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Sukta 10.39
Aśvins (Nāsatyā)
Jagati (probable for many Aśvin hymns; exact metrical confirmation needed)
This hymn invokes the Aśvins’ swift, all-moving chariot to arrive at night and at dawn, responding to the sacrificer’s call as intimately as a father is called by name. It praises their hallmark deeds of rescue and restoration—renewing youth, saving devotees from peril, and restoring mobility and wholeness—while presenting the hymn itself as a carefully crafted offering meant to delight and draw them near.
Mantra 1
यो वां परिज्मा सुवृदश्विना रथो दोषामुषासो हव्यो हविष्मता । शश्वत्तमासस्तमु वामिदं वयं पितुर्न नाम सुहवं हवामहे ॥
अश्विन भाइयों, तुम्हारी गाड़ी जो हर तरफ जाती है। रात को और सुबह को लोग उसे बुलाते हैं। उस गाड़ी की तरफ हम तुम्हे बुला रहे हैं। जैसे बाप का नाम ले के बुलाते हैं, वैसे ही अच्छे से बुला रहे हैं।
Mantra 2
चोदयतं सूनृताः पिन्वतं धिय उत्पुरंधीरीरयतं तदुश्मसि । यशसं भागं कृणुतं नो अश्विना सोमं न चारुं मघवत्सु नस्कृतम् ॥
अश्विन भाइयों से दुआ है, सच्चाई की ताकत चलाओ, हमारे खयाल को मज़बूत करो। बुद्धि को उठाओ और उसमें जो शक्ति है उसे बाहर लाओ, यही हम चाहते हैं। अश्विन, हमारे लिए ऐसा हिस्सा बनाओ जो नाम कमाए। जैसे सोम पीस के निकाला जाता है, वैसे ही दान करने वाले लोगों में से एक प्यारा हिस्सा हमारे लिए निकाल के रख दो।
Mantra 3
अमाजुरश्चिद्भवथो युवं भगोऽनाशोश्चिदवितारापमस्य चित् । अन्धस्य चिन्नासत्या कृशस्य चिद्युवामिदाहुर्भिषजा रुतस्य चित् ॥
जिस में ताकत भी नहीं, उसके लिए तुम भाग बन जाते हो। जिसके पास कुछ भी नहीं, तुम उसके रक्षक बन जाते हो, चाहे लोग उस्से गंदा समझें। अंधे के लिए भी, कमज़ोर और दुबले-पतले इंसान के लिए भी, हाँ, तुम्हे डॉक्टर बोला जाता है, जो चोट खाए उसकी भी बीमारी ठीक करते हो।
Mantra 4
युवं च्यवानं सनयं यथा रथं पुनर्युवानं चरथाय तक्षथुः । निष्टौग्र्यमूहथुरद्भ्यस्परि विश्वेत्ता वां सवनेषु प्रवाच्या ॥
तुमने बूढ़े च्यवन को फिर से जवान बना दिया, जैसे कोई पुरानी गाड़ी को ठीक कर के नया बना दे। उसे सफर के लिए तैयार कर दिया। तुमने तुग्र्य को पानी में से बाहर निकाला, चारों तरफ से। यह काम सब जगह बताया जाता है, जहाँ भी सोम का जूस निकालते हैं।
Mantra 5
पुराणा वां वीर्या प्र ब्रवा जनेऽथो हासथुर्भिषजा मयोभुवा । ता वां नु नव्याववसे करामहेऽयं नासत्या श्रदरिर्यथा दधत् ॥
मैं लोगों को तुम्हारे पुराने काम बताता हूँ, तुमने कितनी बहादुरी दिखाई है। तुम डॉक्टर हो जो खुशी देते हो। अभी भी वही पुरानी ताकत नए तरीके से काम आती है। नसत्य भाई, इस यज्ञ में भरोसा रखो जो दिल से दिया जाता है।
Mantra 6
इयं वामह्वे शृणुतं मे अश्विना पुत्रायेव पितरा मह्यं शिक्षतम् । अनापिरज्ञा असजात्यामतिः पुरा तस्या अभिशस्तेरव स्पृतम् ॥
अश्विन भाई, मेरी पुकार सुनो। जैसे बाप अपने बेटे को सिखाता है, वैसे मुझे भी सिखाओ और आगे बढ़ाओ। मैं ज़ादा कुछ नहीं जानता, गलत जगह फंस गया हूँ, बहुत टाइम से बुरा हाल है। इस मुसीबत से मुझे बाहर निकाल के नीचे ले आओ।
Mantra 7
युवं रथेन विमदाय शुन्ध्युवं न्यूहथुः पुरुमित्रस्य योषणाम् । युवं हवं वध्रिमत्या अगच्छतं युवं सुषुतिं चक्रथुः पुरंधये ॥
अश्विन भाइयों ने अपनी गाड़ी में विमद के लिए एक साफ लड़की लाई। वो लड़की पुरुमित्र की बेटी थी। वध्र्यश्व की पत्नी ने उन्हे बुलाया, वो गए। पुरंधी के लिए उन्होंने अच्छा जनम करवाया। देखो, इंसान की ज़िन्दगी में उलझने होते हैं, अश्विन मदद करते हैं।
Mantra 8
युवं विप्रस्य जरणामुपेयुषः पुनः कलेरकृणुतं युवद्वयः । युवं वन्दनमृश्यदादुदूपथुर्युवं सद्यो विश्पलामेतवे कृथः ॥
एक गाने वाला बूढ़ा हो गया था। अश्विन भाई उसको वापस जवान बना दिए। वंदना को भी बचाया, वो खतरे में फंसा हुआ था। विश्पला चल नहीं पा रही थी, अश्विन भाई उसको चलने लाया कर दिए। यह है अश्विन की ताकत, रुका हुआ काम आगे बढ़ा देते हैं।
Mantra 9
युवं ह रेभं वृषणा गुहा हितमुदैरयतं ममृवांसमश्विना । युवमृबीसमुत तप्तमत्रय ओमन्वन्तं चक्रथुः सप्तवध्रये ॥
अश्विन भाइयों ने रेभ को गुफा में से निकाला। वो मर चुका था, फिर भी ज़िन्दा कर दिया। अत्रि को भी उन्होंने बचाया, वो बहुत तप चुका था। एक आदमी को सात जंजीरों में बांध के रखा था, अश्विन भाई उसको आज़ाद करके ठीक कर दिए।
Mantra 10
युवं श्वेतं पेदवेऽश्विनाश्वं नवभिर्वाजैर्नवती च वाजिनम् । चर्कृत्यं ददथुर्द्रावयत्सखं भगं न नृभ्यो हव्यं मयोभुवम् ॥
अश्विन भाइयों ने पेदु को एक सफेद घोड़ा दिया। वो घोड़ा बहुत ताकतवाला था, नौ तरह की ताकत और नब्बे ताकत उसमें थी। यह घोड़ा तेज़ी से भागता है, आदमी का काम आसान कर देता है। भगवान जैसे अपने भक्तों को देता है, वैसे ही यह घोड़ा इंसान के लिए खुशी लाया।
Mantra 11
न तं राजानावदिते कुतश्चन नांहो अश्नोति दुरितं नकिर्भयम् । यमश्विना सुहवा रुद्रवर्तनी पुरोरथं कृणुथः पत्न्या सह ॥
अश्विन भाई ऐसे लोगों को कोई तकलीफ़ नहीं देते जिनको वो आगे ले जाते हैं। न कोई बुरा वक़्त आता है, न कोई डर लगता है। अश्विन भाई रुद्र के रास्ते पे चलते हैं और आगे वाली गाड़ी बनाते हैं। पत्नी के साथ मिलकर वो इंसान को आगे बढ़ा देते हैं।
Mantra 12
आ तेन यातं मनसो जवीयसा रथं यं वामृभवश्चक्रुरश्विना । यस्य योगे दुहिता जायते दिव उभे अहनी सुदिने विवस्वतः ॥
अश्विनो, उस रथ से आओ जो दिमाग से भी तेज़ है। र्भु लोगों ने वो रथ तुम्हारे लिए बनाया था। जब यह रथ जुड़ता है तब आसमान की बेटी पैदा होती है। दो दिन चमकते हैं, विवस्वत के रूप में।
Mantra 13
ता वर्तिर्यातं जयुषा वि पर्वतमपिन्वतं शयवे धेनुमश्विना । वृकस्य चिद्वर्तिकामन्तरास्याद्युवं शचीभिर्ग्रसिताममुञ्चतम् ॥
उस जीत वाले रास्ते से आओ, पहाड़ को तोड़ के। अश्विनो, तुमने शयु के लिए गाय को दूध से भरा दिया। भेड़ के मुँह से भी तुमने बटेर को निकाला, जो अंदर जा चुका था। तुम्हारी शक्ति से यह हुआ।
Mantra 14
एतं वां स्तोममश्विनावकर्मातक्षाम भृगवो न रथम् । न्यमृक्षाम योषणां न मर्ये नित्यं न सूनुं तनयं दधानाः ॥
अश्विनो, यह स्त्रोत हमने तुम्हारे लिए बनाया है, जैसे भृगु लोग रथ बनाते हैं। हमने इसको ठीक से सजाया है, जैसे कोई लड़की अपने प्यारे के लिए सजती है। जैसे कोई अपने बेटे को हमेशा पास रखता है, वैसे हमने यह स्त्रोत बनाया है।
The Aśvins (Nāsatyā) are divine twin horsemen in the Rig Veda, famous for arriving quickly in their chariot at dawn and for healing, rescuing, and restoring strength to devotees.
The hymn asks the Aśvins to come promptly at the night–dawn transition and to grant renewal—health, youthfulness, safe deliverance from danger, and the power to move forward in life.
These are poetic metaphors for composing the hymn itself: the poets ‘build’ and ‘polish’ their praise as a perfected offering, meant to attract the Aśvins as surely as a fine chariot or beautiful adornment draws attention.
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