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Sukta 1.136
Gautama Rāhūgaṇa (traditional attribution for RV 1.136)
Mitra-Varuṇa (probable for RV 1.136; ‘two kings’ and later mention of Mitra, Aryaman, Varuṇa in 1.136.2 suggests Ādityas with focus on Mitra-Varuṇa)
Triṣṭubh/Jagatī mixture (probable; requires full metrical scan; marked as uncertain)
RV 1.136 is a hymn of praise and petition to the “two kings,” chiefly Mitra and Varuṇa as Ādityas, whose unassailable sovereignty upholds ṛta (cosmic and moral order). The poet offers thought as oblation and emphasizes Soma as a peace-giving share for Mitra–Varuṇa, asking the kings to make the worshiper’s aims effective. The hymn broadens at the close into a collective appeal for divine protection—Agni, Mitra, Varuṇa (and allied powers) granting śarman (shelter/peace) to the sacrificers.
Mantra 1
प्र सु ज्येष्ठं निचिराभ्यां बृहन्नमो हव्यं मतिं भरता मृळयद्भ्यां स्वादिष्ठं मृळयद्भ्याम् । ता सम्राजा घृतासुती यज्ञेयज्ञ उपस्तुता । अथैनोः क्षत्रं न कुतश्चनाधृषे देवत्वं नू चिदाधृषे ॥
सबसे बड़ा और सबसे पहले का सम्मान लाओ, एक भावना का भोग, उन दोनों के लिए जो हमेशा से हैं, जो दया करते हैं, जो सबसे ज़्यादा प्यार करते हैं। वो दोनों राजा हैं, घी जैसा मीठा रस वाले, हर यज्ञ में स्तुति होते हैं। उनकी राज्य की ताकत कोई तोड़ नहीं सकता, उनकी देवता वाली ताकत भी किसी की पहुँच से बाहर है।
Mantra 2
अदर्शि गातुरुरवे वरीयसी पन्था ऋतस्य समयंस्त रश्मिभिश्चक्षुर्भगस्य रश्मिभिः । द्युक्षं मित्रस्य सादनमर्यम्णो वरुणस्य च । अथा दधाते बृहदुक्थ्यं वय उपस्तुत्यं बृहद्वयः ॥
एक चौड़ी रास्ता दिख गया है, सच का रास्ता जो चमक के साथ जुड़ता है, भगवान के चमक के साथ। मित्र, अर्यमन और वरुण की चमकती हुई सीट है। फिर वो बड़ा-बड़ा बनाते हैं, स्तुति लायक बात, बड़ा-बड़ा बनाते हैं।
Mantra 3
ज्योतिष्मतीमदितिं धारयत्क्षितिं स्वर्वतीमा सचेते दिवेदिवे जागृवांसा दिवेदिवे । ज्योतिष्मत्क्षत्रमाशाते आदित्या दानुनस्पती । मित्रस्तयोर्वरुणो यातयज्जनोऽर्यमा यातयज्जनः ॥
यह मंत्र अदिति की तारीफ करता है। अदिति वो शक्ति है जो दुनिया को संभाल के रखती है। वो रोशनी से भरी है और आसमान को पकड़े हुई है। वो हर दिन हमारे पास आती है, जागती हुई। आदित्य देवता, जो धन और बरकत के मालिक हैं, चमकता हुआ राज चाहते हैं। मित्र, वरुण और आर्यमन, यह तीन लोगों को सही रास्ते पर लगाते हैं।
Mantra 4
अयं मित्राय वरुणाय शंतमः सोमो भूत्ववपानेष्वाभगो देवो देवेष्वाभगः । तं देवासो जुषेरत विश्वे अद्य सजोषसः । तथा राजाना करथो यदीमह ऋतावाना यदीमहे ॥
सोम रस भगवान के लिए अमृत जैसा है। यह मित्र और वरुण को शांति देता है। जब यह देवताओं को चढ़ाया जाता है, वो सब मिल के खुश होते हैं। दो राजा, मित्र और वरुण, हम आपसे यह माँगते हैं कि आप हमारी सुनो। आप जो सच्चे हैं, आप हमारी अर्ज़ पूरी करो।
Mantra 5
यो मित्राय वरुणायाविधज्जनोऽनर्वाणं तं परि पातो अंहसो दाश्वांसं मर्तमंहसः । तमर्यमाभि रक्षत्यृजूयन्तमनु व्रतम् । उक्थैर्य एनोः परिभूषति व्रतं स्तोमैराभूषति व्रतम् ॥
जो इंसान मित्र और वरुण की भक्ति में एक मन से लगा रहता है, उसको बुराई से बचाओ। वो इंसान जो दान करता है और सही रास्ते पर चलता है, उसको आर्यमन रक्षा करता है। जो इंसान अपनी बानी से धरम को समझाता है, वो सेफ रहता है। जो स्तुति गाता है, वो भी सुरक्षित होता है।
Mantra 6
नमो दिवे बृहते रोदसीभ्यां मित्राय वोचं वरुणाय मीळ्हुषे सुमृळीकाय मीळ्हुषे । इन्द्रमग्निमुप स्तुहि द्युक्षमर्यमणं भगम् । ज्योग्जीवन्तः प्रजया सचेमहि सोमस्योती सचेमहि ॥
इस मंत्र में आसमान और दुनिया को नमस्कार है। मैं मित्र और वरुण की तारीफ करता हूँ। वो दोनों बड़े दानी हैं। इंद्र और अग्नि की भी स्तुति करो। आर्यमन और भग भी चमकते हैं। भगवान हमें लंबी उम्र दे और औलाद दे। सोम देवता की शक्ति से हम हमेशा सुरक्षित रहें।
Mantra 7
ऊती देवानां वयमिन्द्रवन्तो मंसीमहि स्वयशसो मरुद्भिः । अग्निर्मित्रो वरुणः शर्म यंसन्तदश्याम मघवानो वयं च ॥
हम इंद्र की शक्ति से मजबूत होके देवताओं से मदद माँगते हैं। मरुत गण भी हमारे साथ हैं। अग्नि, मित्र और वरुण, यह तीन हमें शांति और सुरक्षा दें। हम भी अपनी श्रद्धा के साथ भगवान तक पहुँचें।
They are mainly Mitra and Varuṇa, paired Āditya deities called sovereign kings (samrājā) who uphold ṛta—truth, law, and right order.
Soma is offered as a “most peace-giving” share for Mitra–Varuṇa. The hymn treats Soma as the key ritual medium through which the gods are pleased and blessings become effective.
It asks them to protect the rite and the worshipers, to make the desired aims succeed, and to grant śarman—sheltering peace and safety—through their ṛta-guided kingship.
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