Kāma–Mamatā–Upadeśa
Discourse on Desire, Possessiveness, and Ritual Duty
अविनाशो<स्य सत्त्वस्य नियतो यदि भारत | भित्त्वा शरीरं भूतानामहिंसां प्रतिपद्यते,भरतनन्दन! यदि इस जगत्की सत्ताका विनाश न होना ही निश्चित हो, तब तो प्राणियोंके शरीरका भेदन करके भी मनुष्य अहिंसाका ही फल प्राप्त करेगा
avināśo 'sya sattvasya niyato yadi bhārata | bhittvā śarīraṃ bhūtānām ahiṃsāṃ pratipadyate ||
风神伐由说道:“婆罗多啊,若执定此世之本体必不可毁,那么依此推论,即便刺穿众生之身,人亦将获得阿希姆萨(不害)的果报。”
वायुदेव उवाच