Droṇa-parva Adhyāya 29 — Arjuna’s defeat of Vṛṣaka–Acalā and the neutralization of Śakuni’s māyā
वलीसंछज्ननयन: शूर: परमदुर्जय: । अक्ष्णोरुन्मीलनार्थाय बद्धपट्टो हासौ नृप:,तदनन्तर भगवान् श्रीकृष्णने गाण्डीवधारी अर्जुनसे कहा--“कुन्तीनन्दन! यह भगदत्त बहुत बड़ी अवस्थाका है। इसके सारे बाल पक गये हैं और ललाट आदि अंगोंमें झुर्रियाँ पड़ जानेके कारण पलकें झपी रहनेसे इसके नेत्र प्राय: बंद-से रहते हैं। यह शूरवीर तथा अत्यन्त दुर्जय है। इस राजाने अपने दोनों नेत्रोंको खुले रखनेके लिये पलकोंको कपड़ेकी पट्टीसे ललाटमें बाँध रखा है”
sañjaya uvāca |
valīsaṃchanna-nayanaḥ śūraḥ paramadurjayaḥ |
akṣṇor unmīlanārthāya baddha-paṭṭo ha sa nṛpaḥ ||
ముడతలతో కప్పబడిన నేత్రాలుగల ఆ రాజు శూరుడు, అత్యంత దుర్జయుడు; తన కళ్లను తెరిచి ఉంచుటకై నుదుటిపై వస్త్రపట్టీని బిగించి కట్టుకున్నాడు.
संजय उवाच