Duryodhana’s Post-Duel Lament and Instructions (भग्नसक्थस्य विलापः)
वैशम्पायनजीने कहा--भरतकुलभूषण नरेश! तुमने जो प्रश्न किया है, वह सर्वथा उचित है। तुम मुझसे जो कुछ पूछ रहे हो, वह सब मैं तुझे यथार्थरूपसे बताऊँगा ।। हतं दुर्योधन दृष्टवा भीमसेनेन संयुगे । व्युत्क्रम्य समयं राजन धार्तराष्ट्र महाबलम्,राजन्! भरतवंशी महाराज! धृतराष्ट्रपुत्र महाबली दुर्योधनको भीमसेनने युद्धमें उसके नियमका उल्लंघन करके मारा है। वह गदायुद्धके द्वारा मारा गया है। इन सब बातोंपर दृष्टिपात करके युधिष्ठिरके मनमें बड़ा भारी भय समा गया
vaiśampāyana uvāca—hataṃ duryodhanaṃ dṛṣṭvā bhīmasenena saṃyuge | vyutkramya samayaṃ rājan dhārtarāṣṭraṃ mahābalam ||
毗湿摩波耶那说道:“大王啊,见到持国之子、力大无比的难敌,被毗摩军在战场上击杀,而且还是违越了先前约定的交战规矩,尤提士提罗心中顿时生起了巨大的恐惧。”
वैशम्पायन उवाच