Kāma–Mamatā–Upadeśa
Discourse on Desire, Possessiveness, and Ritual Duty
ब्रह्ममृत्यू ततो राजन्नात्मन्येव व्यवस्थितौ । अदृश्यमानौ भूतानि योधयेतामसंशयम्,राजन! इस प्रकार मृत्यु और अमृत दोनों अपने भीतर ही स्थित हैं। ये दोनों अदृश्य रहकर प्राणियोंको लड़ाते हैं अर्थात् किसीको अपना मानना और किसीको अपना न मानना यह भाव ही युद्धका कारण है, इसमें संशय नहीं है
brahmamṛtyū tato rājann ātmany eva vyavasthitau | adṛśyamānau bhūtāni yodhayetām asaṃśayam ||
风神伐由说道:“因此,国王啊,不死(近于梵的无死)与死亡,皆安立于自我之中。虽不可见,这二者却驱使众生陷入争斗——毫无疑问。内心将一些认作‘我之’,将另一些判作‘非我之’,正是纷争的种子。”
वायुदेव उवाच