यथा शिलोच्चये शैल: सागरे सागरो यथा । प्रतिहन्येत राजेन्द्र तथा55सन् कुरुपाण्डवा:,राजेन्द्र! जैसे एक पहाड़ दूसरे पहाड़से टकरा जाय तथा एक समुद्र दूसरे समुद्रसे टक्कर ले, वही अवस्था कौरव-पाण्डव योद्धाओंकी भी थी
sañjaya uvāca | yathā śilocchaye śailaḥ sāgare sāgaro yathā | pratihanyeta rājendra tathāsan kurupāṇḍavāḥ ||
サञ्जयは言った。「王よ、岩峰にて山が山にぶつかるがごとく、海が海へと押し寄せるがごとく、クル族とパーンダヴァ族は激突した――力は拮抗し、広大で、決意は屈せぬままに。」
संजय उवाच