भीष्म–जामदग्न्यसंवादः (Amba-prasaṅga and Kurukṣetra Dvandva Declaration) / Bhishma–Jamadagnya Dialogue
शपेयं त्वां न चेदेवमागच्छेथा विशाम्पते । युध्यस्व त्वं रणे यत्तो धैर्यमालम्ब्य कौरव,प्रजानाथ! यदि तुम इस प्रकार मेरे समीप नहीं आते तो मैं तुम्हें शाप दे देता। कुरुनन्दन! तुम धैर्य धारण करके इस रफक्षेत्रमें प्रयत्नपूर्वक युद्ध करो
śapeyaṃ tvāṃ na ced evam āgacchethā viśāmpate | yudhyasva tvaṃ raṇe yatto dhairyam ālambya kaurava ||
ହେ ପ୍ରଜାନାଥ! ତୁମେ ଏହିପରି ଭାବେ ମୋ ନିକଟକୁ ନ ଆସିଥାନ୍ତ, ମୁଁ ତୁମକୁ ଶାପ ଦେଇଥାନ୍ତି। ତେଣୁ, ହେ କୌରବ! ଧୈର୍ୟ ଧରି ଏହି ରଣରେ ପ୍ରୟତ୍ନପୂର୍ବକ ଯୁଦ୍ଧ କର।
राम उवाच