युगधर्मवर्णनम् — चतुर्युग, गुण, धर्मपाद, तथा वार्तोत्पत्ति
वार्तां कृषिं समायाता वर्तुकामाः प्रयत्नतः वार्ता वृत्तिः समाख्याता कृषिकामप्रयत्नतः
vārtāṃ kṛṣiṃ samāyātā vartukāmāḥ prayatnataḥ vārtā vṛttiḥ samākhyātā kṛṣikāmaprayatnataḥ
जो लोग जीवन-निर्वाह की इच्छा से परिश्रमपूर्वक वार्ता—कृषि और उससे संबद्ध कर्म—को अपनाते हैं, उनकी वृत्ति ‘वार्ता’ कही जाती है, जो खेती के प्रयत्न से उत्पन्न होती है।
Suta Goswami