नैमिषारण्ये सूतागमनम् — लिङ्गमाहात्म्यभूमिका तथा शब्दब्रह्म-ओङ्कार-लिङ्गतत्त्वम्
शब्दं ब्रह्मतनुं साक्षाच् छब्दब्रह्मप्रकाशकम् वर्णावयवम् अव्यक्तलक्षणं बहुधा स्थितम्
śabdaṃ brahmatanuṃ sākṣāc chabdabrahmaprakāśakam varṇāvayavam avyaktalakṣaṇaṃ bahudhā sthitam
शब्द ही साक्षात् ब्रह्म का शरीर है, जो शब्द-ब्रह्म को प्रकाशित करता है। वह वर्णों और उनके अवयवों से युक्त, अव्यक्त के लक्षण से चिह्नित होकर अनेक रूपों में स्थित रहता है।
Suta Goswami