Verse 2.16.1
वसन्तो हिंकारो ग्रीष्मः प्रस्तावो वर्षा उद्गीथः शरत्प्रतिहारो हेमन्तो निधनम् । एतद्वैराजमृतुषु प्रोतम्॥२.१६.१॥
बसंत ऋतु पहले नोट से शुरू होता है, गर्मी का टाइम दूसरे नोट पे आता है। बारिश के दिन तीसरे नोट में गाओं, और पतझड़ में छठा नोट आता है। सर्दियों का टाइम आखरी नोट पे खत्म होता है। यह सब ऋतु एक साथ मिलकर पूरा गाना बना देते हैं।
Verse 2.16.2
स य एवमेतद्वैराजमृतुषु प्रोतं वेद विराजति प्रजया पशुभिर्ब्रह्मवर्चसेन सर्वमायुरेति ज्योग्जीवति महान्प्रजया पशुभिर्भवति महान्कीर्त्यर्तून्न न निन्देत्तद्व्रतम्॥२.१६.२॥
जो इंसान यह समझता है कि सारे ऋतु मिलकर एक पूरा गाना बनाते हैं, वो चमकने लगता है। बच्चों और जानवरों से उसका घर बड़ा होता है, और उसके अंदर एक अलग चमक आती है। उसकी उम्र पूरी होती है, वो लंबी ज़िन्दगी जी लेता है। नाम फैल जाता है, लोग जानते हैं। ऋतु को कभी बुरा मत बोलो, यह एक व्रत है।
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