Dvārakā’s Distress and the Saubha Engagement (द्वारकाव्यग्रता तथा सौभयुद्धम्)
बलदेवो महाबाहुः कच्चिज्जीवति शत्रुहा । सात्यकी रौक्मिणेयश्व चारुदेष्णश्न वीर्यवान्,क्या शत्रुहन्ता महाबली बलरामजी जीवित हैं? क्या सात्यकि, रुक्मिणीनन्दन प्रद्युम्न, महाबली चारुदेष्ण तथा साम्ब आदि जीवन धारण करते हैं? इन बातोंका विचार करते- करते मेरा मन बहुत उदास हो गया। नरश्रेष्ठ! इन वीरोंके जीते-जी साक्षात् इन्द्र भी मेरे पिता वसुदेवजीको किसी प्रकार मार नहीं सकते थे। अवश्य ही शूरनन्दन वसुदेवजी मारे गये और यह भी स्पष्ट है कि बलरामजी आदि सभी प्रमुख वीर प्राणत्याग कर चुके हैं--यह मेरा निश्चित विचार हो गया। महाराज! इस प्रकार सबके विनाशका बारंबार चिन्तन करके भी मैं व्याकुल न होकर राजा शाल्वसे पुन: युद्ध करने लगा
baladevo mahābāhuḥ kaccij jīvati śatruhā | sātyakī raukmiṇeyaś ca cārudeṣṇaś ca vīryavān ||
Apakah Baladeva yang berlengan perkasa, pembantai musuh, masih hidup? Dan apakah Sātyaki, Pradyumna putra Rukmiṇī, serta Cārudeṣṇa yang gagah masih bernyawa?
वायुदेव उवाच