Sukta 10.39
न तं राजानावदिते कुतश्चन नांहो अश्नोति दुरितं नकिर्भयम् । यमश्विना सुहवा रुद्रवर्तनी पुरोरथं कृणुथः पत्न्या सह ॥
ná taṃ rājānāv adite kútaś caná nā́ṃho aśnoti duritáṃ nákir bhayám | yám aśvinā suhavā rudravartanī puroratháṃ kṛṇutháḥ pátnyā sahá ||
अश्विन भाई ऐसे लोगों को कोई तकलीफ़ नहीं देते जिनको वो आगे ले जाते हैं। न कोई बुरा वक़्त आता है, न कोई डर लगता है। अश्विन भाई रुद्र के रास्ते पे चलते हैं और आगे वाली गाड़ी बनाते हैं। पत्नी के साथ मिलकर वो इंसान को आगे बढ़ा देते हैं।
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