Kṛṣṇa-vīrya-kathana
Dhṛtarāṣṭra’s appraisal of Vāsudeva’s deeds
यदा55याज्जलदप्रख्यो रथ: परमवीर्यवान् । पर्जन्य इव बीभत्सुस्तुमुलामशनीं सृूजन्,सम्प्लावयन् दिश: सर्वा मानवैरास्तरन् महीम् । जो मेघके समान श्यामवर्णवाले परम पराक्रमी महारथी अर्जुन विद्युत॒की उत्पत्ति करते हुए बादलोंके समान भयंकर वच्ञास्त्रका प्रयोग करते हैं, जो जलकी वर्षा करनेवाले इन्द्रके समान बाणसमूहोंकी वृष्टि करते हैं तथा जो अपने धनुषकी टंकार और रथके पहियेकी घरघराहटसे सम्पूर्ण दिशाओंको शब्दायमान कर देते हैं, वे स्वयं भयंकर मेघस्वरूप जान पड़ते हैं। धनुष ही उनके समीप विद्युत्प्रभाके समान प्रकाशित होता है। रथियोंकी सेना उनकी फैली हुई घटाएँ जान पड़ती हैं। रथके पहियोंकी घरघराहट मेघ-गर्जनाके समान प्रतीत होती है। उनके बाणोंकी सनसनाहट वर्षके शब्दकी भाँति अत्यन्त मनोहर लगती है। क्रोधरूपी वायु उन्हें आगे बढ़नेकी प्रेरणा देती है। वे मनोरथकी भाँति शीघ्रगामी और विपक्षियोंके मर्मस्थलोंको विदीर्ण कर डालनेवाले हैं। बाण धारण करके वे बड़े भयानक प्रतीत होते और रक्तरूपी जलसे सम्पूर्ण दिशाओंको आप्लावित करते हुए मनुष्योंकी लाशोंसे धरतीको पाट देते हैं
vaiśampāyana uvāca |
yadāyāj jaladaprakhyo rathaḥ paramavīryavān |
parjanya iva bībhatsus tumulām aśanīṃ sṛjan |
samplāvayan diśaḥ sarvā mānavair āstaran mahīm ||
वैशम्पायन उवाच—यदा जलदप्रख्यो रथः परमवीर्यवान् प्रववृते, तदा बीभत्सुः पर्जन्य इव तुमुलामशनीं सृजन् दिशः सर्वाः सम्प्लावयामास, महीञ्च मानवैरास्तरयामास। स मेघ इव घोरः, चापविद्युत्प्रभया दीप्तः; रथिनां बलं तस्य विस्तीर्णा घटा इव; नेमिघोषो मेघस्तनितसदृशः; शराणां सनसनाहो वर्षाशब्द इव मनोहरः। रोषरूपी वायुना प्रेरितः स मनोभिप्रायशीघ्रगः, विपक्षिणां मर्माणि विदारयन्, शोणितोदकेन दिशः सर्वाः आप्लावयन्, नरशवैरिव वसुधां पाटयामास।
वैशम्पायन उवाच
The verse highlights how martial power, even when exercised within a dharma-framed war, carries immense and sobering consequences: a hero’s prowess can become as indiscriminate and overwhelming as a natural catastrophe, reminding the listener that victory is inseparable from human loss.
As the battle intensifies in Droṇa Parva, Arjuna is depicted charging forward on his mighty chariot and releasing devastating volleys—likened to thunder and rain—so that the battlefield seems flooded in every direction and the ground is covered with the fallen.