Ādi Parva, Adhyāya 181 — Svayaṃvara Aftermath: Arjuna–Karna Exchange and Bhīma–Śalya Contest
अप्रमत्त: स्थितो धर्मे गुरुशुश्रूषणे रत: । शापोपहत दुर्धर्ष न पापं कर्तुमहसि,“आप रुदा प्रमादशून्य होकर धर्ममें स्थित रहनेवाले हैं। गुरुजनोंकी सेवामें सदा संलग्न रहते हैं। दुर्धर्ष वीर! यद्यपि आप इस समय शापसे ग्रस्त हैं, तो भी आपको पापकर्म नहीं करना चाहिये
गन्धर्व उवाच