी॒र्याऽणि॒ ब्रह्माग्रे॒ ज्येष्ठं॒ दिव॒मा त॑तान । भू॒तानां॑ ब्र॒ह्मा प्र॑थ॒मोत जज्ञे॒ तेना॑र्हति॒ ब्रह्म॑णा॒ स्पर्धि॑तुं॒ कः
ब्रह्मन सबसे बड़ा है, सबसे पहले है। उसमें पूरी ताकत भर दी गई है। ब्रह्मन ने शुरू में ही आसमान को फैला दिया। ब्रह्मा सब प्राणियों में पहले पैदा हुए। अब बताओ, ब्रह्मन की ताकत से कौन टक्कर ले सकता है? कोई नहीं।
It functions as ritual indexing: each named verse-set is treated as a specific recipient, so the offering is correctly allocated and no portion is lost through miscount or omission.
The immediate recipient is the Ṛc/verse-set as a personified liturgical power; svāhā implies Agni as the carrier who conveys the oblation to that designated recipient.
The closing mantra acts as a seal: it grounds the rite in the unsurpassable primacy of Brahman/Brahmā, protecting the ritual’s authority and efficacy against rival claims or instability.
Answers come straight from the texts, with the shlokas they draw on. Ask in your own words.
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