Character · Ramcharitmanas
Narada in the Ramcharitmanas
नारदNamed in 74 verses
Speaks in 18 verses
In this book
Key chapters
The chapters where Narada matters most.
वन-प्रवेश का सोपान: समाज-व्यवस्था से हटकर ‘अन्तःकरण-वन’ में साधना। यहाँ प्रकृति (सरसिज, पवन, खग) ‘मन-सर’ का रूप लेती है, इन्द्रिय-आकर्षण भी, और वैराग्य-प्रेरक शीतलता भी। इसी चरण में भक्ति का परिष्कार ह
सोपान-प्रवेश: ‘श्रद्धा से संदेह-निवृत्ति’ का चरण। बालकाण्ड में कथा-भूमि तैयार होती है, सत्संग, गुरु-वचन, तप, और ‘नारद-वाक्य’ जैसी प्रेरक वाणी के द्वारा जीव का मन (अहं-शंका) से निकलकर ईश्वर-आश्रय में स्
भक्ति का जन्म-चरण: जिज्ञासा (प्रश्न) से श्रद्धा, फिर श्रद्धा से शरणागति। बालकाण्ड ‘सोपान’ में साधक को ‘कथा-प्रवेश’ का अधिकार देता है, जहाँ अहं-रहित प्रश्न (उमा) और कृपा-समाधान (शंकर) से मानस-सर में प्र
सोपान-समापन: ‘लीला-समाधि’ से ‘श्रवण-निष्ठा’ तक। उत्तरकाण्ड में रामराज्य-स्थापन के बाद रस का केंद्र बाह्य विजय नहीं, अंतःशुद्धि है, रामगुण-कीर्तन, साधु-संग, और मायाविमोह का खंडन। यह चरण साधक को ‘कथा-श्र
सोपान-प्रवेश: ‘दर्शन’ से ‘आसक्ति’ और ‘श्रद्धा’ से ‘वर-निश्चय’ तक। बालकाण्ड में भक्ति का जन्म ‘श्रवण-कीर्तन’ से नहीं, ‘साक्षात् रूप-दर्शन’ से भी होता है, नगर-नारी, बालक, मुनि-पत्नी, सबके हृदय में राम-रू
Every verse that names Narada
74 verses
- 1.1.7
यहाँ नहाने का फल तुरंत दिखता है। कौवा कोयल बन जाता है और बगुला हंस बन जाता है। कोई इस सुन कर हैरान न हो। सतसंग की महिमा कोई छिपी हुई बात नहीं है। वाल्मीकि, नारद और मटके से पैदा हुए अगस्त्य ने अपने अपने मुँह से अपनी अपनी कहानी कह दी है।…
- 1.2.37
बंदरों के राजा, भालूओं के राजा, राक्षसों के राजा, और अंगद और बाकी सारे बंदर। मैं सब के खूबसूरत पैरों को नमन करता हूँ। उनका शरीर नीचा था फिर भी उन्हें राम मिल गए। रघु के स्वामी के पैरों के सारे भक्त, यानी पक्षी, जानवर, देवता, इंसान और…
- 1.3.53
नाम की कृपा से शिव कभी खत्म नहीं होते। उनकी चीज़ें तोह अमंगल हैं, पर वोह खुद मंगल का बड़ा भंडार हैं। शुक, सनक आदि, सिद्ध, रिशि और योगी, नाम की कृपा से ब्रह्म के सुख का आनंद लेते हैं। नारद नाम की ताकत जानते थे। दुनिया में सब हरि को प्यार…
- 1.7.132
सारी नदियाँ साफ पानी लेकर बह रही थी, और चिरियों, हिरण और मधुमक्खियाँ सब खुश थे। सब जानवर अपना आपस का जन्मा दुश्मनी छोड़ चुके थे, और पहाड़ पर सब एक दूसरे से प्यार से रहते थे। गिरिजा के आने से पहाड़ के घर चमक उठा, जैसे कोई इंसान को राम की…
- 1.7.134
रिशि ने मुस्कुराते हुए, नरम और गहरी आवाज़ में बोला: तुम्हारी बेटी सारे गुनों की खानी है। वो सुंदर है, स्वभाव से कोमल है, अच्छी चरित्र वाली है और समझदार है। इसके नाम उमा, अंबिका और भवानी हैं। ये कुमारी हर शुभ लक्षण से भरी हुई है, और अपने…
- 1.7.136
रिशि की बात सुन के दोनों ने दिल से समझ लिया कि सच है। दोनों को दुख हुआ, पर उमा खुश हुई। नारद को भी ये राज नहीं पता था। सबका हाल एक जैसा लग रहा था, पर वजह अलग थी। सारी सहेलियां, गिरिजा, पहाड़ का राजा और मैना, सबके बदन में रोमांच आया और…
- 1.8.141
ये सब कहकर नारद जी ने हरि को याद किया और पार्वती को आशीर्वाद दिया। फिर उन्होंने पर्वत के राजा से कहा, ये शादी बहुत अच्छी होगा, अब अपना शक छोड़ दो।
- 1.8.142
रिशि ने ये बोलकर ब्रह्मा के यहाँ जा पहुँचा। अब सुनिए आगे क्या हुआ। मैना ने अपने पति को अकेले पाकर कहा, नाथ, मुझे रिशि की बात समझ नहीं आई। अगर घर, लड़का और खानदान सब बेहतरीन हो, तो अपनी बेटी की शादी उसके लायक किसी से करवा दो। वरना ऐसे लड़के…
- 1.8.144
अब अगर तुम्हे अपनी बेटी से प्यार है, तो जाकर उसे यह समझा दो। उसे बोलो वो तप करे जिससे उसे शिव मिल जाये। किसी और तरह से उसका दुख नहीं मिटने वाला। नारद की बात में बहुत मतलब है और अच्छी वजह है। जिस भगवान के झंडे पर बैल है, वो सुंदर है और हर…
- 1.8.146
पार्वती को कहा गया, हे पर्वत की बेटी, जाकर तपस्या कर, और जो नारद ने कहा था उसको सच मान। ये बात उसकी माँ और पापा को भी पसंद आई, क्योंकि तपस्या सुख देती है और दुख और पाप को मिटा देती है। ब्रह्मा तपस्या के बल से ही दुनिया बनाते हैं, और विष्णु…
- 1.8.155
पारवती के पास जाओ और उसकी मोहब्बत आज़माओ। फिर उसके पापा को समझाओ, जो पहाड़ के राजा हैं, कि उसे घर भेज दे। इससे उनका शक दूर हो जाएगा।
- 1.8.156
वहीं रिशियों ने गौरी को देखा। ऐसी लग रही थी जैसे तपस्या ही रूप में आ गई हो। रिशि बोले, सुनो पर्वत की बेटी। ऐसी भारी तपस्या क्यों कर रही हो? किस की पूजा कर रही हो, और क्या चाहती हो? हमें सच का राज़ क्यों नहीं बोलती? पार्वती बोली, मेरा मन इस…
- 1.8.157
रिशि उसकी बात सुन के हस्से और बोले, तुम्हारी बॉडी पहाड़ से पैदा हुई है। बताओ, नारद की बात सुन के किसने अपना घर बचा लिया है?
- 1.8.158
वो गया और दक्ष के बेटों को सिखाया, और फिर वो लोग अपना घर देखने वापस कभी नहीं आए। उसने चित्रकेतु का घर उजाड़ दिया, और फिर हिरण्यकशिपु के साथ भी यही हाल हुआ। जो भी आदमी या औरत नारद की बात सुन लेती है, वो घर छोड़ कर भिखारी बन ही जाती है। उसका…
- 1.9.160
अभी भी मेरी बात ध्यान से सुनो। मैंने तुम्हारे लिए एक बहुत अच्छा वर सोचा है। वो बहुत सुंदर है, पाक है, दयालु है, अच्छी स्वभाव वाला है। वेद उसकी कीर्ति और उसके काम गाते हैं। उसमे कोई दोष नहीं, सारे गुण भरे पड़े हैं। लक्ष्मी के पति हैं…
- 1.9.162
अरे रिशियों के सरदार, अगर तुम मुझसे पहले मिलते, तो मैं तुम्हारी बात सुनकर सिर पे रख लेती। लेकिन अब मैंने अपनी जान शिव पे लग दी है। अब कौन उसके गुण और दोष तोलता है? अगर तुम्हारे दिल में ये बात ज्यादा चुभी है, और बिना रिश्ता कराये तुम रह…
- 1.9.183
उस वक़्त जो मैने कहा था तुमने नहीं सुना, नारद की सलाह मान ली। अब तुम्हारा वादा झूठा हो गया, क्योंकि शिव ने काम को जला कर राख कर दिया।
- 1.10.184
भवानी ने सुन कर मुस्कुराते हुए बोला, हे सबसे बड़े ज्ञानी रिशी, तुमने बिलकुल सही कहा। तुम्हारे हिसाब से अब शिव ने कामदेव को जला दिया, और अब तक वो वैराग्य में नही थे। मेरे हिसाब से तो शिव सदा से जोगी थे, जनम से निर्मल, किसी चाहत के बिना…
- 1.10.202
मैंने नारद को क्या बुरा किया था? उसने तो मेरे घर को ही उजाड़ दिया जहाँ मैं रह रही थी। उसने उमा को ऐसी सलाह दी कि वोह एक पागल दूल्हे के लिए तपस्या करने लगी है। सच में इनके अंदर न मोह है न दया। ये बेपरवाह हैं, इनके पास न दौलत है, न घर, न…
- 1.10.204
उस वक़्त नारद और सात रिशि साथ में आ पहुंचे. हिमालय, यानी बर्फ वाले पहाड़ के स्वामी, खबर सुन के तुरंत अपने घर चले गए.