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Sukta 8.94
Marut (Maruts), with allied deities implied (bountiful powers)
This hymn invokes the Marut-host as luminous, impetuous powers who break through obstacles and move like streaming waters, bringing force, clarity, and victorious momentum. It links their cosmic storm-energy with the Soma rite, calling them—mountain-seated and virile—to partake of the pressed Soma and to propel the sacrificer’s ascent and fame.
Mantra 1
गौर्धयति मरुतां श्रवस्युर्माता मघोनाम् । युक्ता वह्नी रथानाम् ॥
उषस, वो सुबह की रोशनी, मरुत देवताओं को पाल-ती है। वो बड़े लोगों की मा बन-ती है। रथों में जुती हुई वो उन्हें आगे बढ़ा-ती है।
Mantra 2
यस्या देवा उपस्थे व्रता विश्वे धारयन्ते । सूर्यामासा दृशे कम् ॥
देवी के पास देवता सबसे सही काम के नियम रखते हैं। सूरज और चाँद वहाँ हैं ताकि हम सही देखें। नज़र साफ हो और हम समझ पाएँ।
Mantra 3
तत्सु नो विश्वे अर्य आ सदा गृणन्ति कारवः । मरुतः सोमपीतये ॥
इसलिए सब अच्छे लोग हमेशा गाएँ। मरुत देवता, हमें सोम के लिए गाना सुनाएँ। यह वो अमृत है जो अंदर से खुशी देता है।
Mantra 4
अस्ति सोमो अयं सुतः पिबन्त्यस्य मरुतः । उत स्वराजो अश्विना ॥
देखो, सोम पीस के तैयार है। मरुत देवता इसको पीते हैं। अश्विनी देवता भी इसको पीते हैं, जो खुद के मालिक हैं और जल्दी काम करते हैं।
Mantra 5
पिबन्ति मित्रो अर्यमा तना पूतस्य वरुणः । त्रिषधस्थस्य जावतः ॥
मित्र और अर्यमन सोम रस पीते हैं। वरुण भी पीता है। यह रस साफ है और तेज़ी से चलता है। यह तीन जगह पे रहता है। इन सबसे अंदर अच्छा काम होता है।
Mantra 6
उतो न्वस्य जोषमाँ इन्द्रः सुतस्य गोमतः । प्रातर्होतेव मत्सति ॥
अब इंद्र भी आता है। वो सोम रस को खुशी से लेता है। यह रस चमकदार है। सुबह सुबह इंद्र खुश होता है जैसे कोई पूजा कर रहा हो।
Mantra 7
कदत्विषन्त सूरयस्तिर आप इव स्रिधः । अर्षन्ति पूतदक्षसः ॥
जब चमकते हुए लोग आगे बढ़ते हैं? वो रास्ते के रुकावटों को पार करते हैं। जैसे पानी आगे बढ़ता है। उनका काम साफ और सीधा होता है।
Mantra 8
कद्वो अद्य महानां देवानामवो वृणे । त्मना च दस्मवर्चसाम् ॥
आज मैं बड़े भगवानों की मदद कैसे लूँ? तुम चमकते हो और मैं भी अपनी तरफ से यह चाहता हूँ। कब मेरा काम बनेगा?
Mantra 9
आ ये विश्वा पार्थिवानि पप्रथन्रोचना दिवः । मरुतः सोमपीतये ॥
मरुत, तुम आओ। तुमने धरती के सब हिस्से फैला दिए हैं। आसमान भी तुमने चमका दिया है। आओ और सोम रस पियो। इससे खुशी और ताकत बढ़ती है।
Mantra 10
त्यान्नु पूतदक्षसो दिवो वो मरुतो हुवे । अस्य सोमस्य पीतये ॥
मैं मरुत देवताओं को बुला रहा हूँ। यह आसमान के हैं और इनकी शक्ति साफ है। इन्हे सोम पीने के लिए बुला रहा हूँ। सोम वो प्याला है जो खुशी और ताकत देता है।
Mantra 11
त्यान्नु ये वि रोदसी तस्तभुर्मरुतो हुवे । अस्य सोमस्य पीतये ॥
मैं उन मरुतों को बुला रहा हूँ जिन्होंने दुनिया को फैला दिया। आसमान और ज़मीन दोनों को वाइड कर दिया। इन्हे सोम पीने के लिए बुला रहा हूँ। यह ताकत हमारे अंदर खुशी लाती है।
Mantra 12
त्यं नु मारुतं गणं गिरिष्ठां वृषणं हुवे । अस्य सोमस्य पीतये ॥
मैं मरुत सेना को बुला रहा हूँ। यह पहाड़ों पर रहते हैं और बलवान हैं। इन्हे सोम पीने के लिए बुला रहा हूँ। यह हमारे अंदर नई ताकत भरते हैं।
The Maruts are a troop of storm and wind deities, described as radiant and forceful. Here they represent a coordinated host that breaks through obstacles and brings energizing power.
In Vedic ritual, Soma is offered to deities to draw their presence and support. Calling the Maruts to Soma seeks their strength, protection, and momentum for the sacrifice and the worshipper’s aims.
It is a symbolic image for a luminous nourishing power that ‘feeds’ and supports the Maruts. It suggests a source of radiance and vitality that becomes the driving force behind their swift chariots.
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