अध्याय ९६: शरभ-प्रादुर्भावः, नृसिंह-दर्पशमनम्, विष्णोः शिवस्तुतिः, फलश्रुति
त्रिगुणाय त्रिशूलाय गुणातीताय योगिने संसाराय प्रवाहाय महायन्त्रप्रवर्तिने
triguṇāya triśūlāya guṇātītāya yogine saṃsārāya pravāhāya mahāyantrapravartine
त्रिगुणस्वरूप, त्रिशूलधारी, गुणातीत परम योगी; संसार-प्रवाह के रूप में निरंतर बहने वाले और महायंत्र (सृष्टि-प्रलय) को प्रवर्तित करने वाले प्रभु को नमस्कार।
Suta Goswami (narrating a traditional Shiva-stotra within the Linga Purana)