
Sukta 1.55
Trishtubh (probable; requires metrical verification)
This hymn magnifies Indra’s immeasurable greatness—so vast that even heaven and earth cannot contain or gauge him—and celebrates his terrifying, radiant power in battle. It repeatedly evokes the forging and sharpening of the vajra (thunderbolt) as the decisive force that destroys obstruction and secures strength, protection, and undiminishing wealth for the people.
Mantra 1
दिवश्चिदस्य वरिमा वि पप्रथ इन्द्रं न मह्ना पृथिवी चन प्रति । भीमस्तुविष्माञ्चर्षणिभ्य आतपः शिशीते वज्रं तेजसे न वंसगः ॥
आसमान भी इंद्र के आगे छोटा पड़ता है। धरती उसकी बड़ाई नाप नहीं सकती। लोगों के बीच वो इतना भयानक है कि सब जल उठते हैं। वो अपनी वज्र को इतना तेज करता है जैसे लोहार लोहा को चमकाता है।
Mantra 2
सो अर्णवो न नद्यः समुद्रियः प्रति गृभ्णाति विश्रिता वरीमभिः । इन्द्रः सोमस्य पीतये वृषायते सनात्स युध्म ओजसा पनस्यते ॥
जैसे समुंदर में सारी नदियां आ जाती हैं, वैसे ही इंद्र सब कुछ अपने पास खींच लेता है। सोम पी के वो और भी ताकतवर हो जाता है। वो पुराना योद्धा है, ताकत में उसका कोई मैच नहीं। वो खुशी से जी लेता है।
Mantra 3
त्वं तमिन्द्र पर्वतं न भोजसे महो नृम्णस्य धर्मणामिरज्यसि । प्र वीर्येण देवताति चेकिते विश्वस्मा उग्रः कर्मणे पुरोहितः ॥
इन्द्र, तुम किसी पहाड़ की तरह खत्म नहीं होते। तुम अपनी ताकत के धरम में चमक रहे हो। तुम्हारी ताकत से भगवान का काम साफ दिखता है। हर काम में तुम आगे खड़े हो, जैसे कोई तेज़ लीडर जो जीत लाता है।
Mantra 4
स इद्वने नमस्युभिर्वचस्यते चारु जनेषु प्रब्रुवाण इन्द्रियम् । वृषा छन्दुर्भवति हर्यतो वृषा क्षेमेण धेनां मघवा यदिन्वति ॥
लोग झुक के इन्द्र को जंगल में पुकारते हैं। वो कहते हैं कि इन्द्र की ताकत लोगों में अच्छी लगती है। वो बैल की तरह ताकतवाला है, जो सबको खुश करता है। वो शांति से दूध और खाना सबको देता है।
Mantra 5
स इन्महानि समिथानि मज्मना कृणोति युध्म ओजसा जनेभ्यः । अधा चन श्रद्दधति त्विषीमत इन्द्राय वज्रं निघनिघ्नते वधम् ॥
वो अपनी ताकत से बड़ी लड़ाइयाँ लड़ता है और लोगों की मदद करता है। लोग उस पर भरोसा करते हैं क्योंकि वो चमकता है। उसके लिए लोग वज्र बनाते हैं जो दुश्मन को मारे।
Mantra 6
स हि श्रवस्युः सदनानि कृत्रिमा क्ष्मया वृधान ओजसा विनाशयन् । ज्योतींषि कृण्वन्नवृकाणि यज्यवेऽव सुक्रतुः सर्तवा अपः सृजत् ॥
वो बड़ाई चाहता है और अपनी ताकत से अंधेरे को मिटा देता है। वो पूजा करने वाले के लिए रोशनी लाता है और पानी को बहने देता है।
Mantra 7
दानाय मनः सोमपावन्नस्तु तेऽर्वाञ्चा हरी वन्दनश्रुदा कृधि । यमिष्ठासः सारथयो य इन्द्र ते न त्वा केता आ दभ्नुवन्ति भूर्णयः ॥
इन्द्र, तुम सोम रस पियो और हमें दो। तुम्हारे दो घोड़े हमारे पास आओ, जो हमारी पूजा सुनें। तुम्हारे रथ वाले बहुत अच्छे हैं। कोई भी गलत बात तुम्हे नहीं छुपा सकती।
Mantra 8
अप्रक्षितं वसु बिभर्षि हस्तयोरषाळ्हं सहस्तन्वि श्रुतो दधे । आवृतासोऽवतासो न कर्तृभिस्तनूषु ते क्रतव इन्द्र भूरयः ॥
इंद्र के हाथ में वो दौलत है जो कभी खत्म नहीं होती। उसके शरीर में वो ताकत है जिसे कोई हरा नहीं सकता, सब सुनते हैं इसकी बात। इंद्र के अंदर काम करने के बहुत तरीके हैं। यह खुद से ढके हैं, खुद ही रक्षा करते हैं, किसी इंसान ने यह नहीं बनाया।
Indra’s immensity is proclaimed—he outspreads even heaven’s vastness, and earth cannot measure his greatness.
The hymn builds Indra as the burning, formidable power among humans, with the vajra repeatedly envisioned as forged/sharpened for luminous decisive action.
Indra’s warrior efficacy peaks: he accomplishes great battles, and the thunderbolt is hammered out again and again as the slaying force against obstruction.
The hymn settles into assurance: Indra holds imperishable wealth and unconquerable strength, and within him dwell many self-guarded powers not made by human hands.
दिवश्चिदस्य वरिमा वि पप्रथ इन्द्रं न मह्ना पृथिवी चन प्रति । भीमस्तुविष्माञ्चर्षणिभ्य आतपः शिशीते वज्रं तेजसे न वंसगः ॥स इन्महानि समिथानि मज्मना कृणोति युध्म ओजसा जनेभ्यः । अधा चन श्रद्दधति त्विषीमत इन्द्राय वज्रं निघनिघ्नते वधम् ॥अप्रक्षितं वसु बिभर्षि हस्तयोरषाळ्हं सहस्तन्वि श्रुतो दधे । आवृतासोऽवतासो न कर्तृभिस्तनूषु ते क्रतव इन्द्र भूरयः ॥It praises Indra as immeasurably great and overwhelmingly powerful, focusing on his vajra (thunderbolt) as the force that destroys obstacles and brings victory and strength.
The imagery presents Indra’s power as something concentrated into a decisive weapon—like a smith honing metal—symbolizing focused strength and radiant clarity that can break resistance.
It seeks protection, success in great struggles, and “undiminishing wealth,” along with unconquerable strength and inner resolve safeguarded within Indra’s own powers.
Answers come straight from the texts, with the shlokas they draw on. Ask in your own words.
A free sign-in with Google or Apple keeps your chat saved across web and the app.