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इन्द्र-आह्वान से अभ्युदय: विजय-श्रृंखला वाले उपाधि-नामों द्वारा जीत, रक्षा और समृद्धि की सिद्धि। उपविषय: विष तथा शत्रुबल का दमन; स्वर्ग, गौ, धन, ख्याति की प्राप्ति; राजकीय/वीर-यश और जन-समृद्धि; गृह-धन की अपमार्जक (अपशकुन-निवारक) रक्षा। व्यावहारिक प्रयोग: कार्य-सिद्धि, विष व शत्रुओं सहित संकटों से संरक्षण, तथा धन-गौ और सामाजिक प्रतिष्ठा की वृद्धि हेतु।
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