भीष्म–जामदग्न्यसंवादः (Amba-prasaṅga and Kurukṣetra Dvandva Declaration) / Bhishma–Jamadagnya Dialogue
न तु ते जयमाशासे त्वां विजेतुमहं स्थित: । गच्छ युध्यस्व धर्मेण प्रीतो5स्मि चरितेन ते,मैं तो तुम्हें विजयसूचक आशीर्वाद नहीं दे सकता; क्योंकि इस समय मैं तुम्हें पराजित करनेके लिये खड़ा हूँ। जाओ, धर्मपूर्वक युद्ध करो। तुम्हारे इस शिष्टाचारसे मैं बहुत प्रसन्न हूँ
କିନ୍ତୁ ମୁଁ ତୁମକୁ ବିଜୟର ଆଶୀର୍ବାଦ ଦେଇପାରିବି ନାହିଁ; କାରଣ ଏହି ସମୟରେ ମୁଁ ତୁମକୁ ପରାଜିତ କରିବାକୁ ଦଣ୍ଡାୟମାନ। ଯାଅ, ଧର୍ମପୂର୍ବକ ଯୁଦ୍ଧ କର; ତୁମର ଏହି ଶିଷ୍ଟାଚାରରେ ମୁଁ ପ୍ରସନ୍ନ।
राम उवाच