अध्याय ८२ — व्यपोहनस्तवः (पापव्यपोहन-स्तोत्रम्)
भक्त्या परमया नित्यं सर्वदेवैरभिष्टुता गणेन्द्राम्भोजगर्भेन्द्रयमवित्तेशपूर्वकैः
bhaktyā paramayā nityaṃ sarvadevairabhiṣṭutā gaṇendrāmbhojagarbhendrayamavitteśapūrvakaiḥ
वह परम भक्ति में नित्य स्थित थी; गणेश, ब्रह्मा, इन्द्र, यम और कुबेर आदि समस्त देवगण उसकी निरन्तर स्तुति करते थे, उसे प्रभु-कार्य को धारण करने वाली मंगल-शक्ति मानकर।
Suta Goswami (narrating to the sages of Naimisharanya)