Karṇa-parva Adhyāya 20 — Yudhiṣṭhira–Duryodhana Encounter and Escalation of Arms
तालशब्दांश्व विविधाज्शूराणां चाभिगर्जताम् | श्र॒त्वा तत्र भृशं त्रेसु: पेतुर्मम्लुश्न सैनिका:,सामने गर्जना करनेवाले शूरवीरोंके ताल ठोंकनेके विविध शब्द सुनकर कितने ही सैनिक वहाँ भयसे थर्रा उठते थे, कितने ही गिर पड़ते थे और कितने ही ग्लानिसे भर जाते थे
संजय उवाच