Adhyaya 163
Adi ParvaAdhyaya 16329 Verses

Adhyaya 163

Saṃvaraṇa–Tapatī Vivāhaḥ (The Marriage of Saṃvaraṇa and Tapatī) — Mahābhārata, Ādi Parva 163

Upa-parva: Vaṁśānucarita / Kuru-vaṁśa-prasaṅga (Genealogical and dynastic episode: Saṃvaraṇa–Tapatī narrative)

Vasiṣṭha petitions Savitṛ (the solar deity) for Tapatī’s hand on behalf of King Saṃvaraṇa, presenting the king’s suitability in reputation and dharma-oriented understanding. Savitṛ assents, praises the match, and formally entrusts Tapatī to Vasiṣṭha, who brings her to Saṃvaraṇa. The king, moved by desire and joy upon seeing Tapatī, completes a period of austerity; through tapas and Vasiṣṭha’s spiritual authority he obtains her as wife. The marriage is performed according to proper rite on a mountain frequented by divine beings. Saṃvaraṇa then remains with Tapatī for twelve years in secluded enjoyment, during which the capital and realm suffer drought and deprivation. Observing the crisis, Vasiṣṭha retrieves the king and returns him to the city; rains resume and the realm recovers. Saṃvaraṇa later performs extended rites with Tapatī, and the narrative culminates in the birth of Kuru—providing an etiological link for the Kaurava identity and Arjuna’s epithet tied to that lineage.

Chapter Arc: एक ब्राह्मण-परिवार की रक्षा के लिए भीमसेन स्वयं भोजन-सामग्री लेकर बकासुर के पास जाने का निश्चय करता है—और मार्ग में ही यह स्पष्ट हो जाता है कि आज ‘कर’ नहीं, ‘कर्तव्य’ चुकाया जाएगा। → युधिष्ठिर की चिंता और सावधानी—कि नगरवासी न जानें, ब्राह्मण को यत्नपूर्वक आश्वस्त रखा जाए—के बीच भीम निर्भय होकर राक्षस के हिस्से का अन्न स्वयं खा लेता है और उसे पुकारकर चुनौती देता है। यह अपमान बकासुर के क्रोध को भड़काता है और वह युद्ध के लिए दौड़ पड़ता है। → भयंकर गर्जना करता नरभक्षी बकासुर भीम पर झपटता है; दोनों महाबली एक-दूसरे को घसीटते, खींचते, भिड़ते हैं। अंततः भीम घुटने से पीठ दबाकर राक्षस की कमर तोड़ देता है—टूटते शरीर से मुख से रक्त फूट पड़ता है और बकासुर का अंत निश्चित हो जाता है। → बकासुर का वध हो जाता है; ब्राह्मण-परिवार और एकचक्रा नगर भय-मुक्त होते हैं। पाण्डवों की गुप्त पहचान सुरक्षित रहते हुए भी उनका धर्म-रक्षण प्रकट हो उठता है। → नगर में फैले इस परिवर्तन का प्रभाव—और पाण्डवों के ‘अज्ञात’ रहते हुए भी उनके यश का फैलना—आगे की घटनाओं के लिए भूमि तैयार करता है।

Shlokas

Verse 1

अड-४#-रू- द्विषष्ट्याधिकशततमो< ध्याय: भीमसेनका भोजन-सामग्री लेकर बकासुरके पास जाना और स्वयं भोजन करना तथा युद्ध करके उसे मार गिराना युधिछिर उवाच उपपन्नमिदं मातस्त्वया यद्‌ बुद्धिपूर्वकम्‌ । आर्तस्य ब्राह्मणस्यैतदनुक्रोशादिदं कृतम्‌,युधिष्ठिर बोले--माँ! आपने समझ-बूझकर जो कुछ निश्चय किया है, वह सब उचित है। आपने संकटमें पड़े हुए ब्राह्मणपर दया करके ही ऐसा विचार किया है

ຢຸທິສຖິຣະ ກ່າວວ່າ: “ແມ່ເອີຍ, ສິ່ງທີ່ແມ່ໄດ້ຕັດສິນໃຈດ້ວຍການໄຕ່ຕອງຢ່າງຮອບຄອບນັ້ນ ຖືກຕ້ອງແລະເໝາະສົມທັງປວງ. ນີ້ເຮັດຂຶ້ນດ້ວຍເມດຕາກະລຸນາຕໍ່ພຣາຫມັນຜູ້ຕົກທຸກ.”

Verse 2

ध्रुवमेष्यति भीमो5यं निहत्य पुरुषादकम्‌ | सर्वथा ब्राह्मणस्यार्थे यदनुक्रोशवत्यसि,निश्चय ही भीमसेन उस राक्षसको मारकर लौट आयेंगे; क्योंकि आप सर्वथा ब्राह्मणकी रक्षाके लिये ही उसपर इतनी दयालु हुई हैं

ຢຸທິສຖິຣະ ກ່າວວ່າ: “ແນ່ນອນ ພີມະຜູ້ນີ້ຈະກັບຄືນມາ ຫຼັງຈາກສັງຫານຍັກຜີກິນຄົນນັ້ນ. ເພາະຄວາມເມດຕາກະລຸນາຂອງແມ່ ມຸ່ງໄປທີ່ປະໂຫຍດ ແລະ ການຄຸ້ມຄອງປົກປ້ອງພຣາຫມັນໂດຍສິ້ນເຊີງ.”

Verse 3

यथा व्विदं न विन्देयुर्नरा नगरवासिन: । तथायं ब्राह्मणो वाच्य: परिग्राह्श्च यत्नत:,आपको यत्नपूर्वक ब्राह्मणपर अनुग्रह तो करना ही चाहिये; किंतु ब्राह्मगणसे यह कह देना चाहिये कि वे इस प्रकार मौन रहें कि नगरनिवासियोंको यह बात मालूम न होने पाये

ຢຸທິສຖິຣະ ກ່າວວ່າ: “ຈົ່ງຈັດການໃຫ້ຊາວເມືອງບໍ່ຮູ້ເລື່ອງນີ້. ແຕ່ພຣາຫມັນຜູ້ນີ້ຕ້ອງໄດ້ຮັບການເວົ້າຈາດ້ວຍຄວາມລະມັດລະວັງ ແລະ ຕ້ອງຖືກຮັບເຂົ້າອຸປະຖຳດ້ວຍຄວາມພາກພຽນ.” ນັຍທາງທຳມະຄື ຄວາມຮອບຄອບປິດບັງຄວບຄູ່ກັບໜ້າທີ່: ຮັກສາລະບຽບສັງຄົມ ແລະ ຄວາມສະຫງົບຂອງສາທາລະນະ, ແຕ່ຍັງຄົງມອບກຽດ ແລະ ການຊ່ວຍເຫຼືອອັນຄວນແກ່ພຣາຫມັນ.

Verse 4

वैशम्पायन उवाच (युधिष्ठिरेण सम्मन्त्रय ब्राह्मुणार्थमरिंदम । कुन्ती प्रविश्य तान्‌ सर्वान्‌ सान्त्ववयामास भारत ।।) ततो रात्र्यां व्यतीतायामन्नमादाय पाण्डव: । भीमसेनो ययौ तत्र यत्रासौ पुरुषादक:ः,वैशम्पायनजी कहते हैं--जनमेजय! ब्राह्मण (की रक्षा)-के निमित्त युधिष्ठिरसे इस प्रकार सलाह करके कुन्तीदेवीने भीतर जाकर समस्त ब्राह्मण-परिवारको सान्त्वना दी। तदनन्तर रात बीतनेपर पाण्डुनन्दन भीमसेन भोजनसामग्री लेकर उस स्थानपर गये, जहाँ वह नरभक्षी राक्षस रहता था। बक राक्षसके वनमें पहुँचकर महाबली पाण्डुकुमार भीमसेन उसके लिये लाये हुए अन्नको स्वयं खाते हुए राक्षसका नाम ले-लेकर उसे पुकारने लगे

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: “ໂອ ພາຣະຕະ (ຈະນະເມຊະຍະ), ຫຼັງຈາກປຶກສາກັບ ຢຸທິສຖິຣະ ເພື່ອປົກປ້ອງພວກພຣາຫມັນ, ກຸນຕີ ໄດ້ເຂົ້າໄປຂ້າງໃນ ແລະ ປອບໃຈຄອບຄົວພຣາຫມັນທັງໝົດ. ແລ້ວເມື່ອຄືນຜ່ານໄປ, ພານດະວະ ພີມະເສນະ ໄດ້ນຳເສບຽງອາຫານໄປ ຍັງສະຖານທີ່ທີ່ຍັກຜີກິນຄົນນັ້ນອາໄສ.” ຂໍ້ຄວາມນີ້ເນັ້ນການຕອບສະໜອງຕາມທຳມະຕໍ່ວິກິດ: ການໄຕ່ຕອງປຶກສາ, ຄວາມເມດຕາຕໍ່ຜູ້ອ່ອນໄຫວ, ແລະ ການກະທຳອັນກ້າຫານເພື່ອກຳຈັດພະຍັນຕະລາຍອອກຈາກຊຸມຊົນ.

Verse 5

आसाद्य तु वनं तस्य रक्षस: पाण्डवो बली । आजुहाव ततो नाम्ना तदन्नमुपपादयन्‌,वैशम्पायनजी कहते हैं--जनमेजय! ब्राह्मण (की रक्षा)-के निमित्त युधिष्ठिरसे इस प्रकार सलाह करके कुन्तीदेवीने भीतर जाकर समस्त ब्राह्मण-परिवारको सान्त्वना दी। तदनन्तर रात बीतनेपर पाण्डुनन्दन भीमसेन भोजनसामग्री लेकर उस स्थानपर गये, जहाँ वह नरभक्षी राक्षस रहता था। बक राक्षसके वनमें पहुँचकर महाबली पाण्डुकुमार भीमसेन उसके लिये लाये हुए अन्नको स्वयं खाते हुए राक्षसका नाम ले-लेकर उसे पुकारने लगे

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ເມື່ອພີມະ ປານດະວະຜູ້ມີກຳລັງຍິ່ງ ໄປຮອດປ່າຂອງຣາກສະນັ້ນ ລາວໄດ້ເອີ້ນຊື່ມັນດັງໆ ໃນຂະນະຈັດອາຫານ—ແມ່ນກະທັ້ງກິນເສບຽງນັ້ນເອງ—ເພື່ອລໍ້ໃຫ້ອະສູຣກິນຄົນອອກມາ. ຕອນນີ້ຊີ້ໃຫ້ເຫັນການຍອມເສຍສະຫຼະຕົນເອງເພື່ອປົກປ້ອງຜູ້ອ່ອນແອ.

Verse 6

ततः स राक्षस: क्रुद्धो भीमस्य वचनात्‌ तदा | आजगाम सुसंक्रुद्धो यत्र भीमो व्यवस्थित:,भीमके इस प्रकार पुकारनेसे वह राक्षस कुपित हो उठा और अत्यन्त क्रोधमें भरकर जहाँ भीमसेन बैठकर भोजन कर रहे थे, वहाँ आया

ແລ້ວຣາກສະນັ້ນ ຖືກຄຳເອີ້ນຂອງພີມະກະຕຸ້ນໃຫ້ໂກດ. ດ້ວຍຄວາມໂກດຮ້ອນຮົ່ມ ມັນໄດ້ມາຮອດບ່ອນທີ່ພີມະນັ່ງຢູ່—ກຳລັງກິນອາຫານ—ພ້ອມຈະປະຈັນໜ້າ.

Verse 7

महाकायो महावेगो दारयन्निव मेदिनीम्‌ | लोहिताक्ष: करालश्न लोहितश्मश्रुमूर्थज:,उसका शरीर बहुत बड़ा था। वह इतने महान्‌ वेगसे चलता था, मानो पृथ्वीको विदीर्ण कर देगा। उसकी आँखें रोषसे लाल हो रही थीं। आकृति बड़ी विकराल जान पड़ती थी। उसके दाढ़ी, मूँछ और सिरके बाल लाल रंगके थे

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ມັນມີຮ່າງກາຍໃຫຍ່ມະຫຶມາ ແລະເຄື່ອນໄຫວໄວຢ່າງຫາທຽບບໍ່ໄດ້ ດັ່ງຈະຜ່າແຜ່ນດິນໃຫ້ແຕກ. ດວງຕາແດງກ່ຳດ້ວຍໂທສະ; ຮູບພັນສັນຖານນ່າຫວາດຫວັນ. ໜວດ, ເຄົາ, ແລະຜົມຫົວລ້ວນແດງ—ເປັນເຄື່ອງໝາຍແຫ່ງຄວາມດຸຮ້າຍປ່າເຖື່ອນ.

Verse 8

आकर्णाद्‌ भिन्नवक्त्रश्न शड्कुर्णो बिभीषण: । त्रिशिखां भ्रुकुटिं कृत्वा संदश्य दशनच्छदम्‌,मुँहका फैलाव कानोंके समीपतक था, कान भी शंकुके समान लंबे और नुकीले थे। बड़ा भयानक था वह राक्षस। उसने भौंहें ऐसी टेढ़ी कर रखी थीं कि वहाँ तीन रेखाएँ उभड़ आयी थीं और वह दाँतोंसे ओठ चबा रहा था

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ປາກຂອງມັນກວ້າງຮາວກັບຖືກຜ່າໄປຮອດໃກ້ຫູ; ຫູຍາວແຫຼມ ຄ້າຍຮູບກອນ. ມັນນ່າສະພຶງກົວຢ່າງຍິ່ງ. ມັນຂມວດຄິ້ວຢ່າງດຸດັນ ຈົນເກີດສັນສາມສາຍ ແລະກັດຂົມປາກຂອງຕົນດ້ວຍແຂ້ວ—ເປັນເຄື່ອງບອກຄວາມປາຖະໜາຮຸນແຮງ ແລະຄວາມປັ່ນປ່ວນໃນໃຈ.

Verse 9

भुज्जानमन्नं तं दृष्टवा भीमसेनं स राक्षस: । विवृत्य नयने क्रुद्ध इंदं वचनमत्रवीत्‌,भीमसेनको वह अन्न खाते देख राक्षसका क्रोध बहुत बढ़ गया और उसने आँखें तरेरकर कहा--

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ເມື່ອເຫັນພີມເສນກຳລັງກິນອາຫານ ຣາກສະນັ້ນຍິ່ງໂກດຫນັກ. ມັນເບິ່ງຕາກວ້າງດ້ວຍໂທສະ ແລະເວົ້າຄຳນີ້ອອກມາ.

Verse 10

को<यमन्नमिदं भुद्धतक्ते मदर्थमुपकल्पितम्‌ । पश्यतो मम दुर्बुद्धिर्यियासुर्यमसादनम्‌,“यमलोकमें जानेकी इच्छा रखनेवाला यह कौन दुर्बुद्धि मनुष्य है, जो मेरी आँखोंके सामने मेरे ही लिये तैयार करके लाये हुए इस अन्नको स्वयं खा रहा है?”

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ຜູ້ໂງ່ຄົນໃດນີ້ ປາດຖະໜາຈະໄປສູ່ໂລກຂອງຍະມະ? ຕໍ່ໜ້າຕາຂ້າເອງ ມັນກິນອາຫານທີ່ຈັດໄວ້ເພື່ອຂ້າ!»

Verse 11

भीमसेनस्तत: श्रुत्वा प्रहसन्निव भारत । राक्षसं तमनादृत्य भुड्क्त एव पराड्मुख:,भारत! उसकी बात सुनकर भीमसेन मानो जोर-जोरसे हँसने लगे और उस राक्षसकी अवहेलना करते हुए मुँह फेरकर खाते ही रह गये

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ເມື່ອບີມະເສນະໄດ້ຍິນຄໍານັ້ນ ລາວຮາວກັບຫົວເຮາະດັງ. ບໍ່ໃສ່ໃຈຣາກສະນັ້ນ ລາວຫັນໜ້າອອກ ແລະກິນຕໍ່ໄປບໍ່ຢຸດ.

Verse 12

रवं स भैरवं कृत्वा समुद्यम्य करावुभौ । अभ्यद्रवद्‌ भीमसेनं जिघांसु: पुरुषादक:,अब तो वह नरभक्षी राक्षस भीमसेनको मार डालनेकी इच्छासे भयंकर गर्जना करता हुआ दोनों हाथ ऊपर उठाकर उनकी ओर दौड़ा

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ຣາກສະກິນຄົນນັ້ນ ຮ້ອງຄໍາຮາມອັນນ່າສະພຶງກົວ ຍົກມືທັງສອງຂຶ້ນສູງ ແລ້ວພຸ້ນເຂົ້າໃສ່ບີມະເສນະ ດ້ວຍໃຈຈະຂ້າ.

Verse 13

तथापि परिभूयैन प्रेक्षमाणो वृकोदर: । राक्षसं भुझुक्त एवान्नं पाण्डव: परवीरहा,तो भी शत्रुवीरोंका संहार करनेवाले पाण्डुनन्दन भीमसेन उस राक्षसकी ओर देखते हुए उसका तिरस्कार करके उस अन्नको खाते ही रहे। तब उसने अत्यन्त अमर्षमें भरकर कुन्तीनन्दन भीमसेनके पीछे खड़े हो अपने दोनों हाथोंसे उनकी पीठपर प्रहार किया

ແມ່ນແຕ່ຢ່າງນັ້ນ ວຶກໂກດະຣະ (ບີມະ) ຈ້ອງເບິ່ງຣາກສະນັ້ນຕົງໆ ແລະດູໝິ່ນມັນ ພ້ອມກັບກິນອາຫານຕໍ່ໄປ. ປານດະວະ—ຜູ້ປະຫານວີຣະຊົນຂອງສັດຕູ—ບໍ່ຢຸດ; ດ້ວຍຄວາມສະຫງົບ ລາວສະແດງຄວາມບໍ່ຢ້ານ ແລະບໍ່ຍອມໃຫ້ຖືກຍຸຍົງໃຫ້ຫຸນຫັນ.

Verse 14

अमर्षेण तु सम्पूर्ण: कुन्तीपुत्रं वृकोदरम्‌ जघान पृष्ठे पाणिभ्यामुभाभ्यां पृष्ठत: स्थित:,तो भी शत्रुवीरोंका संहार करनेवाले पाण्डुनन्दन भीमसेन उस राक्षसकी ओर देखते हुए उसका तिरस्कार करके उस अन्नको खाते ही रहे। तब उसने अत्यन्त अमर्षमें भरकर कुन्तीनन्दन भीमसेनके पीछे खड़े हो अपने दोनों हाथोंसे उनकी पीठपर प्रहार किया

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ຣາກສະນັ້ນເຕັມໄປດ້ວຍຄວາມໂກດ ຢືນຢູ່ຂ້າງຫຼັງ ແລ້ວຕີຫຼັງຂອງລູກຊາຍຂອງກຸນຕີ ວຶກໂກດະຣະ (ບີມະ) ດ້ວຍມືທັງສອງ. ແຕ່ບີມະເສນະ—ຜູ້ທໍາລາຍວີຣະຊົນຂອງສັດຕູ ແລະເປັນລູກຂອງປານດຸ—ຈ້ອງເບິ່ງຣາກສະນັ້ນດ້ວຍຄວາມດູໝິ່ນ ແລະກິນອາຫານນັ້ນຕໍ່ໄປ. ຕໍ່ມາ ຣາກສະນັ້ນໂກດຫນັກຂຶ້ນ ຢືນຢູ່ຂ້າງຫຼັງບີມະ ແລະຕີຫຼັງລາວອີກຄັ້ງດ້ວຍມືທັງສອງ.

Verse 15

तथा बलवता भीम: पाणिशभ्यां भूशमाहतः । नैवावलोकयामास राक्षसं भुड्क्त एव सः,इस प्रकार बलवान राक्षसके दोनों हाथोंसे भयानक चोट खाकर भी भीमसेनने उसकी ओर देखातक नहीं, वे भोजन करनेमें ही संलग्न रहे

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ແມ່ນແຕ່ພີມະ ຜູ້ມີກໍາລັງຍິ່ງໃຫຍ່ ຖືກຣາກສະສາຕີຢ່າງແຮງດ້ວຍມືທັງສອງ ກໍບໍ່ແມ່ນແຕ່ຫັນໄປເບິ່ງອະສູນນັ້ນ; ລາວຍັງຄົງຈົ່ມຢູ່ໃນການກິນອາຫານ.

Verse 16

ततः स भूय: संक्रुद्धो वृक्षमादाय राक्षस: । ताडयिष्यंस्तदा भीम॑ पुनरभ्यद्रवद्‌ बली,तब उस बलवान राक्षसने पुनः अत्यन्त कुपित हो एक वृक्ष उखाड़कर भीमसेनको मारनेके लिये फिर उनपर धावा किया

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ແລ້ວຣາກສະສານັ້ນ ເກີດໂກດແຄ້ນຂຶ້ນອີກ ຖອນຕົ້ນໄມ້ອອກຈາກດິນ ແລະດ້ວຍໃຈຈະຟາດພີມະ ກໍພຸ້ນເຂົ້າຫາລາວອີກຄັ້ງດ້ວຍແຮງກ້າ.

Verse 17

ततो भीम: शनैर्भुक्त्वा तदन्नं पुरुषर्षभ: । वार्युपस्पृश्य संहृष्टस्तस्थी युधि महाबल:,तदनन्तर नरश्रेष्ठ महाबली भीमसेनने धीरे-धीरे वह सब अन्न खाकर, आचमन करके मुँह-हाथ धो लिये, फिर वे अत्यन्त प्रसन्न हो युद्धके लिये डट गये

ຕໍ່ມາ ພີມະ ຜູ້ເປັນຍອດຊາຍໃນຫມູ່ມະນຸດ ກໍກິນອາຫານນັ້ນຢ່າງຊ້າໆຈົນໝົດ. ແລ້ວລາວໄດ້ຈິບນ້ໍາເພື່ອຊໍາລະຕາມພິທີ (ອາຈະມະນະ) ແລະດ້ວຍໃຈຊື່ນບານຢ່າງຍິ່ງ ຜູ້ມີແຮງກ້ານັ້ນກໍຢືນຫມັ້ນໃນສົງຄາມ ພ້ອມສູ້ຮົບ.

Verse 18

क्षिप्तं क्रुद्धेन त॑ वृक्ष॑ प्रतिजग्राह वीर्यवान्‌ । सव्येन पाणिना भीम: प्रहसन्निव भारत,जनमेजय! कुपित राक्षसके द्वारा चलाये हुए उस वृक्षको पराक्रमी भीमसेनने बायें हाथसे हँसते हुए-से पकड़ लिया

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ຕົ້ນໄມ້ທີ່ຖືກຂວ້າງມາໂດຍຣາກສະສາຜູ້ໂກດນັ້ນ ພີມະຜູ້ກ້າຫານກໍຮັບໄວ້. ໂອ ຈະນະເມຈະຍະ ຜູ້ສືບສາຍພາຣະຕະ—ລາວຈັບມັນດ້ວຍມືຊ້າຍ ດັ່ງກັບກໍາລັງຫົວເຮາະ.

Verse 19

ततः स पुनरुद्यम्य वृक्षान्‌ बहुविधान्‌ बली । प्राहिणोद्‌ भीमसेनाय तस्मै भीमश्न पाण्डव:,तब उस बलवान्‌ निशाचरने पुनः बहुत-से वृक्षोंको उखाड़ा और भीमसेनपर चला दिया। पाण्डुनन्दन भीमने भी उसपर अनेक वृक्षोंद्वारा प्रहार किया

ແລ້ວຜູ້ທ່ອງຄືນຜູ້ມີແຮງກ້ານັ້ນ ຖອນຕົ້ນໄມ້ຫຼາຍຊະນິດຂຶ້ນອີກ ແລະຂວ້າງໃສ່ພີມເສນະ. ແຕ່ພີມະ ບຸດແຫ່ງປານດຸ ຜູ້ລືຊາວ່າເປັນຜູ້ກືນກິນສັດຕູ ກໍຟາດຕອບກັບໃສ່ມັນດ້ວຍຕົ້ນໄມ້ຫຼາຍຕົ້ນເຊັ່ນກັນ.

Verse 20

तद्‌ वृक्षयुद्धम भवन्महीरुहविनाशनम्‌ । घोररूपं महाराज नरराक्षसराजयो:,महाराज! नरराज तथा राक्षसराजका वह भयंकर वृक्षयुद्ध उस वनके समस्त वृक्षोंके विनाशका कारण बन गया

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ການຮົບດ້ວຍຕົ້ນໄມ້ນັ້ນ ກາຍເປັນການທໍາລາຍຕົ້ນໄມ້ໃຫຍ່ໆໃນປ່າ. ໂອ ພະມະຫາກະສັດ, ນັ້ນແມ່ນການປະທະອັນນ່າຢ້ານກົວ ລະຫວ່າງກະສັດມະນຸດ ແລະ ກະສັດຣາກສະ—ຮຸນແຮງຈົນປ່າໄມ້ເອງກໍກາຍເປັນເຫຍື່ອ.

Verse 21

नाम विश्राव्य तु बकः समभिद्रुत्य पाण्डवम्‌ । भुजाभ्यां परिजग्राह भीमसेनं महाबलम्‌,तदनन्तर बकासुरने अपना नाम सुनाकर महाबली पाण्डुनन्दन भीमसेनकी ओर दौड़कर दोनों बाँहोंसे उन्हें पकड़ लिया

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ບະກະ ໄດ້ເອີ້ນຊື່ຂອງຕົນໃຫ້ຮູ້ກ່ອນ ແລ້ວພຸ່ງເຂົ້າໃສ່ປານດະວະ; ດ້ວຍແຂນທັງສອງ ມັນກໍກອດຈັບພີມເສນະ ຜູ້ມີກໍາລັງຍິ່ງໃຫຍ່.

Verse 22

भीमसेनो<डपि तद्‌ रक्ष: परिरभ्य महाभुज: । विस्फुरन्तं महाबाहुं विचकर्ष बलादू बली,महाबाहु बलवान्‌ भीमसेनने भी उस विशाल भुजाओंवाले राक्षसको दोनों भुजाओंसे कसकर छातीसे लगा लिया और बलपूर्वक उसे इधर-उधर खींचने लगे। उस समय बकासुर उनके बाहुपाशसे छूटनेके लिये छटपटा रहा था

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ພີມເສນະ ຜູ້ມີແຂນແຂງກ້າ ກໍກອດຣາກສະນັ້ນແນ່ນຫນາ ດ້ວຍແຂນທັງສອງ ກົດໄວ້ກັບອົກຂອງຕົນ; ແລ້ວດ້ວຍກໍາລັງອັນຫນັກແນ່ນ ລາກອະສູນຜູ້ມີແຂນໃຫຍ່ທີ່ກໍາລັງດິ້ນຮົນນັ້ນໄປມາ.

Verse 23

स कृष्यमाणो भीमेन कर्षमाणश्न पाण्डवम्‌ | समयुज्यत तीव्रेण क्लमेन पुरुषादक:,भीमसेन उस राक्षसको खींचते थे तथा राक्षस भीमसेनको खींच रहा था। इस खींचा- खींचीमें वह नरभक्षी राक्षस बहुत थक गया

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ເມື່ອພີມລາກມັນ ແລະ ຣາກສະຜູ້ກິນຄົນກໍລາກປານດະວະກັບຄືນ, ທັງສອງກໍກໍ່ກັນໃນການດຶງດັນອັນຮຸນແຮງ. ໃນການປະລອງນັ້ນ ຣາກສະຜູ້ກິນຄົນເມື່ອຍລ້າຢ່າງຫນັກ.

Verse 24

तयोरवेंगेन महता पृथिवी समकम्पत । पादपांश्न महाकायांश्वूर्णयामासतुस्तदा,उन दोनोंके महान्‌ वेगसे धरती जोरसे काँपने लगी। उन दोनोंने उस समय बड़े-बड़े वृक्षोंके भी टुकड़े-टुकड़े कर डाले

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ດ້ວຍແຮງພຸ່ງອັນມະຫາສານຂອງທັງສອງ ແຜ່ນດິນກໍສັ່ນສະເທືອນຢ່າງຮຸນແຮງ. ໃນຂະນະນັ້ນເອງ ພວກເຂົາຍັງທໍາໃຫ້ຕົ້ນໄມ້ໃຫຍ່ໆແຕກກະຈາຍເປັນຊິ້ນໆ.

Verse 25

हीयमान तु तद्‌ रक्ष: समीक्ष्य पुरुषादकम्‌ । निष्पिष्य भूमौ जानुभ्यां समाजघ्ने वृकोदर:,उस नरभक्षी राक्षसको कमजोर पड़ते देख भीमसेन उसे पृथ्वीपर पटककर रगड़ने और दोनों घुटनोंसे मारने लगे

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ເມື່ອເຫັນຣາກສະຜູ້ກິນຄົນນັ້ນກໍາລັງອ່ອນແຮງ ວຶກໂກດະຣະ (ພີມະ) ໄດ້ໂຍນມັນລົງສູ່ພື້ນ ກົດຂີ້ບົດກັບດິນ ແລະກະແທກຊໍ້າໆດ້ວຍຫົວເຂົ່າທັງສອງ.

Verse 26

ततो<स्य जानुना पृष्ठठगवपीड्य बलादिव । बाहुना परिजग्राह दक्षिणेन शिरोधराम्‌,तदनन्तर उन्होंने अपने एक घुटनेसे बल-पूर्वक राक्षसकी पीठ दबाकर दाहिने हाथसे उसकी गर्दन पकड़ ली और बायें हाथसे कमरका लँगोट पकड़कर उस राक्षसको दुहरा मोड़ दिया। उस समय वह बड़ी भयानक आवाज में चीत्कार कर रहा था

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ຈາກນັ້ນ ພີມະໃຊ້ຫົວເຂົ່າກົດຫຼັງຂອງຣາກສະຢ່າງແຮງ ແລະຈັບຄໍຂອງມັນດ້ວຍແຂນຂວາ.

Verse 27

सव्येन च कटीदेशे गृह वाससि पाण्डव: । तद्‌ रक्षो द्विगुणं चक्रे रुवन्तं भैरवं रवम्‌,तदनन्तर उन्होंने अपने एक घुटनेसे बल-पूर्वक राक्षसकी पीठ दबाकर दाहिने हाथसे उसकी गर्दन पकड़ ली और बायें हाथसे कमरका लँगोट पकड़कर उस राक्षसको दुहरा मोड़ दिया। उस समय वह बड़ी भयानक आवाज में चीत्कार कर रहा था

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ພານດະວະຈັບຜ້າທີ່ຄາດແອວຂອງມັນດ້ວຍມືຊ້າຍ ກົດຫຼັງດ້ວຍຫົວເຂົ່າ ແລະຈັບຄໍດ້ວຍມືຂວາ; ດ້ວຍກໍາລັງອັນຫນັກໜ່ວງ ລາວບິດໃຫ້ຣາກສະນັ້ນງໍ້ສອງທົ່ວ ໃນຂະນະທີ່ມັນຮ້ອງຄໍາຮາມອັນນ່າສະພຶງກົວ.

Verse 28

ततो<स्य रुधिरं वकत्रात्‌ प्रादुरासीद्‌ विशाम्पते | भज्यमानस्य भीमेन तस्य घोरस्य रक्षस:,राजन! भीमसेनके द्वारा उस घोर राक्षसकी जब कमर तोड़ी जा रही थी, उस समय उसके मुखसे (बहुत-सा) खून गिरा

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ແລ້ວແຕ່ ໂອ ຜູ້ເປັນເຈົ້າແຫ່ງປະຊາຊົນ, ເລືອດໄດ້ພຸ່ງອອກຈາກປາກຂອງມັນ ໃນຂະນະທີ່ຣາກສະອັນນ່າສະພຶງກົວນັ້ນຖືກພີມະບີບຂີ້ບົດ.

Verse 162

इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि बकवधपर्वणि बकभीमसेनयुद्धे द्विषष्ट्यधिकशततमो<ध्याय:

ດັ່ງນີ້ແລ, ໃນ «ສຣີມະຫາພາຣະຕະ» ພາກ «ອາດິປະຣະວະ», ໃນຕອນ «ບະກະວະທະປະຣະວະ» ວ່າດ້ວຍການສັງຫານບະກະ, ໃນເຫດການສົງຄາມລະຫວ່າງ ບະກະ ແລະ ພີມະເສນະ, ບົດທີ 162 ກໍສິ້ນສຸດລົງເທົ່ານີ້.

Frequently Asked Questions

The implicit dharma-tension is between personal absorption in pleasure and the king’s administrative duty: Saṃvaraṇa’s prolonged withdrawal correlates with societal distress, prompting corrective intervention.

Legitimate prosperity is depicted as dependent on disciplined authority: alliances should be sanctioned through proper counsel and rite, and rulership requires sustained presence and responsibility toward the realm.

No explicit phalaśruti formula appears here; the meta-function is genealogical and etiological—explaining Kuru’s origin and reinforcing the narrative logic that order (including rainfall) follows restored righteous governance.