Opening the text

Sukta 2.39
Gṛtsamada (Bhārgava)
Aśvinau (the two Aśvins)
Triṣṭubh
This hymn invokes the Aśvins as swift, dual powers who carry human offerings and bring tangible aid—health, protection, right guidance, and prosperity. Through vivid paired similes (stones, messengers, eyes, hands, feet), the poet asks them to arrive quickly, see clearly, heal the body, and lead the worshipper toward the better good. It ends by offering the crafted stoma as an “increase” for the Aśvins and praying for strong, luminous offspring and a wide, victorious speech in the assembly.
Mantra 1
ग्रावाणेव तदिदर्थं जरेथे गृध्रेव वृक्षं निधिमन्तमच्छ । ब्रह्माणेव विदथ उक्थशासा दूतेव हव्या जन्या पुरुत्रा ॥
तुम दोनों ऐसे हो जैसे पत्थर जो कुछ पीसने के लिए लगाए जाते हैं। ऐसे ही तुम अपना काम करते हो। जैसे कोई बड़ा पेड़ देख के उसके पास जाता है, उसमें खज़ाना हो, तुम भी ऐसे ही हो। जैसे पंडित लोग सबके सामने बोलते हैं, तुम भी ऐसे ही हो। जैसे कोई पैग़ाम ले के दूर जाता है, तुम भी लोगों की भेंट ले कर कहीं भी जाते हो।
Mantra 2
प्रातर्यावाणा रथ्येव वीराजेव यमा वरमा सचेथे । मेने इव तन्वा शुम्भमाने दम्पतीव क्रतुविदा जनेषु ॥
तुम सुबह-सुबह आते हो, जैसे दो लोग एक गाड़ी में बैठ के जाते हैं। तुम दोनों चमकते हो और अच्छा चुनते हो। जैसे दो समझदार औरतें अपने आप को सजाती हैं, तुम भी ऐसे ही हो। जैसे पति-पत्नी दोनों समझदार होते हैं और लोगों में अच्छे से रहते हैं, तुम भी ऐसे ही हो।
Mantra 3
शृङ्गेव नः प्रथमा गन्तमर्वाक्छफाविव जर्भुराणा तरोभिः । चक्रवाकेव प्रति वस्तोरुस्रार्वाञ्चा यातं रथ्येव शक्रा ॥
तुम हमारे पास पहले आओ, जैसे जानवर के दो सींग आगे बढ़ते हैं। जैसे पाँव तेज़ी से चलते हैं और कूदते हैं, तुम भी ऐसे ही आओ। जैसे सुबह के वक़्त चकवा पक्षी वापस आता है, तुम भी हमारे पास आओ। तुम दोनों ताकतवाले हो और रास्ते पर चल के आते हो।
Mantra 4
नावेव नः पारयतं युगेव नभ्येव न उपधीव प्रधीव । श्वानेव नो अरिषण्या तनूनां खृगलेव विस्रसः पातमस्मान् ॥
जैसे कश्ती लोगों को पार ले जाती है, तुम भी हमको पार लगाओ। जैसे गाड़े का योक सबको जोड़ के रखता है, तुम भी हमको जोड़ के रखो। जैसे गाड़े का मुख्य हिस्सा सबको बीच में रखता है, तुम भी हमको ठीक रखो। जैसे कुत्ते अपने मालिक की देखभाल करते हैं, तुम भी हमारे शरीर की रक्षा करो। जैसे कोई जानवर गिरने से बचाता है, तुम भी हमको गिरने से बचाओ।
Mantra 5
वातेवाजुर्या नद्येव रीतिरक्षी इव चक्षुषा यातमर्वाक् । हस्ताविव तन्वे शम्भविष्ठा पादेव नो नयतं वस्यो अच्छ ॥
तुम हवा की तरह तेज़ी से हमारे पास आओ। जैसे नदी का पानी बहता है, तुम भी ऐसे ही आओ। जैसे आँखें सबको दिखाती हैं, तुम भी हमको देखो। जैसे हाथ काम आते हैं और अच्छा करते हैं, तुम भी हमारे लिए अच्छे हो। जैसे पाँव हमको आगे ले जाते हैं, तुम भी हमको अच्छे रास्ते पर ले जाओ।
Mantra 6
ओष्ठाविव मध्वास्ने वदन्ता स्तनाविव पिप्यतं जीवसे नः । नासेव नस्तन्वो रक्षितारा कर्णाविव सुश्रुता भूतमस्मे ॥
जैसे दो होंठ मुँह में मीठा बोलते हैं, वैसे ही तुम भी हमारे लिए मीठी बातें बोलो। जैसे दो सीना, जीवन के लिए पोषण करते हैं, वैसे तुम भी हमारा पोषण करो। जैसे दो नाक, हमारे शरीर की रक्षा करती हैं, वैसे तुम भी हमारी रक्षा करो। जैसे दो कान, अच्छी सुनाई देते हैं, वैसे तुम भी हमारी बात सुनो और समझो।
Mantra 7
हस्तेव शक्तिमभि संददी नः क्षामेव नः समजतं रजांसि । इमा गिरो अश्विना युष्मयन्तीः क्ष्णोत्रेणेव स्वधितिं सं शिशीतम् ॥
जैसे हाथ में ताकत दी जाती है, वैसे ही तुम हमारे अंदर ताकत डाल दो। जैसे ज़मीन सबको संभाल के रखती है, वैसे तुम हमारे रास्ते ठीक करो। यह जो हमारी प्रार्थना है अश्विन्स के लिए, इस्से तेज़ करो। जैसे चाकू को पत्थर पर तेज़ करते हैं, वैसे ही इस प्रार्थना को तेज़ करो।
Mantra 8
एतानि वामश्विना वर्धनानि ब्रह्म स्तोमं गृत्समदासो अक्रन् । तानि नरा जुजुषाणोप यातं बृहद्वदेम विदथे सुवीराः ॥
अश्विन्स, यह सब तुम्हारे लिए बढ़ाव के लिए है। रिषि गृत्समद ने यह स्तोत्र और प्रार्थना बनाई है। तुम दोनों शक्तिशाली देवता, इस्से स्वीकार करो और हमारे पास आओ। इस्से हम सबके सामने बड़े का ज्ञान बोल सकें और हमारे बच्चे भी तेज़ हो।
The Aśvins are twin divine helpers—swift riders associated with dawn—praised as healers, rescuers, and guides who quickly respond to human prayers and offerings.
It asks them to come quickly, see clearly, bring bodily well-being and auspiciousness, and lead the worshipper toward “vasyaḥ”—the better, brighter good.
Because the twins act as a coordinated pair: like two eyes they bring clear perception, like two hands they support and heal the body, and like two feet they guide forward on a safe and beneficial path.
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