अध्याय ९६: शरभ-प्रादुर्भावः, नृसिंह-दर्पशमनम्, विष्णोः शिवस्तुतिः, फलश्रुति
नमश्चन्द्राग्निसूर्याय मुक्तिवैचित्र्यहेतवे वरदायावताराय सर्वकारणहेतवे
namaścandrāgnisūryāya muktivaicitryahetave varadāyāvatārāya sarvakāraṇahetave
चन्द्र, अग्नि और सूर्यस्वरूप—मुक्ति के विविध प्रकारों के हेतु—वरद, अवताररूप, और समस्त कारणों के भी कारण परम पति को नमस्कार।
Suta Goswami (narrating a traditional Shiva-stuti within the Linga Purana discourse)