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Sukta 6.4
Bharadvāja (Bārhaspatya)
Agni (Hotṛ, deva-tātā)
Trishtubh (typical for Agni hymns in this section)
This hymn invokes Agni as the Hotṛ and “devatātā” (the one who sets the gods in place at the rite), asking him to perform for the present sacrificers as he once did for Manu, the archetypal institutor of yajña. Agni is praised as swift and unconquerable—moving through the nights, outpacing hostile forces (arāti), and guiding the worshippers on safe, non-devouring paths. The sukta culminates in a prayer for protection from distress, generous blessing for the singers, and long life with heroic offspring.
Mantra 1
यथा होतर्मनुषो देवताता यज्ञेभिः सूनो सहसो यजासि । एवा नो अद्य समना समानानुशन्नग्न उशतो यक्षि देवान् ॥
अग्नि, तू मनु के लिए पूजा करने वाला है। तू देवताओं को उनकी जगह बिठाता है। तू ताकत का बेटा है। आज हमारे लिए भी वैसे ही पूजा कर। हम सब मिलकर भगवानों को बुलाते हैं। तू भी हाँ कर दे और उनको खुश कर दे।
Mantra 2
स नो विभावा चक्षणिर्न वस्तोरग्निर्वन्दारु वेद्यश्चनो धात् । विश्वायुर्यो अमृतो मर्त्येषूषर्भुद्भूदतिथिर्जातवेदाः ॥
अग्नि हमारे लिए चमके, सुभ की तरह जो सब दिखा दे। वो हमारे लिए वो स्थान बना दे जहाँ हम उसे जान सकें और पूजा कर सकें। यह अग्नि सब में ज़िन्दगी है, इंसानों में भी वो अमर है। सुभ के साथ पैदा हुआ, जातवेदस हमारे पास मेहमान बन के आए।
Mantra 3
द्यावो न यस्य पनयन्त्यभ्वं भासांसि वस्ते सूर्यो न शुक्रः । वि य इनोत्यजरः पावकोऽश्नस्य चिच्छिश्नथत्पूर्व्याणि ॥
जैसे आसमान उसकी बड़ी हैसियत को देखते हैं, वैसे ही वो अपनी चमक दिखाता है, सूरज की तरह चमकदार। यह अग्नि कभी बुढ्ढा नहीं होता, वो सब साफ करता है। वो पुरानी बड़ी मुश्किल को भी तोड़ देता है।
Mantra 4
वद्मा हि सूनो अस्यद्मसद्वा चक्रे अग्निर्जनुषाज्मान्नम् । स त्वं न ऊर्जसन ऊर्जं धा राजेव जेरवृके क्षेष्यन्तः ॥
अग्नि हमारे घर में रहता है, हमारा खाना और हमारा रास्ता बनाता है। इसलिए तुम हम में ताकत डालो, ताकि हम स्ट्रांग रहें। जैसे राजा जीत के अंदर आता है, वैसे तुम हमारे पास सेफ जगह में रहो।
Mantra 5
नितिक्ति यो वारणमन्नमत्ति वायुर्न राष्ट्र्यत्येत्यक्तून् । तुर्याम यस्त आदिशामरातीरत्यो न ह्रुतः पततः परिह्रुत् ॥
वो अपना खाना खाता है, और हवा की तरह रात को पार कर लेता है। तुम्हारे बताए रास्ते पे वो दुश्मनों को चक्कर लगाता है। जैसे घोड़ा पकड़ा नहीं जाता, वैसे वो सब से बच के निकल जाता है।
Mantra 6
आ सूर्यो न भानुमद्भिरर्कैरग्ने ततन्थ रोदसी वि भासा । चित्रो नयत्परि तमांस्यक्तः शोचिषा पत्मन्नौशिजो न दीयन् ॥
अग्नि, सूरज की तरह अपनी किरण से दोनों दुनिया को रोशनी से भर देता है। वो अंधेरा को दूर भगाता है, अपनी आग से रास्ता दिखाता है। जैसे कोई तेज़ दौड़ कर जाता है, वैसे वो सही रास्ता देता है।
Mantra 7
त्वां हि मन्द्रतममर्कशोकैर्ववृमहे महि नः श्रोष्यग्ने । इन्द्रं न त्वा शवसा देवता वायुं पृणन्ति राधसा नृतमाः ॥
हमने तुम्हे चुना है, अग्नि, क्योंकि तुम सबसे ज़्यादा खुशी देते हो। हम अपनी पूजा के शब्दों से तुम्हे बुलाते हैं। हमें सुनो, हमारे बड़े फायदे के लिए। जैसे देवता इंद्र को ताकत देते हैं और वायु को खुशियों से भरते हैं, वैसे ही अच्छे लोग तुम्हे भी ताकत और सफलता से भरते हैं।
Mantra 8
नू नो अग्नेऽवृकेभिः स्वस्ति वेषि रायः पथिभिः पर्ष्यंहः । ता सूरिभ्यो गृणते रासि सुम्नं मदेम शतहिमाः सुवीराः ॥
अग्नि, अब हमें ऐसे रास्ते पे ले चलो जहाँ कोई हमें नुकसान नहीं पहुँचा सकता। हमें पाप और तकलीफ से पार करो। जो लोग तुम्हारे लिए गाते हैं, उन्हे खुशी दो। हम तुम्हारी ताकत से खुश रहें, सौ साल तक जिएं, और बहुत ताकतवाले बनें।
Agni is the deity—praised as the Hotṛ (invoking priest) and as devatātā, the one who sets the gods in place within the sacrifice.
Manu represents the archetypal founder of yajña. The hymn asks Agni to perform for the present worshippers in the same correct, powerful way as he did in Manu’s model sacrifice.
The hymn asks Agni to guide the sacrificers safely on “non-devouring” paths, to carry them across distress (aṃhas), and to grant blessing, prosperity, long life, and strong offspring.
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