
भीष्मरक्षण-प्रकरणम् / The Protective Screen around Bhīṣma and the Śalya–Yudhiṣṭhira Clash
Upa-parva: Bhīṣma-vadha / Bhīṣma-saṃbandhita Yuddha-vṛttānta (War Chronicle under Bhīṣma’s Command)
Sañjaya reports Bhīṣma seen enraged in battle, encircled by Pāṇḍava fighters like the sun veiled by clouds. Duryodhana instructs Duḥśāsana to prioritize Bhīṣma’s protection, asserting that a guarded Bhīṣma can strike down the Pāṇḍavas and the Pāñcālas. Duḥśāsana complies, surrounding Bhīṣma with a large contingent. A massive cavalry force advances with speed and noise, raising dust that obscures visibility; the Pāṇḍava side is shaken but Yudhiṣṭhira with Nakula and Sahadeva counters the charge, inflicting heavy losses. The routed horsemen flee; the Pāṇḍavas signal advantage with conches and drums. Observing Kaurava disarray, Duryodhana appeals to Śalya (Madrarāja) to restrain Yudhiṣṭhira, describing him as driving the army back. Śalya advances; Yudhiṣṭhira strikes him with multiple arrows, and Nakula–Sahadeva add supporting fire. Śalya retaliates with dense volleys, placing Yudhiṣṭhira under pressure; Bhīma then rushes to support, and the engagement escalates into a severe, wide-ranging battle as the sun glows toward the western direction.
Chapter Arc: कौरव-सभा के भीतर धुएँ-सा घना क्रोध: दुर्योधन दीर्घ श्वास लेता, नाग की भाँति फुफकारता, और अर्जुन के पराक्रम की चर्चा से भीतर-भीतर जल उठता है। → दुर्योधन भीष्म के सामने युद्ध की दिशा और विजय-पराजय का भय रखता है—पाण्डवों के बढ़ते प्रभाव, अर्जुन की अजेयता, और सेनाओं के मनोबल पर पड़ते आघात का संकेत देता है। भीष्म शांत, पर अडिग, अपने व्रत और मर्यादा की सीमा स्पष्ट करता है। → भीष्म का निर्णायक वचन: ‘प्राण-त्याग हो जाए, तब भी मैं शिखण्डी को नहीं मारूँगा’—स्त्री/स्त्री-पूर्व होने के कारण उसे लक्ष्य न बनाने की प्रतिज्ञा को वह युद्ध-नीति से ऊपर रख देता है। → भीष्म दुर्योधन को अपने धर्म-आचरण की रेखा दिखाता है: वह पाण्डवों से युद्ध करेगा, पर कुछ सीमाएँ अटल हैं। दुर्योधन को यह स्वीकार करना पड़ता है कि भीष्म की शक्ति के साथ-साथ उसकी मर्यादा भी युद्ध का भाग्य लिखेगी। → दुर्योधन की बेचैनी अगले दिन की रचना की ओर धकेलती है—भीष्म की ‘सीमा’ को जानकर कौरव पक्ष शिखण्डी को साधन बनाकर भीष्म-वध की संभावना से घिरता है।
Verse 1
[दाक्षिणात्य अधिक पाठके २ ३ श*लोक मिलाकर कुल ४५ ६ “लोक हैं।] 30:22 धन हि कमी अष्टनवतितमोब् ध्याय: भीष्मका दुर्योधनको अर्जुनका पराक्रम बताना और भयंकर युद्धके लिये प्रतिज्ञा करना तथा प्रात:काल दुर्योधनके द्वारा भीष्मकी रक्षाकी व्यवस्था संजय उवाच वाक् शल्यैस्तव पुत्रेण सो5तिविद्धों महामना: । दुःखेन महता<5<विष्टो नोवाचाप्रियमण्वपि,संजय कहते हैं--महाराज! आपके पुत्रद्वारा वाग्बाणोंसे अत्यन्त विद्ध होकर महामना भीष्मको महान् दुःख हुआ; तथापि उन्होंने उससे कोई किंचिन्मात्र भी अप्रिय वचन नहीं कहा
قال سنجيا: «أيها الملك العظيم! مع أن بهيشما، عظيم النفس، قد طُعن مرارًا بسهام الكلام الحادّة من ابنك، وغمره حزنٌ شديد، فإنه لم ينطق بكلمةٍ واحدةٍ غير لائقة، ولو يسيرًا.»
Verse 2
स ध्यात्वा सुचिरं काल॑ दुः:खरोषसमन्वित: । श्वसमानो यथा नाग: प्रणुन्नो वाकुशलाकया,वे दुःख और रोषसे युक्त होकर दीर्घकालतक कुछ सोचते हुए लंबी साँस खींचते रहे। वाणीरूपी अंकुशसे पीड़ित होकर वे हाथीके समान व्यथाका अनुभव करने लगे
قال سنجيا: «وبعد أن تفكّر طويلًا، وقد اجتمع عليه الحزن والغضب، أخذ يزفر زفراتٍ ثقيلة؛ كفيلٍ يُساق بخُطّافٍ من كلام، أحسَّ بلسعة العذاب في باطنه.»
Verse 3
उद्वृत्य चक्षुषी कोपान्निर्दहन्निव भारत । सदेवासुरगन्धर्व लोक॑ लोकविदां वर:
قال سنجيا: «يا بهاراتا، رفع عينيه غضبًا كأنه يُحرق ما أمامه. ذلك الأوّل بين العارفين بالعوالم بدا كأنه قادرٌ على إحراق المملكة كلّها—عالم الآلهة، وعالم الأسورا، وعالم الغندهرفا.»
Verse 4
भारत! फिर क्रोधसे दोनों आँखें चढ़ाकर लोकवेत्ताओंमें श्रेष्ठ भीष्म इस प्रकार देखने लगे, मानो देवताओं, असुरों और गन्धर्वोंसहित सम्पूर्ण लोकोंको दग्ध कर डालेंगे ।। अब्रवीत् तव पुत्र स सामपूर्वमिदं वच: । कि त्वं दुर्योधनैवं मां वाकृशल्यैरपकृन्तसि,फिर आपके पुत्रको सान्त्वना देते हुए वे उससे इस प्रकार बोले--“बेटा दुर्योधन! तुम इस प्रकार वाग्बाणोंसे मुझे क्यों छेद रहे हो? मैं तो यथाशक्ति शत्रुओंपर विजय पानेकी चेष्टा करता हूँ और तुम्हारे प्रिय साधनमें लगा हुआ हूँ। इतना ही नहीं, तुम्हारा प्रिय करनेकी इच्छासे मैं समराग्निमें अपने प्राणोंको होम देनेके लिये भी तैयार हूँ
يا بهاراتا! حينئذٍ رفع بهيشما—وهو الأسبق بين العارفين بطرائق الدنيا—عينيه غضبًا، ونظر كأنه سيحرق العوالم كلها، مع الآلهة والأسورا والغندهرفا. غير أنه، وهو يهدّئ ابنك بكلمات المصالحة، قال: «يا دوريودhana، لِمَ تطعنني هكذا بكلامٍ كالسِّهام ذات الشُّوَك؟ إنني أجتهد بقدر استطاعتي لأقهر العدو، وأعمل بالوسائل التي ترغب فيها. بل إنني، ابتغاء مرضاتك، مستعدٌّ أن أقدّم حياتي نفسها قربانًا في نار المعركة».
Verse 5
घटमानं यथाशक्ति कुर्वाणं च तव प्रियम् । जुद्दानं समरे प्राणांस्तव वै प्रियकाम्यया,फिर आपके पुत्रको सान्त्वना देते हुए वे उससे इस प्रकार बोले--“बेटा दुर्योधन! तुम इस प्रकार वाग्बाणोंसे मुझे क्यों छेद रहे हो? मैं तो यथाशक्ति शत्रुओंपर विजय पानेकी चेष्टा करता हूँ और तुम्हारे प्रिय साधनमें लगा हुआ हूँ। इतना ही नहीं, तुम्हारा प्रिय करनेकी इच्छासे मैं समराग्निमें अपने प्राणोंको होम देनेके लिये भी तैयार हूँ
قال سنجيا: «إنني أجتهد بقدر استطاعتي، وأعمل لما هو عزيز عليك. حقًّا، رغبةً في إرضائك، أنا مستعدٌّ حتى لأن أراهن—بل أن أقدّم—حياتي نفسها في المعركة».
Verse 6
यदा तु पाण्डव: शूर: खाण्डवेडग्निमतर्पयत् । पराजित्य रणे शक्रं पर्याप्त॑ तन्निदर्शनम्,“परंतु तुम्हें याद होगा, जब शूरवीर पाण्डुनन्दन अर्जुनने युद्धमें देवराज इन्द्रको परास्त करके खाण्डव-वनमें अग्निको तृप्त किया था, वही उनकी अजेयताका पूरा प्रमाण है
«ولكنك تذكر حين إن البطل أرجونا، ابن باندو، قد غلب شَكرا (إندرا) في ساحة القتال وأشبع أغني في غابة خانْدَفا؛ فذلك وحده دليلٌ كافٍ على أنهم لا يُقهرون.»
Verse 7
यदा च त्वां महाबाहो गन्धर्वैर््वतमोजसा । अमोचयत् पाण्डुसुतः पर्याप्तं तन्निदर्शनम्,“महाबाहो! जब गन्धर्वलोग तुम्हें बलपूर्वक पकड़ ले गये थे, उस समय भी पाण्घुपुत्र अर्जुनने ही तुम्हें छुड़ाया था। उनके अनन्त पराक्रमको समझनेके लिये यह दृष्टान्त पर्याप्त होगा
«يا عظيم الذراعين! حين اختطفك الغندهرفا بقوةٍ وبأس، كان أرجونا ابن باندو هو الذي خلّصك. وهذا المثال وحده كافٍ لفهم بأسه الذي لا حدّ له.»
Verse 8
द्रवमाणेषु शूरेषु सोदरेषु तव प्रभो । सूतपुत्रे च राधेये पर्याप्तं तन्निदर्शनम्,'प्रभो! उस अवसरपर तुम्हारे ये शूरवीर भाई और राधानन्दन सूतपुत्र कर्ण तो मैदान छोड़कर भाग गये थे। यह अर्जुनकी अदभुत शक्तिका पर्याप्त उदाहरण है
قال سنجيا: «يا مولاي، حينئذٍ كان إخوتك الأبطال يفرّون في اضطراب، وكان رادهيّا—كارنا ابن السائس—قد ولّى وجهه عن الميدان. وذلك بعينه دليلٌ كافٍ على بأس أرجونا العجيب.»
Verse 9
यच्च नः सहितान् सर्वान् विराटनगरे तदा । एक एव समुद्यात: पर्याप्त॑ तन्निदर्शनम्,“उन दिनों विराटनगरमें हम सब लोग एक साथ युद्धके लिये डटे हुए थे, परंतु अर्जुनने अकेले ही हमलोगोंपर आक्रमण किया। यह उनकी अपरिमित शक्तिका पर्याप्त उदाहरण है
قال سنجيا: «حين كنا جميعًا، متّحدين، ثابتين للقتال في مدينة فيرَاطا، نهض هو وحده وهاجمنا. فذلك وحده دليل كافٍ—ومثال وافٍ—على بأس أرجونا الذي لا يُقاس.»
Verse 10
द्रोणं य युधि संरब्धं मां च निर्जित्य संयुगे । वासांसि स समादत्त पर्याप्तं तन्निदर्शनम्,'अर्जुनने क्रोधमें भरे हुए द्रोणाचार्यको तथा मुझे भी युद्धमें परास्त करके सबके वस्त्र छीन लिये थे। यह उनकी अजेयताका पर्याप्त प्रमाण है
قال سنجيا: «في المعركة غلب درونا وهو مستعر الغضب، وغلبني أنا أيضًا في القتال، ثم أخذ ثيابهم. إن في ذلك لبرهانًا كافيًا على بأسه الذي لا يُقاوَم.»
Verse 11
तथा द्रौणिं महेष्वासं शारद्वतमथापि च । गोग्रहे जितवान् पूर्व पर्याप्तं॑ तन्निदर्शनम्,'पूर्वकालमें उसी गोग्रहके अवसरपर पाण्डु-कुमारने महाधनुर्धर अश्वत्थामा तथा कृपाचार्यको भी परास्त कर दिया था। यह दृष्टान्त उन्हें समझनेके लिये पर्याप्त है
قال سنجيا: «وكذلك، في غارة الماشية القديمة، كان ابن باندو قد هزم من قبل الرامي العظيم أشوَتثامان، وهزم أيضًا شارَدْوَتا (كريپا). إن ذلك السَّبق وحده كافٍ دليلًا لفهم هذا الأمر.»
Verse 12
विजित्य च यदा कर्ण सदा पुरुषमानिनम् । उत्तरायै ददौ वस्त्र पर्याप्तं तन्निदर्शनम्,“उन दिनों सदा अपने पुरुषार्थका अभिमान रखनेवाले कर्णको भी जीतकर अर्जुनने उसके वस्त्र छीनकर उत्तराको अर्पित किये थे। यह दृष्टान्त पर्याप्त होगा
قال سنجيا: «وحين هزم أرجونا كارنا—الذي كان دائمًا يزهو برجولته وبأسه—أخذ ثوبه وقدّمه إلى أُتَّرَا. وهذا المثال أيضًا كافٍ دليلًا.»
Verse 13
निवातकवचान् युद्धे वासवेनापि दुर्जयान् । जितवान् समरे पार्थ: पर्याप्त॑ तन्निदर्शनम्,“जिन्हें परास्त करना इन्द्रके लिये भी कठिन था, उन निवातकवचोंको अर्जुनने युद्धमें परास्त कर दिया था। उनकी अलौकिक शक्तिको समझनेके लिये यह दृष्टान्त पर्याप्त होगा
قال سنجيا: «في الحرب هزم بارثا—ابن بريثا (أرجونا)—النيفاتاكاڤاتشا، وهم أعداء كان حتى إندرا (فاسافا) ليجد غلبتهم عسيرة. وهذا المثال وحده كافٍ للدلالة على القوة الخارقة التي يملكها أرجونا.»
Verse 14
को हि शक्तो रणे जेतुं पाण्डवं रभसं तदा । यस्य गोप्ता जगद्गोप्ता शड्खचक्रगदाधर:,“विश्वरक्षक, शंख, चक्र और गदा धारण करनेवाले अनन्तशक्ति, सृष्टि और संहारके एकमात्र कर्ता देवाधिदेव सनातन परमात्मा सर्वेश्वर भगवान् वासुदेव जिनकी रक्षा करनेवाले हैं, उन वेगशाली वीर पाण्डुपुत्र अर्जुनको युद्धके मैदानमें कौन जीत सकता है
قال سنجيا: من ذا الذي كان يستطيع آنذاك أن يهزم الباندفيَّ المندفع في ساحة القتال—وهو الذي حاميه حامي العالم كله، حامل الصدفة والقرص والصولجان؟ تؤكد هذه الأبيات أن بأس أرجونا الحربي لا ينفصل عن الحراسة الأخلاقية والكونية التي يمنحها فاسوديفا؛ فإذا اصطفّت الحماية الإلهية مع قضية عادلة، عجزت القوة البشرية المجردة عن الغلبة.
Verse 15
वासुदेवो5नन्तशक्ति: सृष्टिसंहारकारक: । सर्वेश्व॒रो देवदेव: परमात्मा सनातन:,“विश्वरक्षक, शंख, चक्र और गदा धारण करनेवाले अनन्तशक्ति, सृष्टि और संहारके एकमात्र कर्ता देवाधिदेव सनातन परमात्मा सर्वेश्वर भगवान् वासुदेव जिनकी रक्षा करनेवाले हैं, उन वेगशाली वीर पाण्डुपुत्र अर्जुनको युद्धके मैदानमें कौन जीत सकता है
قال سنجيا: فاسوديفا ذو القدرة التي لا حدّ لها، الفاعل الأوحد للخلق والفناء، ربّ الجميع، إله الآلهة، الذات العليا الأزلية—إذا كان مثل هذا الحامي إلى جانب أرجونا، ابن باندو السريع الشجاع، فمن في ساحة القتال يستطيع حقًّا أن يقهره؟ يصوّر البيت النصر لا بوصفه مهارة سلاح فحسب، بل قوةً أخلاقية وروحية تنبثق حين يصطف المرء مع الأعلى ويقاتل من أجل قضية عادلة.
Verse 16
उक्तोडसि बहुशो राजन् नारदाद्यर्महर्षिभि: । त्वं तु मोहान्न जानीषे वाच्यावाच्यं सुयोधन,“राजन! सुयोधन! यह बात नारद आदि महर्षियोंने तुमसे कई बार कही है, परंतु तुम मोहवश कहने और न कहनेयोग्य बातको समझते ही नहीं हो
قال سنجيا: «أيها الملك، لقد أخبرك الحكماء العظام—نارادا وغيرُه—بهذا مرارًا كثيرة. ولكنك، وقد أعماك الوهم، يا سويودانا، لا تميّز ما ينبغي أن يُقال وما لا ينبغي أن يُقال.»
Verse 17
मुमूर्षुर्हि नर: सर्वान् वृक्षान् पश्यति काउचनान् । तथा त्वमपि गान्धारे विपरीतानि पश्यसि,'गान्धारीनन्दन! जैसे मरणासन्न मनुष्य सभी वृक्षोंको सुनहरे रंगका देखता है, उसी प्रकार तुम भी सब कुछ विपरीत ही देख रहे हो
قال سنجيا: «إن الرجل الذي أشرف على الموت يرى كل الأشجار كأنها من ذهب. وكذلك أنت أيضًا، يا ابن غانداري، ترى الأمور كلها مقلوبةً مشوَّهة.»
Verse 18
स्वयं वैरं महत् कृत्वा पाण्डवै: सह सूंजयै: । युद्धास्व तानद्य रणे पश्याम: पुरुषो भव,(अशक्या: पाण्डवा जेतुं देवेरपि सवासवै: ।) “तुमने स्वयं ही पाण्डवों तथा सूंजयोंके साथ महान् वैर ठाना है। अतः अब तुम्हीं युद्ध करो। हम सब लोग देखते हैं। तुम स्वयं पुरुषत्वका परिचय दो। पाण्डवोंको तो इन्द्रसहित सम्पूर्ण देवता भी नहीं जीत सकते
قال سنجيا: «لقد صنعتَ بنفسك عداوةً عظيمة مع أبناء باندو ومع السِّرِنْجَيَة. فقاتِلْهم اليوم في ساحة الحرب. سننظر جميعًا—أظهر رجولتك. إن أبناء باندو لا يُغلَبون حتى من الآلهة، ولو كان إندرا على رأسهم.»
Verse 19
अहं तु सोमकान् सर्वान् पज्चालांश्व॒ समागतान् | निहनिष्ये नरव्यात्र वर्जयित्वा शिखण्डिनम्,'किंतु पुरुषसिंह! मैं केवल शिखण्डीको छोड़कर युद्धमें आये हुए समस्त सोमकों और पांचालोंको भी मार डालूँगा
قال سانجيا: «أما أنا، يا نِمْرَ الرجال، فسأقتل جميع السُّوماكَة وكلَّ البانشالا المجتمعين الذين جاءوا إلى هذه المعركة—إلا شيخاندِن.»
Verse 20
तैर्वाहं निहतः संख्ये गमिष्ये यमसादनम् । तान् वा निहत्य समरे प्रीति दास्याम्पहं तव,'या तो उन्हींके हाथों युद्धमें मारा जाकर मैं यमलोकका रास्ता लूँगा अथवा उन्हींको समरांगणमें मारकर मैं तुम्हें हर्ष प्रदान करूँगा
قال سانجيا: «إمّا أن أُصرَعَ بأيديهم في لُجَّة القتال فأمضي إلى دار يَما، وإمّا أن أقتلهم في ساحة الحرب فأهبك الفرح.»
Verse 21
पूर्व हि स्त्री समुत्पन्ना शिखण्डी राजवेश्मनि । वरदानात् पुमाञ्जात: सैषा वै स्त्री शिखण्डिनी,“शिखण्डी पहले राजभवनमें स्त्रीके रूपमें उत्पन्न हुआ था; फिर वरदानसे पुरुष हो गया, अतः मेरी दृष्टिमें तो यह स्त्रीरूपा शिखण्डिनी ही है
قال سانجيا: «لقد وُلِدَ شيخاندِي قديمًا في القصر الملكي امرأةً، ثم صار رجلًا بقوة نعمةٍ مُنِحَت له. لذلك، في حكمي، إنما هو شيخاندِنِي—أنثى في الأصل.»
Verse 22
तमहं न हनिष्यामि प्राणत्यागेडपि भारत । यासौ प्राड्निर्मिता धात्रा सैषा वै स्त्री शिखण्डिनी,“भारत! मेरे प्राणोंपर संकट आ जाय तो भी मैं उसे नहीं मारूँगा। जिसे विधाताने पहले स्त्री बनाया था, वह शिखण्डिनी आज भी मेरी दृष्टिमें स्त्री ही है
قال سانجيا: «يا بهاراتا، ولو كلّفني ذلك حياتي فلن أضربه. فإن من صاغه الخالق أولًا امرأةً—شيخاندِنِي—يبقى في حكمي امرأةً.»
Verse 23
सुखं स्वपिहि गान्धारे श्वो5पि कर्ता महारणम् । यं जना: कथयिष्यन्ति यावत् स्थास्यति मेदिनी
قال سانجيا: «نامي بسلام، يا غاندھاري. فغدًا سيُقيم معركةً عظيمة، سيظل الناس يذكرونها ما دامت الأرض باقية.»
Verse 24
'गान्धारीनन्दन! अब तुम सुखसे जाकर सो रहो। कल मैं बड़ा भीषण युद्ध करूँगा, जिसकी चर्चा लोग तबतक करते रहेंगे, जबतक कि यह पृथ्वी बनी रहेगी” ।। एवमुक्तस्तव सुतो निर्जगाम जनेश्वर । अभिवाद्य गुरुं मूर्थ्ना प्रययौ स्वं निवेशनम्,जनेश्वर! भीष्मके ऐसा कहनेपर आपका पुत्र दुर्योधन अपने उन गुरुजनके चरणोंमें मस्तक रखकर प्रणाम करनेके पश्चात् अपने शिविरको चला गया
قال سنجيا: «يا ابن غانداري، امضِ الآن في راحةٍ ونَمْ. غدًا سأخوض قتالًا رهيبًا عظيمًا، سيظل الناس يروون خبره ما دامت هذه الأرض قائمة». فلما قيل له ذلك، يا سيد الرجال، انصرف ابنك. وبعد أن انحنى واضعًا رأسه إجلالًا عند قدمي الشيخ المعلّم، مضى إلى مقامه الخاص.
Verse 25
आगम्य तु ततो राजा विसृज्य च महाजनम् । प्रविवेश ततस्तूर्ण क्षयं शत्रुक्षयड्कर:,वहाँ आकर शत्रुओंका विनाश करनेवाले राजा दुर्योधनने लोगोंके उस महान् समुदायको तुरंत विदा कर दिया और स्वयं शिविरके भीतर प्रवेश किया
قال سنجيا: لما وصل إلى هناك، قام الملك—دوريودانا، جالب الهلاك لأعدائه—بصرف الجمع العظيم من الناس على الفور، ثم دخل إلى معسكره.
Verse 26
प्रविष्ट: स निशां तां च गमयामास पार्थिव: । प्रभातायां च शर्वर्या प्रातरुत्थाय तान् नृप:,भूपाल! वहाँ जाकर राजाने सुखसे रात बितायी और सबेरा होनेपर उसने प्रात:काल उठकर राजाओंको यह आज्ञा दी--'राजसिंहो! तुम सब लोग सेनाको युद्धके लिये तैयार करो, आज पितामह भीष्म रणभूमिमें कुपित होकर सोमकोंका संहार करेंगे”
قال سنجيا: لما دخل الملك إلى مقامه قضى تلك الليلة. فلما انقضت الظلمة وأقبل الفجر، نهض الحاكم باكرًا وأصدر أوامره إلى أولئك الملوك: «يا ملوكًا كالأُسود، هيّئوا الجيش للقتال. اليوم، سيُهلك الجدّ العظيم بهيشما—وقد استبدّ به الغضب في ساحة الوغى—قومَ السومَكَة.»
Verse 27
राज्ञ: समाज्ञापयत सेनां योजयतेति ह । अद्य भीष्मो रणे क्रुद्धों निहनिष्यति सोमकान्,भूपाल! वहाँ जाकर राजाने सुखसे रात बितायी और सबेरा होनेपर उसने प्रात:काल उठकर राजाओंको यह आज्ञा दी--'राजसिंहो! तुम सब लोग सेनाको युद्धके लिये तैयार करो, आज पितामह भीष्म रणभूमिमें कुपित होकर सोमकोंका संहार करेंगे”
قال سنجيا: «أصدر الملك الأمر: “صفّوا الجيش.” فاليوم، يا سيد الأرض، سيضرب بهيشما—وقد غضب في ساحة القتال—قومَ السومَكَة.»
Verse 28
दुर्योधनस्य तच्छुत्वा रात्रौ विलपितं बहु | मन्यमान: स तं राजन प्रत्यादेशमिवात्मन:,राजन! रातमें दुर्योधनके अनेक प्रकारके विलापको सुनकर भीष्मने यह समझ लिया कि अब दुर्योधन मुझे युद्धसे हटाना चाहता है
قال سنجيا: يا ملك، لما سمع بهيشما كثرة نواح دوريودانا في الليل، أدرك أن ذلك كأنه رفضٌ موجَّهٌ إليه هو—وأن دوريودانا، في الحقيقة، يسعى إلى أن ينسحب من القتال.
Verse 29
निर्वेद परमं गत्वा विनिन्द्य परवश्यताम् | दीर्घ दध्यौ शान्तनवो योद्धुकामोअ<र्जुनं रणे,इससे उनके मनमें बड़ा खेद हुआ। भीष्मने पराधीनताकी भूरि-भूरि निन््दा करके रणभूमिमें अर्जुनके साथ युद्ध करनेका संकल्प लेकर दीर्घकालतक विचार किया
قال سنجيا: إذ وقع في أعمق الندم، وبعد أن شجب بشدة حالَ الخضوع لسلطان غيره، لبث ابنُ شانتانو (بهِيشما) يتأمل طويلاً، وقد عزم أن يلاقي أرجونا قتالاً في ساحة المعركة.
Verse 30
इज्धितेन तु तउज्ञात्वा गाड़ेयेन विचिन्तितम् । दुर्योधनो महाराज दुःशासनमचोदयत्,महाराज! गंगानन्दन भीष्मने क्या सोचा है? इस बातको संकेतसे समझकर दुर्योधनने दुःशासनसे कहा--
قال سنجيا: أيها الملك العظيم، إذ أدرك دوريوذانا بإشارة خفية ما عقد عليه ابنُ الغانغا (بهِيشما) عزمه في قلبه، حثَّ دُحشاسَنا على أن يمضي إلى الفعل.
Verse 31
“दुःशासन! तुम शीघ्र ही भीष्मकी रक्षा करनेवाले रथोंको जोतकर तैयार कराओ। अपने पास कुल बाईस सेनाएँ हैं। उन सबको भीष्मकी रक्षामें ही नियुक्त कर दो
قال سنجيا: «يا دُحشاسَنا، أسرِعْ فأمِرْ بتهيئة العربات التي ستحمي بهِيشما، ولتُشدَّ إليها الخيل وتُعدَّ على عَجَل. إن لديك اثنتين وعشرين فرقة—فاجعلها جميعاً مكرَّسة لحماية بهِيشما وحده.»
Verse 32
इदं हि समनुप्राप्तं वर्षपूगाभिचिन्तितम् । पाण्डवानां ससैन्यानां वधो राज्यस्य चागम:,“आज वह अवसर प्राप्त हुआ है, जिसके लिये हम बहुत वर्षोंसे विचार करते आ रहे हैं। आज सेनासहित समस्त पाण्डवोंका वध तथा राज्यका लाभ होगा
قال سنجيا: «لقد حان حقاً ذلك الظرف الذي ظللنا نفكر فيه أعواماً طويلة: هلاكُ الباندافا مع جيوشهم، ونيلُ المُلك.»
Verse 33
तत्र कार्यतमं मन्ये भीष्मस्यैवाभिरक्षणम् | स नो गुप्त: सहाय: स्याद्धन्यात् पार्थाश्व संयुगे,“इस विषयमें मैं भीष्मकी रक्षाको ही अपना प्रधान कर्तव्य समझता हूँ। वे सुरक्षित रहनेपर हमारे सहायक होंगे और संग्रामभूमिमें कुन्तीकुमारोंका वध कर सकेंगे
قال سنجيا: «في هذا الأمر أرى أن أَولى الواجبات وأعظمها هو حماية بهِيشما وحده. فإذا أُبقي في مأمن كان لنا عوناً وسنداً، وسيقدر في ساحة القتال أن يصرع أبناءَ پْرِثا.»
Verse 34
अब्रवीद्धि विशुद्धात्मा नाहं हन्यां शिखण्डिनम् । स्त्रीपूर्वको हासौ राजंस्तस्माद् वर्ज्यों मया रणे,“विशुद्ध अन्तःकरणवाले महात्मा भीष्मने मुझसे कहा है कि “राजन! मैं शिखण्डीको नहीं मार सकता; क्योंकि वह पहले स्त्रीरूपमें उत्पन्न हुआ था और इसीलिये युद्धमें मुझे उसका परित्याग कर देना है
قال سانجيا: إنَّ بهيشما الطاهرَ النفس قال لي: «أيها الملك، لن أضرب شيكاندين. فقد وُلِدَ من قبلُ امرأةً؛ ولذلك يجب عليَّ في ساحة القتال أن أمتنع عن مواجهته».
Verse 35
लोकस्तद्ू वेद यदहं पितु: प्रियचिकीर्षया । राज्यं स्फीतं महाबाहो स्त्रियश्न त्यक्तवान् पुरा,“महाबाहो! सारा संसार यह जानता है कि मैंने पूर्वकालमें पिताका प्रिय करनेकी इच्छासे समृद्धिशाली राज्य तथा स्त्रियोंका परित्याग कर दिया था
قال سانجيا: «يا عظيمَ الساعد، إن العالم كلَّه يعلم هذا: لقد تخلّيتُ قديماً، رغبةً في إرضاء أبي، عن مملكةٍ مزدهرة، بل وعن النساء أيضاً.»
Verse 36
नैवं चाहं स्त्रियं जातु न स्त्रीपूर्व कथंचन । हन्यां युधि नरश्रेष्ठ सत्यमेतद् ब्रवीमि ते,“नरश्रेष्ठ! मैं कभी किसी स्त्रीको अथवा जो पहले स्त्री रहा हो, उस पुरुषको भी किसी प्रकार युद्धमें मार नहीं सकता; यह मैं तुमसे सत्य कहता हूँ
قال سانجيا: «يا خيرَ الرجال، لن أقتل امرأةً قطّ، ولا—في أي حالٍ كان—من كان امرأةً من قبل، حتى في خضمّ المعركة. أقول لك هذا صدقاً.»
Verse 37
अयं स्त्रीपूर्वको राजज्छिखण्डी यदि ते श्रुतः । उद्योगे कथितं यत्तत् तथा जाता शिखण्डिनी,“राजन! तुमने भी सुना होगा, यह शिखण्डी पहले स्त्रीरूपमें पैदा हुआ था। यह बात मैंने तुमसे युद्धकी तैयारीके समय बता दी थी। इस प्रकार कन्यारूपमें उत्पन्न हुई शिखण्डिनी पहले स्त्री होकर अब पुरुष हो गयी है। वह पुरुष बना हुआ शिखण्डी यदि मुझसे युद्ध करेगा तो मैं उसके ऊपर किसी प्रकार भी बाण नहीं चलाऊँगा
قال سانجيا: «أيها الملك، لا بد أنك سمعت أن هذا شيكاندين كان من قبلُ امرأة. وما كنتُ قد أخبرتك به زمن الاستعداد للحرب قد تحقق حقاً: شيكانديني، التي وُلِدت عذراء، قد صارت الآن شيكاندين في هيئة رجل.»
Verse 38
कन्या भूत्वा पुमाउ्जात: स च मां योधयिष्यति । तस्याहं प्रमुखे बाणान् न मुज्चेयं कथंचन,“राजन! तुमने भी सुना होगा, यह शिखण्डी पहले स्त्रीरूपमें पैदा हुआ था। यह बात मैंने तुमसे युद्धकी तैयारीके समय बता दी थी। इस प्रकार कन्यारूपमें उत्पन्न हुई शिखण्डिनी पहले स्त्री होकर अब पुरुष हो गयी है। वह पुरुष बना हुआ शिखण्डी यदि मुझसे युद्ध करेगा तो मैं उसके ऊपर किसी प्रकार भी बाण नहीं चलाऊँगा
قال سانجيا: «لقد وُلِدَ عذراء ثم صار رجلاً، وسيأتي ليقاتلني. ولكن حتى لو وقف أمامي مباشرةً فلن أُطلق عليه سهماً بأي حال.»
Verse 39
युद्धे हि क्षत्रियांस्तात पाण्डवानां जयैषिण: । सर्वानन्यान् हनिष्यामि सम्प्राप्तान् रणमूर्थनि,“तात! पाण्डवपक्षके दूसरे जो-जो विजयाभिलाषी क्षत्रिय युद्धके मुहानेपर मेरे सामने आयेंगे, उन सबका मैं वध करूँगा'
قال سنجيا: «في ساحة القتال، يا بُنيّ، سأقتل جميعَ أولئك الكشاتريا الآخرين الذين يبتغون النصر للپاندافا، إذا تقدموا إليّ في مقدّمة المعركة نفسها».
Verse 40
एवं मां भरतश्रेष्ठ गाड़ेय: प्राह शास्त्रवित् । तत्र सर्वात्मना मन्ये गाड्नेयस्यैव पालनम्,“भरतश्रेष्ठ दुःशासन! शास्त्रोंके ज्ञाता गंगानन्दन भीष्मने इस प्रकार मुझसे कहा है। अतः युद्धभूमिमें सब प्रकारसे भीष्मकी रक्षाको ही मैं अपना मुख्य कर्तव्य मानता हूँ
قال سنجيا: «يا أكرمَ آلِ بهاراتا، هكذا خاطبني غانغيَـا، العارفُ بالشاسترا. لذلك أرى أن واجبي الأسمى في ساحة الحرب هو أن أحمي غانغيَـا (بهِيشما) حمايةً تامّة بكل ما أملك».
Verse 41
अरक्ष्यमाणं हि वृको हन्यात् सिंहं महाहवे । मा वृकेणेव गाड़ेयं घातयेम शिखण्डिना,“यदि महायुद्धमें सिंहकी रक्षा नहीं की जाय तो उसे एक भेड़िया मार सकता है, परंतु हम भेड़ियेके सदूश शिखण्डीके हाथसे सिंहके समान भीष्मका वध नहीं होने देंगे
قال سنجيا: «في معركةٍ عظيمة، إذا تُرك الأسد بلا حماية، أمكن لذئبٍ أن يصرعه. لكننا لن نسمح أن يُقتل بهِيشما—الأسدُ في البأس—على يد شيخاندين الذي هو كالذئب».
Verse 42
मातुलः शकुनि: शल्य: कृपो द्रोणो विविंशति: । यत्ता रक्षन्तु गाड़ेयं तस्मिन् गुप्ते ध्रुवोी जय:,(अतः उनकी रक्षाके लिये सारी आवश्यक व्यवस्था करो।) मामा शकुनि, शल्य, कृपाचार्य, द्रोणाचार्य और विविंशति--ये सब लोग सावधान होकर गंगानन्दन भीष्मकी रक्षा करें। उनके सुरक्षित रहनेपर हमारी विजय निश्चित है”
قال سنجيا: «ليكن خالي شكوني، وشاليا، وكريپا، ودرونا، وفيفيمشتي على يقظةٍ تامة، وليحموا بهِيشما ابنَ الغانغا حمايةً راسخة. فإذا أُبقي في أمانٍ فالنصر لنا لا محالة».
Verse 43
एतच्छुत्वा तु ते सर्वे दुर्योधनवचस्तदा । सर्वतो रथवंशेन गाज़ेयं पर्यवारयन्,उस समय दुर्योधनकी यह बात सुनकर उन सब वीरोंने रथकी विशाल सेनाद्वारा गंगानन्दन भीष्मको सब ओरसे घेर लिया
قال سنجيا: «حينئذٍ، لما سمع أولئك الأبطال كلامَ دوريودhana، أحاطوا ببهِيشما ابنِ الغانغا من كل جانبٍ بكتلةٍ من العربات الحربية المصطفّة».
Verse 44
पुत्राश्न तव गाड़ेयं परिवार्य ययुर्मुदा । कम्पयन्तो भुवं द्यां च क्षोभयन्तश्न॒ पाण्डवान्,आपके सब पुत्र भी भीष्मको चारों ओरसे घेरकर प्रसन्नतापूर्वक चले। वे उस समय भूलोक और स्वर्ग-लोकको भी कँपाते हुए पाण्डवोंके मनमें क्षोभ उत्पन्न कर रहे थे
قال سنجيا: إن أبناءك، بعدما أحاطوا ببهِيشما إحاطةً محكمة من كل جانب، تقدّموا مبتهجين. وكانوا في مسيرهم كأنهم يُرجِفون الأرض والسماء معًا؛ وبهذا الاستعراض للقوة أثاروا الاضطراب في قلوب الباندافا.
Verse 45
ते रथै: सुसम्प्रयुक्तिर्दन्तिभिश्न महारथा: । परिवार्य रणे भीष्म॑ दंशिता: समवस्थिता:,वे समस्त कौरव महारथी सुशिक्षित रथों और हाथियोंसे भीष्मको घेरकर कवच आदिसे सुसज्जित हो युद्धके लिये खड़े हो गये
قال سنجيا: ثم إن أولئك المحاربين العظام، بعرباتٍ محكمة الربط وبفيلةٍ حربية، أحاطوا ببهِيشما في ساحة القتال. وقد لبسوا الدروع واكتمل عُدّتهم، فثبتوا في مواقعهم استعدادًا للمعركة.
Verse 46
यथा देवासुरे युद्धे त्रिदशा वजधारिणम् | सर्वे ते सम व्यतिष्ठन्त रक्षन्तस्तं महारथम्,जिस प्रकार देवासुर-संग्रामके समय देवताओंने वज्रधारी इन्द्रकी रक्षा की थी, उसी प्रकार वे सब कौरव योद्धा महारथी भीष्मकी रक्षा करने लगे
قال سنجيا: كما أنّه في حرب الآلهة مع الأسورا وقف «الثلاثون» صفًّا واحدًا لحماية إندرا حامل الصاعقة، كذلك وقف جميع محاربي الكورو في تشكيلٍ متقارب يحرسون ذلك المقاتل العظيم على العربة، بهِيشما.
Verse 47
ततो दुर्योधनो राजा पुनर्भ्रातरमब्रवीत् । सव्यं चक्र युधामन्युरुत्तमौजाश्न दक्षिणम्
ثم إن الملك دوريودھانا خاطب أخاه مرةً أخرى، فجعل يودهامانيو في الميسرة، وأوتّامَوجا في الميمنة، ورتّب قواته في تشكيلٍ منظم.
Verse 48
गोप्तारावर्जुनस्यैतावर्जुनोडपि शिखण्डिन: । रक्ष्यमाण: स पार्थेन तथास्माभिविंवर्जित:
قال سنجيا: «هذان الاثنان كانا حامِيَيْ أرجونا، وأرجونا بدوره كان حامي شيخاندين. وهكذا، وقد حُفِظَ ببارثا، تقدّم شيخاندين، بينما عجزنا نحن عن صده.»
Verse 49
यथा भीष्मं न नो हन्याद् दुःशासन तथा कुरु । तब राजा दुर्योधनने अपने भाईसे पुनः इस प्रकार कहा--“दुःशासन! अर्जुनके रथके बायें पहियेकी रक्षा युधामन्यु और दाहिने पहियेकी रक्षा उत्तमौजा करते हैं। इस प्रकार अर्जुनके ये दो रक्षक हैं और अर्जुन भी शिखण्डीकी रक्षा करते हैं। अर्जुनसे सुरक्षित और हमलोगोंसे उपेक्षित होकर शिखण्डी हमारे भीष्मको जिस प्रकार मार न सके, ऐसी व्यवस्था करो' || ४७-४८ ह ।। भ्रातुस्तद् वचन श्रुत्वा पुत्रो द:ःशासनस्तव
قال سانجايا: «يا دُحشاسَنَة، دبِّر الأمر بحيث لا يُقتَل بِهِيشْمَة على أيدينا. واحرص على أن شِخَنْدِين—المحفوظ بحماية أرجونا والمُهمَل من قواتنا—لا ينجح في إسقاط بِهِيشْمَة.»
Verse 50
भीष्म॑ प्रमुखत: कृत्वा प्रययौ सह सेनया । बड़े भाईकी यह बात सुनकर आपका पुत्र दुःशासन भीष्मको आगे करके सेनाके साथ युद्धके मैदानमें गया || ४९ ई ।। भीष्म तु रथवंशेन दृष्टवा समभिसंवृतम्
قال سانجايا: جعل بِهِيشْمَة في المقدّمة وتقدّم مع الجيش. أمّا بِهِيشْمَة، فلمّا رأى صفوف المركبات الحربية مصطفّةً بإحكام ومتراصّة، أخذ يقدّر هيئة الصفّ عند اقتراب التحام القتال—صورة لاندفاع الحرب تدفعه طاعة الأمر وثِقَلُ سُلطة الشيخ الجليل.
Verse 51
अर्जुनो रथिनां श्रेष्ठो धृष्टद्युम्नमुवाच ह । भीष्मको रथोंके समूहसे घिरा हुआ देख रथियोंमें श्रेष्ठ अर्जुनने धृष्टद्युम्नसे कहा - || ५० ह || शिखण्डिनं नरव्याप्र॑ भीष्मस्य प्रमुखे नूप । स्थापयस्वाद्य पाञज्चाल्य तस्य गोप्ताहमित्युत,“नरेश्वर! पांचालराजकुमारर! आज तुम पुरुषसिंह शिखण्डीको भीष्मके सामने उपस्थित करो। मैं उसकी रक्षा करूँगा”
قال سانجايا: لمّا رأى أرجونا—وهو أبرع فرسان المركبات—بِهِيشْمَة محاطًا بحشدٍ من المركبات، خاطب دِهْرِشْتَديُومْنَة قائلاً: «يا نمرَ الرجال، يا أميرَ بانچالا، قدِّم شِخَنْدِين اليوم مباشرةً أمام بِهِيشْمَة؛ فأنا كفيله وحاميه.» وفي تلك اللحظة اختار أرجونا ترتيبًا تكتيكيًا عن عمد، يستثمر نذر بِهِيشْمَة وكبحه الأخلاقي، ليضع حدًّا لمذبحةٍ مدمّرة مع البقاء ضمن أعراف ساحة القتال.
Verse 97
इस प्रकार श्रीमह्याभारत भीष्मपर्वके अन्तर्गत भीष्यवधपर्वमें भीष्मके प्रति दुर्योधनका वचनविषयक सत्तानबेवाँ अध्याय पूरा हुआ
وهكذا ينتهي الفصل السابع والتسعون من «بهيشما بارفا» في «شري مهابهاراتا»، ضمن القسم المتعلّق بسقوط بِهِيشْمَة (أو قتله)—وخاصة الفصل الذي يتناول كلمات دُريودَهَنَة الموجّهة إلى بِهِيشْمَة. ويؤكّد هذا الختام الرسمي توتّر الحرب الأخلاقي: مطالبةُ ملكٍ وتقريعه لشيخٍ مقيّدٍ بالواجب، فيما ساحة القتال تدفع نحو السقوط المقدّر لبِهِيشْمَة.
Verse 98
इति श्रीमहाभारते भीष्मपर्वणि भीष्मवधपर्वणि भीष्मदुर्योधनसंवादे अष्टनवतितमो<ध्याय:
وهكذا، في «شري مهابهاراتا»، ضمن «بهيشما بارفا»—وخاصة في القسم المتعلّق بسقوط بِهِيشْمَة—وفي سياق الحوار بين بِهِيشْمَة ودُريودَهَنَة، ينتهي الفصل التاسع والثمانون.
Verse 331
दुःशासन रथास्तूर्ण युज्यन्तां भीष्मरक्षिण: । द्वाविंशतिमनीकानि सर्वाण्येवाभिचोदय
قال سانجيا: «لْتُشَدَّ عرباتُ دُحشاسانا في الحال، تحت حمايةِ بِهِيشما. وحرِّكْ واستنهِضْ جميعَ فرقِ الجيش الاثنتين والعشرين كلَّها».
The chapter implies a tension between honoring an elder-commander as a moral symbol and treating him as a strategic instrument—protecting Bhīṣma is framed as both reverence (pitāmaha) and a calculated method to enable decisive harm to opponents.
Operational success depends on disciplined force allocation and realistic assessment of momentum: massed deployments and spectacle (noise, dust, speed) do not substitute for coordinated containment when facing organized resistance and counter-volley tactics.
No explicit phalaśruti is presented within this chapter’s verses; its significance is contextual, contributing to the epic’s cumulative reflection on leadership, escalation, and the moral ambiguity of protective warfare doctrines.