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Shloka 20

सावित्री-यमसंवादः

Sāvitrī’s Dialogue with Yama and the Restoration of Satyavān

चिन्तयित्वा मुहूर्त तु तारा ताराधिपप्रभा । पतिमित्यब्रवीत्‌ प्राज्ञा शृणु सर्व कपीश्चर,तारा अपनी अंगकान्तिसे चन्द्रमाकी ज्योत्स्नाके समान उद्दीप्त हो रही थी। उस विदुषीने दो घड़ीतक विचार करके अपने पतिसे कहा--“कपीश्वर! मैं सब बातें बताती हूँ, सुनिये

月光のごとく輝くターラーはしばし思案し、賢き女は夫に告げた。「猿たちの王よ、すべてを語ろう。聞け。」

मार्कण्डेय उवाच