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Rishi: Atharvanic tradition (late book; specific r̥ṣi not securely fixed for this verse in common indices)
Devata: Vāyu (as atmospheric warder-off)
Chandas: Anuṣṭubh-like (late AV style; mixed/irregular cadence possible)
Mantra 1
सुरक्षा। अ॒ग्निं ते वसु॑वन्तमृच्छन्तु ।ये मा॑घा॒यवः॒ प्राच्या॑ दि॒शोऽभि॒दासा॑त्
यह मंत्र तुम्हारी सुरक्षा के लिए है। जो लोग तुम्हारे पीछे पड़ जाते हैं, जो तुम्हे पूरब दिशा से तकलीफ देना चाहते हैं, वो सब अग्नि के पास चले जाएँ। अग्नि जो धनवान है, वो उन्हे अपने पास ले ले। तुम सेफ रहो।
Mantra 2
वा॒युं ते॒३ऽन्तरि॑क्षवन्तमृछन्तु । ये मा॑घा॒यवः॑ ए॒तस्या॑ दि॒शोऽभि॒दासा॑त्
वायु देवता हवा में रहते हैं, उनकी शक्ति बड़ी है। जो लोग फायदा के लिए दुश्मनी करते हैं, वो लोग वायु की तरफ भाग जाओ। यह तरफ़ से उनका हमला रुक जाए।
Mantra 3
सोमं॒ ते रु॒द्रव॑न्तमृछन्तु । ये मा॑घा॒यवो॒ दक्षि॑णाया दि॒शोऽभि॒दासा॑त्
सोम देवता हैं, उनके साथ रुद्र भी हैं। जो लोग फायदा के लिए दुश्मनी करते हैं, वो लोग सोम की तरफ भाग जाओ। दक्षिण तरफ़ से उनका हमला रुक जाए।
Mantra 4
वरु॑णं॒ त आ॑दि॒त्यव॑न्तमृच्छन्तु ।ये मा॑घा॒यव॑ ए॒तस्या॑ दि॒शोऽभि॒दासा॑त्
वरुण देवता हैं, उनके साथ आदित्य भी हैं। जो लोग फायदा के लिए दुश्मनी करते हैं, वो लोग वरुण की तरफ भाग जाओ। यह तरफ़ से उनका हमला रुक जाए।
Mantra 5
सूर्यं॒ ते द्यावा॑पृथि॒वीव॑न्तमृच्छन्तु । ये मा॑घा॒यव॑ प्र॒तीच्याः॑ दि॒शोऽभि॒दासा॑त्
सूर्य देवता हैं, उनमें आसमान और धरती दोनों की शक्ति है। जो लोग फायदा के लिए दुश्मनी करते हैं, वो लोग सूर्य की तरफ भाग जाओ। पश्चिम तरफ़ से उनका हमला रुक जाए।
Mantra 6
अ॒पस्त ओष॑धीमतीरृछन्तु । ये मा॑घा॒यव॑ ए॒तस्या॑ दि॒शोऽभि॒दासा॑त्
यह पानी जिसमें बहुत सारी जड़ी-बूटियाँ हैं, उनकी तरफ भागो। जो लोग तुम्हारा नुकसान करने के इरादे से आए हैं, वो लोग इस पानी के पास चले जाएँ।
Mantra 7
वि॒श्वक॑र्माणं॒ ते स॑प्तऋ॒षिव॑न्तमृच्छन्तु । ये मा॑घा॒यव॒ उदी॑च्या दि॒शोऽभि॒दासा॑त्
विश्वकर्मन और सात रिशियों की शरण में जाओ। वो लोग तुम्हे बचाएंगे जो उत्तर दिशा से तुमपे हमला करने आए हैं।
Mantra 8
इन्द्रं॒ ते म॒रुत्व॑न्तमृच्छन्तु । ये मा॑घा॒यव॑ ए॒तस्या॑ दि॒शोऽभि॒दासा॑त्
इंद्र और मरुत गण की शरण लो। यह लोग तुम्हारे दुश्मनों को भगाएंगे जो इस तरफ से हमला कर रहे हैं।
Mantra 9
प्र॒जाप॑तिं॒ ते प्र॒जन॑नवन्तमृच्छन्तु । ये मा॑घा॒यवो॑ ध्रु॒वाया॑ दि॒शोऽभि॒दासा॑त्
प्रजापति भगवान की शरण में जाओ। वो सबका पालन करते हैं। वो तुम्हे उस तरफ के दुश्मनों से बचाएंगे जो पक्के इरादे से आए हैं।
Mantra 10
बृह॒स्पतिं॒ ते वि॒श्वदे॑ववन्तमृच्छन्तु । ये मा॑घा॒यव॑ ऊ॒र्ध्वाया॑ दि॒शोऽभि॒दासा॑त्
बृहस्पति और सारी देवियों देवताओं की शरण लो। वो ऊपर से हमला करने वाले दुश्मनों को रोक देंगे।
It creates a protective perimeter by direction: any hostile approach or sorcery coming from a quarter is redirected into the control of that quarter’s invoked power, so it cannot strike the intended person or house.
The hymn treats space as governed: each direction is a domain with a guardian. Naming the quarter and its deity ritualizes a ‘handover’ of the attacker, breaking their access to the beneficiary.
The cited verses do not require substances; it primarily works through recitation and spatial orientation. In practice, people may add simple supports like a household fire (Agni) or purification water, but they are optional.
Answers come straight from the texts, with the shlokas they draw on. Ask in your own words.
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