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Sukta 3.26
Viśvāmitra Gāthina / Kuśika lineage (self-referential: kuśikāsaḥ)
Agni Vaiśvānara
Jagatī (likely; long pādas; requires metrical verification)
This hymn of Viśvāmitra’s Kuśika line invokes Agni Vaiśvānara as the universal Fire who discovers the “luminous world” (svar) and faithfully carries the offering along the true course of ṛta. As the praise unfolds, Agni’s power is amplified through the Maruts—fierce, rain-bright allies—until Agni is revealed as an inexhaustible, many-streaming fountain: the wise “father of utterances” (vāc) whom Heaven and Earth themselves sustain.
Mantra 1
वैश्वानरं मनसाग्निं निचाय्या हविष्मन्तो अनुषत्यं स्वर्विदम् । सुदानुं देवं रथिरं वसूयवो गीर्भी रण्वं कुशिकासो हवामहे ॥
हम सब मिल के अग्नि को पुकारते हैं जो पूरी दुनिया में है। यह अग्नि सच का काम करता है और रोशनी देता है। हम अपने मन्न में उसका ध्यान रखते हैं और हवन सामग्री ले के आते हैं। हम उसे बड़े-दिल वाला देवता बोलते हैं जो जल्दी चलता है। कुशिक रिशि उसके लिए अचे शब्द बोलते हैं।
Mantra 2
तं शुभ्रमग्निमवसे हवामहे वैश्वानरं मातरिश्वानमुक्थ्यम् । बृहस्पतिं मनुषो देवतातये विप्रं श्रोतारमतिथिं रघुष्यदम् ॥
हम उस चमकते हुए अग्नि को मदद के लिए बुलाते हैं। यह अग्नि पूरी दुनिया का है और हवा के साथ आता है। यह हमारे लिए गुरु जैसा है जो हमारे अंदर अच्ची चीज़ पैदा करता है। यह हमारी बात सुनता है और हमारे पास मेहमान की तरह रहता है। यह जल्दी से हमारे काम आता है।
Mantra 3
अश्वो न क्रन्दञ्जनिभिः समिध्यते वैश्वानरः कुशिकेभिर्युगेयुगे । स नो अग्निः सुवीर्यं स्वश्व्यं दधातु रत्नममृतेषु जागृविः ॥
जैसे घोड़ा आवाज़ करता है, वैसे ही यह अग्नि जलता है। हर वक्त नए लोग इस्को जगाते रहते हैं। कुशिक रिशि हर जुग में इसका काम करते हैं। यह अग्नि देवियों के बीच जगता रहता है। वो हमारे अंदर ताकत डाले और हमारे काम आने वाली चीज़ें दे। हमारी ज़िन्दगी आगे बढ़े।
Mantra 4
प्र यन्तु वाजास्तविषीभिरग्नयः शुभे सम्मिश्लाः पृषतीरयुक्षत । बृहदुक्षो मरुतो विश्ववेदसः प्र वेपयन्ति पर्वताँ अदाभ्याः ॥
अग्नि की ताकत आगे बढ़ती है और उसके साथ ज़ोर भी आता है। चमकते रंग वाली शक्तियां काम में लगी हैं। मरुत देवता जो सब जानते हैं, वो पहाड़ हिला देते हैं। वो इतने ज़ोर से काम करते हैं कि पक्की चीज़ भी हिलने लगती है। यह हमारे अंदर भी जागरण करते हैं।
Mantra 5
अग्निश्रियो मरुतो विश्वकृष्टय आ त्वेषमुग्रमव ईमहे वयम् । ते स्वानिनो रुद्रिया वर्षनिर्णिजः सिंहा न हेषक्रतवः सुदानवः ॥
हम मरुत देवता को पुकारते हैं जो अग्नि की रोशनी ले के आते हैं। यह सब लोगों के लिए काम करते हैं। हम उनसे मदद मांगते हैं क्योंकि वो बहुत ज़ोर से काम करते हैं। यह रुद्र के रूप में बारिश के साथ आते हैं। जैसे शेर चलता है वैसे ही यह भी अपना काम करते हैं और अच्छा देते हैं।
Mantra 6
व्रातंव्रातं गणंगणं सुशस्तिभिरग्नेर्भामं मरुतामोज ईमहे । पृषदश्वासो अनवभ्रराधसो गन्तारो यज्ञं विदथेषु धीराः ॥
एक के बाद एक ग्रुप आता है, जैसे फौजी डालें चल रही हो। हम लोग अग्नि की चमक और मरुत देवताओं की ताकत माँगते हैं, अच्छे से बोल के। इनके घोड़े खिले रंग के हैं और इनका देना साफ है, बिना किसी शर्त के। यह सब यज्ञ में आते हैं और समझ के चलते हैं।
Mantra 7
अग्निरस्मि जन्मना जातवेदा घृतं मे चक्षुरमृतं म आसन् । अर्कस्त्रिधातू रजसो विमानोऽजस्रो घर्मो हविरस्मि नाम ॥
मैं अग्नि हूँ, जनम से ही सब जानने वाला। मेरे लिए घी जैसी चमक है और मेरा घर अमृत है, जो कभी खत्म नहीं होता। मैं वो मंत्र हूँ जो तीन जगह से चलता है, आसमान तक। मैं वो गर्मी हूँ जो कभी ठंडी नहीं होती, और मेरा नाम हवि है, यज्ञ का सामान।
Mantra 8
त्रिभिः पवित्रैरपुपोद्ध्यर्कं हृदा मतिं ज्योतिरनु प्रजानन् । वर्षिष्ठं रत्नमकृत स्वधाभिरादिद्द्यावापृथिवी पर्यपश्यत् ॥
तीन छन्नों से उसने मंत्र को साफ किया, और दिल से सोच को साफ किया, रोशनी के साथ। अपनी ताकत से उसने सबसे बड़ा खज़ाना बनाया, जो बारिश जैसा है। फिर उसने धरती और आसमान दोनों को देखा और घेर लिया।
Mantra 9
शतधारमुत्समक्षीयमाणं विपश्चितं पितरं वक्त्वानाम् । मेळिं मदन्तं पित्रोरुपस्थे तं रोदसी पिपृतं सत्यवाचम् ॥
यह एक चश्मा है जिसमें सौ नदियाँ बह रही हैं, जो कभी सूखता नहीं। यह सब बोलने वाले शब्दों का बाप है, जो सब जानता है। यह अपने बाप की गोद में खुश रहता है, और धरती और आसमान दोनों उसे पाल के बड़ा करते हैं। यह जो बोलता है, सच होता है।
The hymn primarily praises Agni as Vaiśvānara, the “universal Fire” present among all peoples, who carries offerings and opens the way to the luminous realm (svar).
The Maruts are invoked as powers that bear Agni’s splendor and provide fierce, energizing protection. They strengthen Agni’s work in the sacrifice and symbolize storm-like force that supports growth and victory.
It means Agni is seen as the source of inspired, truthful speech (vāc) and insight. As the sacrificial fire is kindled, it ‘kindles’ clarity and right expression in the worshiper as well.
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