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Sukta 7.94
Vasiṣṭha (Mandala 7 attribution)
Indrāgnī
Gāyatrī (probable: shorter 3-pāda structure typical of gāyatrī in some Indrāgnī hymns)
This hymn to Indra-and-Agni presents the praise as an “ancient” inspiration arising like rain from a cloud, then turns that inspired speech into a practical invocation for protection and victory. It repeatedly asks the paired powers—force (Indra) and sacred fire (Agni)—to come with help, secure the worshippers among the peoples, and to strike down hostile speech, evil intent, and rakṣasic obstruction.
Mantra 1
इयं वामस्य मन्मन इन्द्राग्नी पूर्व्यस्तुतिः । अभ्राद्वृष्टिरिवाजनि ॥
इंद्र और अग्नि, यह स्तुति दिल से निकली है। यह पुराना तरीका है भगवान को याद करने का। जैसे बादल से बारिश आती है, वैसे ही यह मन से बाहर आई है।
Mantra 2
शृणुतं जरितुर्हवमिन्द्राग्नी वनतं गिरः । ईशाना पिप्यतं धियः ॥
इंद्र और अग्नि, हमारी आवाज़ सुनो। हमारी बात सुनो और हाँ करो। तुम लोग शक्ति वाले हो, इसलिए हमारे मन को आगे बढ़ाओ। हमारे दिमाग में अच्छे खयाल लाओ।
Mantra 3
मा पापत्वाय नो नरेन्द्राग्नी माभिशस्तये । मा नो रीरधतं निदे ॥
हे इंद्र और अग्नि, तुम दोनों बड़े हो। हमें गिरने मत दो। कोई हम पर इल्ज़ाम न लगा सके। कोई हमे बुरा न कहे, इससे बचा के रखना।
Mantra 4
इन्द्रे अग्ना नमो बृहत्सुवृक्तिमेरयामहे । धिया धेना अवस्यवः ॥
इंद्र और अग्नि को हम बड़ा नमस्ते करते हैं। हम उनके लिए अच्छे से बोलते हैं। हम उनकी मदद माँगते हैं, जैसे गाय दूध देती है वैसे ही वो हमें दे।
Mantra 5
ता हि शश्वन्त ईळत इत्था विप्रास ऊतये । सबाधो वाजसातये ॥
रिशि लोग इन दोनों की हमेशा पूजा करते हैं। वो मदद के लिए पुकारते हैं। सारी रुकावटें हटा के जीतना चाहते हैं।
Mantra 6
ता वां गीर्भिर्विपन्यवः प्रयस्वन्तो हवामहे । मेधसाता सनिष्यवः ॥
हम इंद्र और अग्नि को अपनी आवाज़ में बुलाते हैं। हम उन्हे अपना प्यार दिखाते हैं। हम उनसे अच्छा कुछ पाना चाहते हैं, वो हमें समझ दे।
Mantra 7
इन्द्राग्नी अवसा गतमस्मभ्यं चर्षणीसहा । मा नो दुःशंस ईशत ॥
इंद्र और अग्नि, तुम हमारे पास आओ और हमारी मदद करो। तुम लोगों की मदद करते हो। कोई बुरा इंसान हमारे ऊपर न छा जाए, यह मत होने दो।
Mantra 8
मा कस्य नो अररुषो धूर्तिः प्रणङ्मर्त्यस्य । इन्द्राग्नी शर्म यच्छतम् ॥
कोई भी गुस्से वाला इंसान हम पे धोखा न दे। कोई हमे चाल के मार न डाले। इंद्र और अग्नि से यह प्रार्थना है कि आप हमे अपनी शरण में रखो। आप दोनों हमे सुरक्षित रखो।
Mantra 9
गोमद्धिरण्यवद्वसु यद्वामश्वावदीमहे । इन्द्राग्नी तद्वनेमहि ॥
इंद्र और अग्नि, हम आपकी संपत्ति माँगते हैं। वो संपत्ति जिसमें बहुत सारा पैसा हो, सोना हो, और घोड़े हो। आप दोनों की किरपा से हम भी अमीर बन जाएँ।
Mantra 10
यत्सोम आ सुते नर इन्द्राग्नी अजोहवुः । सप्तीवन्ता सपर्यवः ॥
जब सोम का पानी निकाल के डाला जाता है, तब लोग इंद्र और अग्नि को बुलाते हैं। वो बार बार उनका नाम लेते हैं। यह लोग अपनी पूरी ताकत से भगवान की पूजा करते हैं।
Mantra 11
उक्थेभिर्वृत्रहन्तमा या मन्दाना चिदा गिरा । आङ्गूषैराविवासतः ॥
लोग गाना गाके इंद्र और अग्नि को ताकत देते हैं। यह दोनों दुश्मनों को मारते हैं। लोग खुश होके अपनी आवाज़ से भगवान को बुलाते हैं। वो दिल से प्रार्थना करते हैं कि भगवान यहाँ आएँ।
Mantra 12
ताविद्दुःशंसं मर्त्यं दुर्विद्वांसं रक्षस्विनम् । आभोगं हन्मना हतमुदधिं हन्मना हतम् ॥
इंद्र और अग्नि, आप दोनों उस इंसान को मारो जो बुरा काम करता है। जो इंसान गलत जानता है और बुरी आत्मा का शिकार है, उस्से खत्म करो। जैसे कोई बड़ा मुँह वाला जानवर अपना शिकार खा जाता है, वैसे ही आप बुरी ताकत को खा जाओ। बुरी चीज़ को पूरा खत्म कर दो।
Indrāgnī means Indra and Agni invoked as a single paired power—Indra’s strength and Agni’s sacrificial fire working together to protect and empower the worshipper.
It asks Indrāgnī to come with help, protect the people from hostile speech and ill-will, and destroy forces that obstruct the rite or harm the community.
The image suggests that true praise is a gathered fullness that naturally pours out—an inspired utterance that nourishes and makes divine help ‘arrive’ like rain sustaining life.
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