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Sukta 5.57
Atri (Ātreya tradition) (traditional attribution for RV 5.57)
Maruts (as Rudrāsaḥ), with Indra-association
Triṣṭubh (probable; requires hymn verification)
This hymn of Atri calls the Maruts—Rudra’s sons, “Indra-endowed”—to arrive in unified splendor on golden chariots and grant well-being. It praises their radiant, storm-like power and their generous, unclouded gifts, presenting them as guardians of ṛta (cosmic order) who hear truth and uplift the singer’s prayer.
Mantra 1
आ रुद्रास इन्द्रवन्तः सजोषसो हिरण्यरथाः सुविताय गन्तन । इयं वो अस्मत्प्रति हर्यते मतिस्तृष्णजे न दिव उत्सा उदन्यवे ॥
रुद्र के बेटे आओ, इंद्र की ताकत लेकर। सब मिलकर आओ सोने के रथ में। हमारी भलाई के लिए आओ। हमारा मन तुम्हारी तरफ दौड़ रहा है। जैसे प्यासा पानी माँगता है, वैसे ही हम तुम्हे बुला रहे हैं।
Mantra 2
वाशीमन्त ऋष्टिमन्तो मनीषिणः सुधन्वान इषुमन्तो निषङ्गिणः । स्वश्वाः स्थ सुरथाः पृश्निमातरः स्वायुधा मरुतो याथना शुभम् ॥
मरुत्स के पास कुल्हाड़ी है, भाले हैं। वो समझदार हैं। उनके पास अच्छी धनुष है, तीर हैं, तीर रखने वाला पोटा है। उनके घोड़े अच्छे हैं, रथ अच्छा है। पृश्नि माँ के बेटे हैं यह। अपने हथियारों के साथ अच्छे काम की तरफ बढ़ते हैं।
Mantra 3
धूनुथ द्यां पर्वतान्दाशुषे वसु नि वो वना जिहते यामनो भिया । कोपयथ पृथिवीं पृश्निमातरः शुभे यदुग्राः पृषतीरयुग्ध्वम् ॥
मरुत्स आसमान और पहाड़ हिला देते हैं। जो कुछ देता है उसके लिए वो अच्छी चीज़ें लाते हैं। जंगल डर के मारे झुक जाते हैं जब यह आते हैं। पृश्नि माँ के बेटे धरती को हिला देते हैं। जब यह अपने घोड़ों को जोड़ते हैं और चमक के साथ निकलते हैं।
Mantra 4
वातत्विषो मरुतो वर्षनिर्णिजो यमा इव सुसदृशः सुपेशसः । पिशङ्गाश्वा अरुणाश्वा अरेपसः प्रत्वक्षसो महिना द्यौरिवोरवः ॥
मरुत देवता हवा की ताकत से चमक रहे हैं। बारिश का बादल उनपे ढका है। वो दो भाइयों की तरह मिलके रहते हैं और बहुत अच्छे दिखते हैं। उनके घोड़े पीले और लाल रंग के हैं, कोई दोष नहीं। उनके शरीर मज़बूत है। वो इतने बड़े हैं कि आसमान की तरह उनकी आवाज़ है।
Mantra 5
पुरुद्रप्सा अञ्जिमन्तः सुदानवस्त्वेषसंदृशो अनवभ्रराधसः । सुजातासो जनुषा रुक्मवक्षसो दिवो अर्का अमृतं नाम भेजिरे ॥
मरुत बहुत चमकदार हैं, पानी की बूंदें उनपे चमक रही हैं। वो अच्छे कपड़े पहने हैं और खुले दिल वाले हैं। उनका रूप देख के डर लगता है। उनकी जनम से ही अच्छी किस्मत है। उनकी छाती सुनहरी है। वो आसमान के गीत हैं और उनका नाम अमर हो गया है।
Mantra 6
ऋष्टयो वो मरुतो अंसयोरधि सह ओजो बाह्वोर्वो बलं हितम् । नृम्णा शीर्षस्वायुधा रथेषु वो विश्वा वः श्रीरधि तनूषु पिपिशे ॥
मरुत के बाज़ू पे बर्छी है। उनके हाथ में ताकत है, उनकी बाहें मज़बूत है। उनके सिर पे हथियार है, उनके रथ पे भी हथियार है। उनके शरीर में चमक है, वो बहुत तेज़ दिखते हैं।
Mantra 7
गोमदश्वावद्रथवत्सुवीरं चन्द्रवद्राधो मरुतो ददा नः । प्रशस्तिं नः कृणुत रुद्रियासो भक्षीय वोऽवसो दैव्यस्य ॥
मरुत हमें दो, गाय, घोड़ा, रथ और बहादुर बेटा। वो चाँद की तरह चमके। हमें अच्छा रास्ता दिखाओ। हम आपकी शरण में आए हैं, आपकी मदद लेंगे।
Mantra 8
हये नरो मरुतो मृळता नस्तुवीमघासो अमृता ऋतज्ञाः । सत्यश्रुतः कवयो युवानो बृहद्गिरयो बृहदुक्षमाणाः ॥
मरुत, आओ और हमपे मेहरबानी करो। आप बहुत देते हो, आप अमर हो, आप सच जानते हो। आप सच सुनते हो, आप रिशि हो, आप हमेशा जवान रहते हो। आप बड़े गीत गाते हो और अपनी ताकत बढ़ाते हो।
They are a band of youthful storm-deities, called Rudra’s sons, who ride together in brilliance and bring wind, thunder, and rain. In this hymn they are also described as sharing Indra’s strength.
It asks them to come in harmony for the worshipper’s well-being, to be gracious and protective, and to grant life-giving abundance—often understood as rain, strength, and successful passage through difficulties.
It means the Maruts are aligned with cosmic order (ṛta) and respond to truthful, well-formed prayer. Spiritually, it suggests that right speech and sincerity draw their energizing and cleansing power.
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