जना ऊचुः काशिराजसुतेनेयम् आराध्य वृषभध्वजम् उत्पादिता महाकृत्या वधाय तव चक्रिणः जहि कृत्याम् इमाम् उग्रां वह्निज्वालाजटाकुलाम् //
ଏହି ଶ୍ଲୋକର ମୂଳ ସଂସ୍କୃତ ପାଠ ଦିଆଯାଇନାହିଁ; କେବଳ ‘35’ ସଂଖ୍ୟା ଅଛି। ପାଠ ଦିଲେ ଅନୁବାଦ କରାଯିବ।