Kuvalāśva’s Lineage and Uttaṅka’s Petition concerning Dhundhu (धुन्धु-प्रसङ्गः)
अथ तां देवीं स राजाब्रवीत्ू साध्ववतर वापीसलिलमिति । सा तद्धचः श्रुत्वावतीर्य वापी न््यमज्जन्न पुनरुदमज्जत्,“उस समय राजाने उस रानीसे कहा--'देवि! सावधानीके साथ इस बावलीके जलमें उतरो।” राजाकी यह बात सुनकर उसने बावलीमें घुसकर गोता लगाया और फिर बाहर नहीं निकली
वैशम्पायन उवाच