Sukta 1.164
सनेमि चक्रमजरं वि वावृत उत्तानायां दश युक्ता वहन्ति । सूर्यस्य चक्षू रजसैत्यावृतं तस्मिन्नार्पिता भुवनानि विश्वा ॥
sanémi cákram ajáraṁ ví vāvṛta uttānā́yāṁ dáśa yuktā́ vahanti | sū́ryasya cákṣū rájasā́ity ā́vṛtaṁ tásminn ārpitā́ bhúvanāni víśvā ||
साथ में पैदा हुए लोगों में से सातवें को एक अकेले कहते हैं। बाकी छों को जोड़ा कहते हैं, यह रिशियों का कहना है जो देवताओं से आए हैं। उनकी अपनी जगह बनी है, अलग-अलग। वो एक ही जगह खड़े रह के चमकते हैं, लेकिन रूप अलग-अलग बना लेते हैं।
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