
अलर्कोपाख्यानम् — Indriya-Nigraha and Yogic Victory (Mahābhārata 14.30)
Upa-parva: Āśvamedhika-parva — Instructional Itihāsa on Indriya-Nigraha (Alarka-Upākhyāna context)
The Pitṛs introduce an ancient exemplum for a brāhmaṇa addressee: King Alarka, a rājarṣi renowned for truthfulness and dharma, conquers the earth yet turns toward subtle inquiry while seated at a tree’s root. Seeking mastery, he declares that true victory lies in conquering the mind and attempts to ‘strike’ the mind with arrows; the mind replies that such attacks rebound upon the attacker. Alarka then targets successive faculties—smell, taste (tongue), touch (skin), hearing (ear), sight (eye), and finally intellect (buddhi)—each responding that direct aggression will fail and harm him. After severe tapas and prolonged reflection, he does not find an effective ‘weapon’ against these seven. He then adopts yoga: making the mind one-pointed and motionless, he subdues the senses ‘with a single arrow’—a metaphor for unified yogic discipline—enters the self, and attains supreme accomplishment. Alarka recites a reflective gāthā regretting prior absorption in kingship and affirming yoga as the highest happiness. The teaching is applied explicitly: Rāma is instructed not to engage in destructive retaliation but to practice fierce austerity, by which he attains a difficult siddhi.
Chapter Arc: पितामह (भीष्म) परशुराम को ध्यान-योग का एक विलक्षण दृष्टान्त सुनाते हैं—राजर्षि अलर्क की कथा, जिसने समस्त पृथ्वी जीतकर भी मन को जीतने का कठिन युद्ध चुना। → अलर्क विषय-भोगों की जड़ पर प्रहार करना चाहता है। वह देखता है कि इन्द्रियाँ बार-बार रूप, शब्द, गन्ध आदि में लिप्त होकर बुद्धि को खींच ले जाती हैं; अतः वह प्रतीकात्मक रूप से इन्द्रियों को ‘बाणों’ से नष्ट करने का संकल्प करता है। परन्तु बुद्धि, मन, श्रोत्र और चक्षु—एक-एक कर—उत्तर देते हैं कि ये बाण उन्हें नहीं बेध सकते; उलटे साधक के ही ‘मर्म’ (अन्तःकरण के सूक्ष्म केन्द्र) को घायल कर देंगे। → अलर्क का निर्णायक बोध: बाह्य इन्द्रियों को हिंसा से दबाना समाधान नहीं; असली विजय ‘सूक्ष्म’ में मन का समाधि-स्थापन है। इन्द्रियाँ और अन्तःकरण-तत्त्व उसे भीतर की दिशा दिखाते हैं—वैराग्य, विवेक और ध्यान द्वारा ही इन्द्रिय-प्रवाह का निरोध सम्भव है। → दीर्घ चिन्तन और एकाग्रता के बाद अलर्क योगमार्ग में प्रवृत्त होता है—राज्य-विजय से आगे बढ़कर आत्म-विजय की साधना। भीष्म इस उदाहरण से परशुराम को समझाते हैं कि तपस्या और सिद्धि का मार्ग बाह्य शौर्य नहीं, अन्तर्मुखी संयम है; और परशुराम स्वयं तप से सिद्धि प्राप्त करते हैं।
Verse 1
ऑपन--माजल बछ। ्-््:डिअ त्रिशोडध्याय: अलर्कके ध्यानयोगका उदाहरण देकर पितामहोंका परशुरामजीको समझाना और परशुरामजीका तपस्याके द्वारा सिद्धि प्राप्त करना पितर ऊचु. अत्राप्युदाहरन्तीममितिहासं पुरातनम् । श्रुत्वा च तत् तथा कार्य भवता द्विजसत्तम,पितरोंने कहा--ब्राह्मणश्रेष्ठ! इसी विषयमें एक प्राचीन इतिहासका उदाहरण दिया जाता है, उसे सुनकर तुम्हें वैसा ही आचरण करना चाहिये
បិត្ឫទាំងឡាយបាននិយាយថា៖ «ក្នុងរឿងនេះផងដែរ មានឧទាហរណ៍ជាប្រវត្តិសាស្ត្របុរាណមួយត្រូវបានលើកឡើង។ ឱ ព្រាហ្មណ៍ល្អបំផុត! ក្រោយពីស្តាប់វា ហើយ អ្នកគួរប្រព្រឹត្តតាមដូច្នោះ»។
Verse 2
अलर्कों नाम राजर्षिरभवत् सुमहातपा: । धर्मज्ञ: सत्यवादी च महात्मा सुदृढव्रत:,पहलेकी बात है, अलर्क नामसे प्रसिद्ध एक राजर्षि थे, जो बड़े ही तपस्वी, धर्मज्ञ, सत्यवादी, महात्मा और दृढ़प्रतिज्ञ थे
សមុទ្របាននិយាយថា៖ «កាលពីបុរាណ មានរាជឥសីមួយអង្គឈ្មោះ អលរក (Alarka) ដែលមានតបៈដ៏ខ្ពង់ខ្ពស់។ ព្រះអង្គជាអ្នកដឹងធម៌ និយាយតែសច្ចៈ មានចិត្តធំទូលាយ និងមានព្រះបន្ទូលសច្ចាប្រកាន់យ៉ាងមាំមួន»។
Verse 3
ससागरान्तां धनुषा विनिर्जित्य महीमिमाम् | कृत्वा सुदुष्करं कर्म मन: सूक्ष्मे समादधे,उन्होंने अपने धनुषकी सहायतासे समुद्रपर्यनत इस पृथ्वीको जीतकर अत्यन्त दुष्कर पराक्रम कर दिखाया था। इसके पश्चात् उनका मन सूक्ष्मतत््वकी खोजमें लगा
ដោយអំណាចធ្នូរបស់ព្រះអង្គ ទ្រង់បានឈ្នះផែនដីនេះរហូតដល់សមុទ្រដែលព័ទ្ធជុំវិញ ហើយបានបំពេញកិច្ចការដ៏លំបាកយ៉ាងខ្លាំងមួយ។ បន្ទាប់មក ចិត្តរបស់ទ្រង់បានបង្វែរទៅរកសច្ចៈដ៏ល្អិតល្អន់—បោះបង់ជ័យជម្នះខាងក្រៅ ហើយចូលស្វែងរកខាងក្នុង ដោយការត្រួតត្រា និងសមាធិ។
Verse 4
स्थितस्य वृक्षमूलेषु तस्य चिन्ता बभूव ह । उत्सृज्य सुमहत्कर्म सूक्ष्म प्रति महामते,महामते! वे बड़े-बड़े कर्मोंका आरम्भ त्यागकर एक वृक्षके नीचे जा बैठे और सूक्ष्मतत््वकी खोजके लिये इस प्रकार चिन्ता करने लगे
ពេលទ្រង់អង្គុយនៅជិតឫសឈើ ការព្រួយគិតយ៉ាងជ្រាលជ្រៅបានកើតឡើងក្នុងទ្រង់។ ដោយបោះបង់ការចាប់ផ្តើមកិច្ចការធំៗខាងក្រៅ បុគ្គលប្រាជ្ញានោះបានបង្វែរចិត្តទៅរកសច្ចៈដ៏ល្អិតល្អន់ ហើយពិចារណាខាងក្នុង ដើម្បីស្វែងរកអ្វីដែលសំខាន់បំផុត។
Verse 5
अलर्क उवाच मनसो मे बल॑ जात॑ मनो जित्वा ध्रुवो जय: । अन्यत्र बाणान् धास्यामि शत्रुभि: परिवारित:,अलर्क कहने लगे--मुझे मनसे ही बल प्राप्त हुआ है, अतः वही सबसे प्रबल है। मनको जीत लेनेपर ही मुझे स्थायी विजय प्राप्त हो सकती है। मैं इन्द्रियरूपी शत्रुओंसे घिरा हुआ हूँ, इसलिये बाहरके शत्रुओंपर हमला न करके इन भीतरी शत्रुओंको ही अपने बाणोंका निशाना बनाऊँगा
អលរកៈបាននិយាយថា៖ «ខ្ញុំបានទទួលកម្លាំងពីចិត្ត; ដូច្នេះចិត្តគឺមានអំណាចខ្លាំងបំផុត។ តែដោយឈ្នះចិត្តប៉ុណ្ណោះ ខ្ញុំទើបអាចទទួលបានជ័យជម្នះដ៏ថេរអចិន្ត្រៃយ៍។ ខ្ញុំត្រូវបានព័ទ្ធជុំវិញដោយសត្រូវក្នុងរូបនៃអារម្មណ៍ទាំងប្រាំ; ដូច្នេះ មិនបាញ់ព្រួញទៅលើសត្រូវខាងក្រៅទេ ខ្ញុំនឹងបាញ់ទៅលើសត្រូវខាងក្នុងទាំងនេះ»។
Verse 6
यदिदं चापलात् कर्म सर्वान् मर्त्याश्विकीर्षति । मन: प्रति सुतीक्ष्णाग्रानहं मोक्ष्यामि सायकान्,यह मन चंचलताके कारण सभी मनुष्योंसे तरह-तरहके कर्म कराता है, अतः अब मैं मनपर ही तीखे बाणोंका प्रहार करूँगा
អលរកៈបាននិយាយថា៖ «ព្រោះចិត្តនេះមានភាពចលាចល វាបង្ខំឲ្យមនុស្សសព្វគ្នាធ្វើកិច្ចការប្រភេទនានា។ ដូច្នេះឥឡូវនេះ ខ្ញុំនឹងបាញ់ព្រួញមុខមុតទៅលើចិត្តខ្លួនឯង—បាញ់ទៅលើប្រភពនៃការរវល់មិនស្ងប់»។
Verse 7
मन उवाच नेमे बाणास्तरिष्यन्ति मामलर्क कथंचन । तवैव मर्म भेत्स्यन्ति भिन्नमर्मा मरिष्यसि
ចិត្តបាននិយាយថា៖ «អលរកៈ អំពើព្រួញទាំងនេះមិនអាចឆ្លងកាត់ខ្ញុំបានឡើយ។ ផ្ទុយទៅវិញ វានឹងប៉ះពាល់ចំណុចសំខាន់របស់អ្នកឯង; ពេលចំណុចជីវិតត្រូវបានចាក់បំបែក អ្នកនឹងស្លាប់»។
Verse 8
तच्छुत्वा स विचिन्त्याथ ततो वचनमत्रवीत्,यह सुनकर अलर्कने थोड़ी देरतक विचार किया, इसके बाद वे (नासिकाको लक्ष्य करके) बोले
លឺពាក្យនោះហើយ គាត់បានគិតពិចារណារយៈពេលមួយ; បន្ទាប់ពីបានវិនិច្ឆ័យរឿងរ៉ាវរួច គាត់ក៏និយាយឆ្លើយតបវិញ—ដោយដាក់ពាក្យដោយការអត់ធ្មត់ និងការយកចិត្តទុកដាក់ចំពោះធម៌អ្វីដែលគួរធ្វើ។
Verse 9
अलर्क उवाच आप्राय सुबहून् गन्धांस्तानेव प्रतिगृध्यति । तस्माद् घ्राणं प्रति शरान् प्रतिमोक्ष्याम्पहं शितान्,अलर्कने कहा--मेरी यह नासिका अनेक प्रकारकी सुगन्धियोंका अनुभव करके भी फिर उन्हींकी इच्छा करती है, इसलिये इन तीखे बाणोंको मैं इस नासिकापर ही छोड़ूँगा
អលរកៈ បាននិយាយថា៖ «ទោះបីនាសិកាខ្ញុំបានស្គាល់ក្លិនក្រអូបជាច្រើនប្រភេទហើយ ក៏នៅតែប្រាថ្នាចង់បានក្លិនទាំងនោះម្ដងទៀត។ ដូច្នេះ ខ្ញុំនឹងបាញ់ព្រួញមុតទាំងនេះទៅលើនាសិកានេះឯង»។
Verse 10
प्राण उवाच नेमे बाणास्तरिष्यन्ति मामलर्क कथंचन । तवैव मर्म भेत्स्यन्ति भिन्नमर्मा मरिष्यसि
ប្រាណៈ បាននិយាយថា៖ «អលរកៈ ព្រួញទាំងនេះមិនអាចឈ្នះខ្ញុំបានឡើយ។ ផ្ទុយទៅវិញ វានឹងប៉ះពាល់ដល់ចំណុចជីវិតរបស់អ្នកឯង; ពេលចំណុចសំខាន់ៗត្រូវបែកបាក់ អ្នកនឹងស្លាប់»។
Verse 11
तच्छुत्वा स विचिन्त्याथ ततो वचनमब्रवीत्,नासिकाका यह कथन सुनकर अलर्क कुछ देर विचार करनेके पश्चात् (जिह्वाको लक्ष्य करके) कहने लगे
លឺពាក្យនោះហើយ អលរកៈ បានគិតពិចារណារយៈពេលខ្លី។ បន្ទាប់មក គាត់ក៏និយាយ—បង្វែរពាក្យឆ្លើយទៅកាន់អណ្ដាត—បង្ហាញថា គាត់ឆ្លើយដោយចេតនាដែលប្រុងប្រយ័ត្ន និងយកធម៌ជាគោល មិនមែនដោយអារម្មណ៍ឆាប់រហ័សទេ។
Verse 12
अलर्क उवाच इयं स्वादून् रसान् भुक्त्वा तानेव प्रतिगृध्यति । तस्माज्जिद्धां प्रति शरान् प्रतिमोक्ष्याम्पहं शितान्,अलर्कने कहा--यह रसना स्वादिष्ट रसोंका उपभोग करके फिर उन्हें ही पाना चाहती है। इसलिये अब इसीके ऊपर अपने तीखे सायकोंका प्रहार करूँगा
អលរកៈ បាននិយាយថា៖ «អណ្ដាតនេះបានស៊ីរសជាតិឆ្ងាញ់ហើយ ក៏នៅតែប្រាថ្នាចង់បានរសទាំងនោះម្ដងទៀត។ ដូច្នេះ ឥឡូវនេះ ខ្ញុំនឹងបាញ់ព្រួញមុតរបស់ខ្ញុំទៅលើអណ្ដាតនេះឯង»។
Verse 13
जिल्बोवाच नेमे बाणास्तरिष्यन्ति मामलर्क कथंचन । तवैव मर्म भेत्स्यन्ति भिन्नमर्मा मरिष्यसि
ជិល្បា បាននិយាយថា៖ «អលរកា! ព្រួញទាំងនេះមិនអាចខកខានខ្ញុំបានឡើយ។ ផ្ទុយទៅវិញ វានឹងប៉ះពាល់ដល់ចំណុចជីវិតរបស់អ្នកឯង; ពេលមರ್ಮ (ចំណុចសំខាន់) ត្រូវបំបែក អ្នកនឹងស្លាប់»។
Verse 14
तच्छुत्वा स विचिन्त्याथ ततो वचनमत्रवीत्,यह सुनकर अलर्क कुछ देरतक सोचते-विचारते रहे, फिर (त्वचापर कुपित होकर) बोले
ពេលបានឮពាក្យនោះ អលរកា បានគិតពិចារណារយៈពេលមួយ; បន្ទាប់ពីថ្លឹងថ្លែងហើយ គាត់បាននិយាយ—ពាក្យឆ្លើយរបស់គាត់មានទម្ងន់នៃធម៌ដែលទើបបានឮ ហើយកំហឹងក៏កើនឡើងតាមក្រោយ។
Verse 15
अलर्क उवाच स्पृष्टवा त्वग्विविधान् स्पर्शास्तानेव प्रतिगृध्यति । तस्मात् त्वचं पाटयिष्ये विविध: कड़कपत्रिभि:,अलर्कने कहा--यह त्वचा नाना प्रकारके स्पर्शोका अनुभव करके फिर उन्हींकी अभिलाषा किया करती है, अतः नाना प्रकारके बाणोंसे मारकर इस त्वचाको ही विदीर्ण कर डालूँगा
អលរកា បាននិយាយថា៖ «ស្បែកនេះបានប៉ះពាល់នូវអារម្មណ៍រីករាយជាច្រើនប្រភេទ ហើយវាក៏តែងប្រាថ្នាចង់បានអារម្មណ៍ទាំងនោះវិញ។ ដូច្នេះ ខ្ញុំនឹងបំបែកស្បែកនេះ—បំបាក់វាដោយព្រួញជាច្រើនប្រភេទ—ដើម្បីកាត់បន្ថយក្តីប្រាថ្នាដែលឫសគល់នៅក្នុងការប៉ះពាល់»។
Verse 16
त्वगुवाच नेमे बाणास्तरिष्यन्ति मामलर्क कथंचन । तवैव मर्म भेत्स्यन्ति भिन्नमर्मा मरिष्यसि
ស្បែកបាននិយាយថា៖ «អលរកា! ព្រួញទាំងនេះមិនអាចចាក់ខ្ញុំបានឡើយ។ ប៉ុន្តែវានឹងប៉ះពាល់ដល់មર્મ (ចំណុចជីវិត) របស់អ្នកឯង; ពេលមರ್ಮត្រូវបំបែក អ្នកនឹងស្លាប់»។
Verse 17
अन्यान् बाणान् समीक्षस्व यैस्त्वं मां सूदयिष्यसि । त्वचा बोली--अलर्क! ये बाण किसी प्रकार मुझे अपना निशाना नहीं बना सकते। ये तो तुम्हारा ही मर्म विदीर्ण करेंगे और मर्म विदीर्ण होनेपर तुम्हीं मौतके मुखमें पड़ोगे। मुझे मारनेके लिये तो दूसरी तरहके बाणोंकी व्यवस्था सोचो, जिनसे तुम मुझे मार सकोगे ।। १६ श् “3 तच्छुत्वा स विचिन्त्याथ ततो वचनमब्रवीत्,त्वचाकी बात सुनकर अलर्कने थोड़ी देरतक विचार किया, फिर (श्रोत्रको सुनाते हुए) कहा--
អលរកា បាននិយាយថា៖ «ចូរពិចារណាព្រួញផ្សេងទៀត—ព្រួញដែលអាចធ្វើឲ្យអ្នកសម្លាប់ខ្ញុំបាន»។
Verse 18
अलर्क उवाच श्रुत्वा तु विविधान् शब्दांस्तानेव प्रतिगृध्यति । तस्माच्छोत्रं प्रति शरान् प्रतिमुड्चाम्पहं शितान्,अलर्क बोले--यह श्रोत्र बारंबार नाना प्रकारके शब्दोंको सुनकर उन्हींकी अभिलाषा करता है, इसलिये मैं इन तीखे बाणोंको श्रोत्र-इन्द्रियके ऊपर चलाऊँगा
អលរកៈ បាននិយាយថា៖ «ត្រចៀកនេះ ពេលបានស្តាប់សំឡេងជាច្រើនប្រភេទហើយ ក៏នៅតែប្រាថ្នាចង់ស្តាប់សំឡេងទាំងនោះម្ដងទៀត។ ដូច្នេះ ខ្ញុំនឹងបាញ់ព្រួញមុតទាំងនេះ ទៅលើអង្គធាតុនៃការស្តាប់»។
Verse 19
श्रोत्रभुवाच नेमे बाणास्तरिष्यन्ति मामलर्क कथंचन । तवैव मर्म भेत्स्यन्ति ततो हास्यसि जीवितम्
ស្រោត្រភូ បានប្រកាសថា៖ «អលរកៈ ព្រួញទាំងនេះ មិនអាចឆ្លងកាត់ខ្ញុំបានឡើយ។ វានឹងប៉ះតែចំណុចសំខាន់របស់អ្នកឯង; ហើយបន្ទាប់មក អ្នកនឹងត្រូវដកហូតជីវិត»។
Verse 20
तच्छुत्वा स विचिन्त्याथ ततो वचनमब्रवीत्,यह सुनकर अलर्कने कुछ सोच-विचारकर ([नेत्रको सुनाते हुए) कहा
ពេលបានស្តាប់ពាក្យនោះ អលរកៈ គិតពិចារណាម្ដង; បន្ទាប់មក ក្រោយបានថ្លឹងថ្លែងក្នុងចិត្តរួច គាត់បាននិយាយ។
Verse 21
अलर्क उवाच दृष्टवा रूपाणि बहुशस्तानेव प्रतिगृध्यति । तस्माच्चक्षुर्हनिष्यामि निशितै: सायकैरहम्,अलर्क बोले--यह आँख भी अनेकों बार विभिन्न रूपोंका दर्शन करके पुन: उन्हींको देखना चाहती है। अतः मैं इसे अपने तीखे तीरोंसे मार डालूँगा
អលរកៈ បាននិយាយថា៖ «ភ្នែកនេះ ក៏ដូចគ្នា—បានឃើញរូបរាងជាច្រើនដងហើយ ក៏នៅតែប្រាថ្នាចង់មើលវត្ថុដដែលៗម្ដងទៀត។ ដូច្នេះ ខ្ញុំនឹងបំផ្លាញភ្នែកនេះ ដោយព្រួញមុតរបស់ខ្ញុំ»។
Verse 22
चक्षुर॒वाच नेमे बाणास्तरिष्यन्ति मामलर्क कथंचन । तवैव मर्म भेत्स्यन्ति भिन्नमर्मा मरिष्यसि
ភ្នែក បាននិយាយថា៖ «អលរកៈ ព្រួញទាំងនេះ មិនអាចធ្វើអន្តរាយដល់ខ្ញុំបានឡើយ។ ផ្ទុយទៅវិញ វានឹងប៉ះតែចំណុចសំខាន់របស់អ្នកឯង; ពេលមರ್ಮរបស់អ្នកត្រូវបែក អ្នកនឹងស្លាប់»។
Verse 23
तच्छुत्वा स विचिन्त्याथ ततो वचनमत्रवीत्,यह सुनकर अलर्कने कुछ देर विचार करनेके बाद (बुद्धिको लक्ष्य करके) यह बात कही
លឺពាក្យទាំងនោះហើយ អលរកៈបានគិតពិចារណាស្របពេលមួយ; បន្ទាប់មក ដោយយកបញ្ញា (ព្រះបុទ្ធិ) ជាមគ្គុទេសក៍ គាត់បាននិយាយឆ្លើយតប—បង្ហាញថា ជាចម្លើយដែលបានគិតគូរយ៉ាងមានហេតុផល មិនមែនជាការឆ្លើយដោយអារម្មណ៍ភ្លាមៗទេ។
Verse 24
अलर्क उवाच इयं निष्ठा बहुविधा प्रज्ञया त्वध्यवस्यति । तस्माद् बुद्धि प्रति शरान् प्रतिमोक्ष्याम्पहं शितान्,अलर्कने कहा--यह बुद्धि अपनी ज्ञानशक्तिसे अनेक प्रकारका निश्चय करती है, अतः इस बुद्धिपर ही अपने तीक्ष्ण सायकोंका प्रहार करूँगा
អលរកៈបាននិយាយថា៖ «បញ្ញានេះ ដោយអំណាចនៃការយល់ដឹង ធ្វើនូវការសម្រេចចិត្តជាច្រើនប្រភេទ។ ដូច្នេះ ខ្ញុំនឹងបាញ់ព្រួញមុតរបស់ខ្ញុំ ទៅលើបញ្ញាខ្លួនវាឯង»។
Verse 25
बुद्धिर्वाच नेमे बाणास्तरिष्यन्ति मामलर्क कथंचन । तवैव मर्म भेत्स्यन्ति भिन्नमर्मा मरिष्यसि । अन्यान् बाणान् समीक्षस्व यैस्त्वं मां सूदयिष्यसि,बुद्धि बोली--अलर्क! ये बाण मेरा किसी प्रकार भी स्पर्श नहीं कर सकते। इनसे तुम्हारा ही मर्म विदीर्ण होगा और मर्म विदीर्ण होनेपर तुम्हीं मरोगे। जिनकी सहायतासे मुझे मार सकोगे, वे बाण तो कोई और ही हैं। उनके विषयमें विचार करो
បញ្ញា (ព្រះបុទ្ធិ) បាននិយាយថា៖ «អលរកៈ! ព្រួញទាំងនេះ មិនអាចប៉ះពាល់ខ្ញុំបានឡើយ។ ផ្ទុយទៅវិញ វានឹងចាក់បំបែកចំណុចសំខាន់របស់អ្នក; ពេលចំណុចសំខាន់បែកបាក់ អ្នកឯងនឹងស្លាប់។ ចូរពិចារណាព្រួញផ្សេងទៀត—មធ្យោបាយផ្សេង—ដែលអ្នកអាចប្រើ ដើម្បីឈ្នះខ្ញុំបានពិតប្រាកដ»។
Verse 26
ब्राह्मण उवाच ततोअलर्कस्तपो घोर तत्रैवास्थाय दुष्करम् | नाध्यगच्छत् परं शक््त्या बाणमेतेषु सप्तसु,ब्राह्मणने कहा--देवि! तदनन्तर अलर्कने उसी पेड़के नीचे बैठकर घोर तपस्या की, किंतु उससे मन-बुद्धिसहित पाँचों इन्द्रियोंको मारनेयोग्य किसी उत्तम बाणका पता न चला
ព្រះព្រាហ្មណ៍បាននិយាយថា៖ «ឱ ទេវី! បន្ទាប់មក អលរកៈបានអង្គុយនៅទីនោះក្រោមដើមឈើដដែល ហើយធ្វើតបស្យាដ៏សាហាវ និងលំបាក។ ប៉ុន្តែ ទោះប្រើកម្លាំងទាំងអស់ ក៏គាត់មិនបានរកឃើញ ក្នុងចំណោមព្រួញទាំងប្រាំពីរ នូវព្រួញដ៏ប្រសើរណាមួយ ដែលអាចបង្ក្រាបចិត្ត និងបញ្ញា ព្រមទាំងអង្គឥន្ទ្រីទាំងប្រាំបានឡើយ»។
Verse 27
सुसमाहितचेतास्तु स ततो$चिन्तयत् प्रभु: । स विचिन्त्य चिरं कालमलर्को द्विजसत्तम
ដោយចិត្តតាំងមាំ និងស្ងប់ស្ងាត់ល្អ អ្នកមានអំណាចនោះបានចាប់ផ្តើមពិចារណា។ ក្រោយគិតយូរអង្វែង អលរកៈ—អ្នកប្រសើរបំផុតក្នុងចំណោមទ្វិជៈ—បានឈានដល់ការសម្រេចចិត្តដែលបានពិចារណាហើយ។
Verse 28
स एकाग्रं मन: कृत्वा निश्चलो योगमास्थित:,वे मनको एकाग्र करके स्थिर आसनसे बैठ गये और ध्यानयोगका साधन करने लगे। इस ध्यानयोगरूप एक ही बाणसे मारकर उन बलशाली नरेशने समस्त इन्द्रियोंको सहसा परास्त कर दिया। वे ध्यानयोगके द्वारा आत्मामें प्रवेश करके परम सिद्धि (मोक्ष)-को प्राप्त हो गये
ព្រះព្រាហ្មណ៍បានមានពាក្យថា៖ ព្រះរាជាអ្នកមានពលានុភាពនោះ ប្រមូលចិត្តឲ្យជាប់តែមួយចំណុច ហើយអង្គុយមិនរអិលរអួល ដោយស្ថិតនៅក្នុងយោគៈ។ ដោយ «ព្រួញតែមួយ» គឺវិន័យនៃសមាធិ-យោគៈនេះ ព្រះអង្គបានឈ្នះអារម្មណ៍ទាំងអស់យ៉ាងឆាប់រហ័ស។ ដោយចូលទៅក្នុងអាត្មា តាមរយៈ ធ្យាន-យោគៈ ព្រះអង្គបានឈានដល់សិទ្ធិដ៏ខ្ពង់ខ្ពស់បំផុត—មោក្ខ (ការរួចផុត)។
Verse 29
इस प्रकार श्रीमह्याभारत आश्वमेधिकपरवके अन्तर्गत अनुगीतापर्वमें ब्राह्मणगीताविषयक उनतीसवाँ अध्याय पूरा हुआ,इन्द्रियाणि जघानाशु बाणेनैकेन वीर्यवान् । योगेनात्मानमाविश्य सिद्धि परमिकां गत: वे मनको एकाग्र करके स्थिर आसनसे बैठ गये और ध्यानयोगका साधन करने लगे। इस ध्यानयोगरूप एक ही बाणसे मारकर उन बलशाली नरेशने समस्त इन्द्रियोंको सहसा परास्त कर दिया। वे ध्यानयोगके द्वारा आत्मामें प्रवेश करके परम सिद्धि (मोक्ष)-को प्राप्त हो गये
អ្នកមានពលានុភាពនោះ បានវាយបំបាក់អារម្មណ៍ទាំងឡាយយ៉ាងឆាប់រហ័ស ដោយ «ព្រួញតែមួយ» គឺវិន័យនៃយោគៈ។ ដោយសមាធិយោគៈ ព្រះអង្គចូលទៅក្នុងអាត្មា ហើយបានឈានដល់សិទ្ធិដ៏អធិក—មោក្ខ (ការរួចផុត)។ ខគម្ពីរនេះបង្ហាញថា ជ័យជម្នះខាងក្នុងគឺជាជ័យជម្នះខ្ពង់ខ្ពស់បំផុត៖ ការគ្រប់គ្រងអារម្មណ៍ដោយសមាធិផ្តោតចិត្ត នាំទៅកាន់មោក្ខ មិនមែនទៅកាន់ជោគជ័យលោកិយ។
Verse 30
विस्मितश्नापि राजर्षिरिमां गाथां जगाद ह । अहो कष्ट यदस्माभि: सर्व बाह्ममनुछितम्,इस सफलतासे राजर्षि अलर्कको बड़ा आश्चर्य हुआ और उन्होंने इस गाथाका गान किया--'अहो! बड़े कष्टकी बात है कि अबतक मैं बाहरी कामोंमें ही लगा रहा और भोगोंकी तृष्णासे आबद्ध होकर राज्यकी ही उपासना करता रहा। ध्यानयोगसे बढ़कर दूसरा कोई उत्तम सुखका साधन नहीं है, यह बात तो मुझे बहुत पीछे मालूम हुई है” इति श्रीमहाभारते आश्वमेधिके पर्वणि अनुगीतापर्वणि ब्राह्मणगीतासु त्रिंशो 5ध्याय:
សូម្បីតែព្រះរាជឥសី ក៏មានការភ្ញាក់ផ្អើល ហើយបានបញ្ចេញគាថានេះថា៖ «អូហ៍! គួរឲ្យសោកស្តាយណាស់ ដែលខ្ញុំបានចំណាយជីវិតលើអ្វីដែលមានតែខាងក្រៅ និងមិនសមគួរ—ត្រូវចងក្រងដោយសេចក្តីស្រេកឃ្លាននៃការសប្បាយ ខ្ញុំបានគោរពបូជាតែអំណាចនៃរាជ្យប៉ុណ្ណោះ។ ឥឡូវនេះទើបដឹងយឺតពេកថា មិនមានមធ្យោបាយណាដើម្បីសុខពិត លើសពីវិន័យនៃធ្យាន-យោគៈឡើយ»។
Verse 31
भोगतृष्णासमायुक्ति: पूर्व राज्यमुपासितम् । इति पश्चान्मया ज्ञातं योगान्नास्ति परं सुखम्,इस सफलतासे राजर्षि अलर्कको बड़ा आश्चर्य हुआ और उन्होंने इस गाथाका गान किया--'अहो! बड़े कष्टकी बात है कि अबतक मैं बाहरी कामोंमें ही लगा रहा और भोगोंकी तृष्णासे आबद्ध होकर राज्यकी ही उपासना करता रहा। ध्यानयोगसे बढ़कर दूसरा कोई उत्तम सुखका साधन नहीं है, यह बात तो मुझे बहुत पीछे मालूम हुई है”
ព្រះព្រាហ្មណ៍បានមានពាក្យថា៖ «ដោយចងក្រងជាមួយសេចក្តីស្រេកឃ្លាននៃការសប្បាយ ខ្ញុំកាលពីមុនបានឧទ្ទិសខ្លួនដល់រាជ្យ។ តែពេលក្រោយទើបខ្ញុំដឹងថា លើសពីយោគៈ មិនមានសុខណាខ្ពស់ជាងនេះឡើយ»។ ក្នុងសាច់រឿង វាត្រូវបានច្រៀងជាបទពិចារណា ដែលគេយកថាជាសំឡេងរបស់រាជឥសី អលរកៈ បង្ហាញការសោកស្តាយចំពោះការតាមរកអំណាច និងសុខសប្បាយខាងក្រៅយូរពេក ហើយទើបស្គាល់យឺតថា ធ្យាន-យោគៈជាមាគ៌ាខ្ពស់សម្រាប់សុខដ៏ថេរជាង។
Verse 32
इति त्वमनुजानीहि राम मा क्षत्रियान् जहि । तपो घोरमुपातिष्ठ ततः श्रेयोडभिपत्स्यसे,(पितामहोंने कहा--) बेटा परशुराम! इन सब बातोंको अच्छी तरह समझकर तुम क्षत्रियोंका नाश न करो। घोर तपस्यामें लग जाओ, उसीसे तुम्हें कल्याण प्राप्त होगा
ដូច្នេះហើយ រាមៈ អ្នកចូរទទួលយកដំបូន្មាននេះ៖ កុំសម្លាប់ក្សត្រីយៈទាំងឡាយឡើយ។ ចូរចូលរួមក្នុងតបស្យាដ៏តឹងរឹង; ដោយវិន័យនោះ អ្នកនឹងបានឈានដល់សេចក្តីល្អខ្ពង់ខ្ពស់បំផុត។ ពាក្យព្រមានរបស់អ្នកចាស់ទុំ បង្វែរបារាសុរាមៈពីអំពើហិង្សាសងសឹក ទៅរកការអត់ធ្មត់ និងគុណធម៌វិញ្ញាណ ដោយបង្ហាញថា តបស្យា ជាឱសថសីលធម៌សម្រាប់កំហឹង និងជាមាគ៌ាទៅកាន់សុខសាន្តយូរអង្វែង។
Verse 33
इत्युक्त: स तपो घोरं जामदग्न्य: पितामहै: । आस्थित: सुमहाभागो ययौ सिद्धि च दुर्गमाम्,अपने पितामहोंके इस प्रकार कहनेपर महान् सौभाग्यशाली जमदग्निनन्दन परशुरामजीने कठोर तपस्या की और इससे उन्हें परम दुर्लभ सिद्धि प्राप्त हुई
ពេលបានឮព្រះបិតាមហាបុរសទាំងឡាយមានព្រះបន្ទូលដូច្នោះ ជាមដគ្ន្យ (បារាសុរាម) អ្នកមានសំណាងដ៏មហិមា បានចូលរួមធ្វើតបៈដ៏កាចសាហាវ។ ដោយការអត់ធ្មត់ក្នុងតបៈដ៏តឹងរឹងនោះ ទ្រង់បានសម្រេចសិទ្ធិដ៏កម្រនិងពិបាកឈានដល់។
Verse 76
अन्यान् बाणान् समीक्षस्व यैस्त्वं मां सूदयिष्यसि । मन बोला--अलर्क! तुम्हारे ये बाण मुझे किसी तरह नहीं बींध सकते। यदि इन्हें चलाओगे तो ये तुम्हारे ही मर्मस्थानोंकों चीर डालेंगे और मर्मस्थानोंके चीरे जानेपर तुम्हारी ही मृत्यु होगी; अतः तुम अन्य प्रकारके बाणोंका विचार करो, जिनसे तुम मुझे मार सकोगे
ចិត្តបាននិយាយថា៖ «អលរក! ព្រួញទាំងនេះរបស់អ្នក មិនអាចចាក់ខ្ញុំបានឡើយ។ បើអ្នកបាញ់វា វានឹងវិលទៅកាត់បំបែកចំណុចសំខាន់ៗ (មರ್ಮ) របស់អ្នកឯង ហើយពេលមર્મត្រូវបែក អ្នកឯងនឹងស្លាប់។ ដូច្នេះ ចូរពិចារណាព្រួញប្រភេទផ្សេងទៀត—មធ្យោបាយដែលអាចសម្លាប់ខ្ញុំបានពិត។»
Verse 103
अन्यान् बाणान् समीक्षस्व यैस्त्वं मां सूदयिष्यसि । नासिका बोली--अलर्क! ये बाण मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकते। इनसे तो तुम्हारे ही मर्म विदीर्ण होंगे और मर्मस्थानोंका भेदन हो जानेपर तुम्हीं मरोगे; अतः तुम दूसरे प्रकारके बाणोंका अनुसंधान करो, जिससे तुम मुझे मार सकोगे
«ចូររកព្រួញផ្សេងទៀត—ព្រួញដែលអ្នកគិតថាអាចសម្លាប់ខ្ញុំបាន»។ បន្ទាប់មក ច្រមុះបាននិយាយថា៖ «អលរក! ព្រួញទាំងនេះមិនអាចធ្វើអ្វីខ្ញុំបានឡើយ។ ផ្ទុយទៅវិញ វានឹងបំបែកមર્મរបស់អ្នកឯង ហើយពេលមર્મត្រូវចាក់ អ្នកឯងនឹងស្លាប់។ ដូច្នេះ ចូរស្វែងរកអាវុធប្រភេទផ្សេង—ដែលអាចសម្លាប់ខ្ញុំបានពិត។»
Verse 133
अन्यान् बाणान् समीक्षस्व यैस्त्वं मां सूदयिष्यसि । जिह्दा बोली--अलर्क! ये बाण मुझे किसी प्रकार नहीं छेद सकते। ये तो तुम्हारे ही मर्मस्थानोंको बींधेंगे। मर्मस्थानोंके बिंध जानेपर तुम्हीं मरोगे। अतः दूसरे प्रकारके बाणोंका प्रबन्ध सोचो, जिनकी सहायतासे तुम मुझे मार सकोगे
«ចូរពិចារណាព្រួញផ្សេងទៀត—ព្រួញដែលអ្នកអាចសម្លាប់ខ្ញុំបានពិត»។ បន្ទាប់មក អណ្ដាតបាននិយាយថា៖ «អលរក! ព្រួញទាំងនេះមិនអាចចាក់ខ្ញុំបានឡើយ។ វានឹងចាក់តែចំណុចមર્મរបស់អ្នកឯង។ ពេលមর্মត្រូវចាក់ អ្នកឯងនឹងស្លាប់។ ដូច្នេះ ចូរគិតរៀបចំព្រួញប្រភេទផ្សេង—ដោយជំនួយវា អ្នកអាចសម្លាប់ខ្ញុំបាន។»
Verse 193
अन्यान् बाणान् समीक्षस्व यैस्त्वं मां सूदयिष्यसि । श्रोत्रने कहा--अलर्क! ये बाण मुझे किसी प्रकार नहीं छेद सकते। ये तुम्हारे ही मर्मस्थानोंको विदीर्ण करेंगे। तब तुम जीवनसे हाथ धो बैठोगे। अतः तुम अन्य प्रकारके बाणोंकी खोज करो, जिनसे मुझे मार सकोगे
«ចូររកព្រួញផ្សេងទៀត—ព្រួញដែលអ្នកគិតថាអាចសម្លាប់ខ្ញុំបានពិត»។ បន្ទាប់មក ត្រចៀកបាននិយាយថា៖ «អលរក! ព្រួញទាំងនេះមិនអាចចាក់ខ្ញុំបានឡើយ។ វានឹងបំបែកមర్మរបស់អ្នកឯង ហើយពេលនោះ អ្នកនឹងបាត់បង់ជីវិត។ ដូច្នេះ ចូរស្វែងរកព្រួញប្រភេទផ្សេង—ដែលអាចសម្លាប់ខ្ញុំបាន។»
Verse 226
अन्यान् बाणान् समीक्षस्व यैस्त्वं मां सूदयिष्यसि । आँखने कहा--अलर्क! ये बाण मुझे किसी प्रकार नहीं छेद सकते। ये तुम्हारे ही मर्मस्थानोंको बींध डालेंगे और मर्म विदीर्ण हो जानेपर तुम्हें ही जीवनसे हाथ धोना पड़ेगा। अतः दूसरे प्रकारके सायकोंका प्रबन्ध सोचो, जिनकी सहायतासे तुम मुझे मार सकोगे
អលរកៈបាននិយាយថា៖ «ចូរពិចារណាព្រួញផ្សេងទៀត—ព្រួញដែលអាចសម្លាប់ខ្ញុំបាន។ ព្រួញដែលអ្នកកាន់មកនេះ មិនអាចចាក់បំបែកខ្ញុំបានឡើយ; វានឹងត្រឡប់ទៅចាក់បំបែកចំណុចមរមៈរបស់អ្នកឯង ហើយពេលមរមៈត្រូវបែក អ្នកឯងនឹងបាត់បង់ជីវិត។ ដូច្នេះ ចូរគិតរៀបចំអាវុធប្រភេទផ្សេង ដែលដោយវា អ្នកអាចសម្លាប់ខ្ញុំបាន»។
Verse 273
नाध्यगच्छत् परं श्रेयो योगान्मतिमतां वर: । तब वे सामर्थ्यशाली राजा एकाग्रचित्त होकर विचार करने लगे। विप्रवर! बहुत दिनोंतक निरन्तर सोचने-विचारनेके बाद बुद्धिमानोंमें श्रेष्ठ राजा अलर्कको योगसे बढ़कर दूसरा कोई कल्याणकारी साधन नहीं प्रतीत हुआ
ព្រះរាជាដ៏មានអំណាចនោះ បានផ្តោតចិត្តគិតពិចារណា។ ឱ ព្រះវិប្រសេដ្ឋ! បន្ទាប់ពីគិតពិចារណាយូរថ្ងៃជាប់ៗគ្នា ព្រះបាទអលរកៈ ដែលជាអ្នកប្រាជ្ញលើសគេក្នុងចំណោមអ្នកប្រាជ្ញទាំងឡាយ មិនឃើញមធ្យោបាយណាដែលជាកុសលលើសពីយោគៈឡើយ។
Whether mastery is achieved by external force (symbolized by ‘arrows’ aimed at faculties) or by disciplined interior integration; the chapter argues that coercive suppression rebounds, while yoga resolves the conflict through steady restraint.
Unified yogic concentration—making the mind stable and one-pointed—subdues the senses more effectively than piecemeal confrontation; inner victory is presented as superior to territorial conquest.
Yes. Alarka’s concluding gāthā asserts that yoga yields the highest happiness, and the applied injunction to Rāma (to adopt tapas and desist from retaliatory killing) frames yogic-ascetic practice as the route to ‘śreyas’ and difficult siddhi.