प्रलय-तत्त्वलयः, नीललोहित-रुद्रः, अष्टमूर्तिस्तवः, एवं ब्रह्मणो वैराग्यम्
मृत्युहीनः पुमान्विद्धि समृत्युः पद्मजो ऽपि सः किंतु देवेश्वरो रुद्रः प्रसीदति यदीश्वरः
mṛtyuhīnaḥ pumānviddhi samṛtyuḥ padmajo 'pi saḥ kiṃtu deveśvaro rudraḥ prasīdati yadīśvaraḥ
जानो कि परम पुरुष मृत्यु से रहित है; कमलज ब्रह्मा भी मृत्यु के अधीन है। परन्तु देवेश्वर रुद्र—पशुपति ईश्वर—जब प्रसन्न होते हैं, तब अनुग्रह देकर मृत्यु-सीमा के पार शिवपद प्रदान करते हैं।
Suta Goswami (narrating the Linga Purana teaching to the sages of Naimisharanya)