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Sukta 1.113
Kutsa Āṅgirasa (traditional ascription for RV 1.113 in many recensions)
Uṣas (Dawn)
Gāyatrī (RV 1.113 is predominantly Gāyatrī)
This hymn praises Uṣas (Dawn) as the “light of lights” who is born anew each day, displacing Night and awakening all beings to movement, work, and worship. It reflects on the transience of human life—earlier generations have “gone,” while the same Dawn returns—urging timely effort and right aspiration. The sukta closes by asking that the auspicious gifts carried by the Dawns be confirmed and increased by Mitra-Varuṇa and allied cosmic powers.
Mantra 1
इदं श्रेष्ठं ज्योतिषां ज्योतिरागाच्चित्रः प्रकेतो अजनिष्ट विभ्वा । यथा प्रसूता सवितुः सवायँ एवा रात्र्युषसे योनिमारैक् ॥
सबसे बड़ा चमकदार प्रकाश आ गया है। वोह खास इंसान पैदा हुआ है जो सब समझता है। जैसे सविता देवता सबको आगे बढ़ाते हैं, वैसे ही रात ने सवेरे के लिए जगह बना दी।
Mantra 2
रुशद्वत्सा रुशती श्वेत्यागादारैगु कृष्णा सदनान्यस्याः । समानबन्धू अमृते अनूची द्यावा वर्णं चरत आमिनाने ॥
उषा, यह सवेरे वाली देवी, चमके हुए बच्चों के साथ आ रही है। वो खुद भी चमक रही है, सफेद चमक के साथ। अंधेरा अपनी जगह से चला गया है। दोनों बहनें, रात और सवेरा, आपस में जुड़ीं हैं। वो एक के बाद एक आती हैं, बिना किसी टकराव के।
Mantra 3
समानो अध्वा स्वस्रोरनन्तस्तमन्यान्या चरतो देवशिष्टे । न मेथेते न तस्थतुः सुमेके नक्तोषासा समनसा विरूपे ॥
रात और सवेरा दोनों का रास्ता एक है, जो कभी खत्म नहीं होता। फिर भी दोनों अपने-अपने तरीके से चलती हैं। भगवान की मर्ज़ी से यह चलता है। दोनों में कोई लड़ाई नहीं होती, कोई रुकती नहीं है। रात और सवेरा, दोनों का एक ही मक़सद है, सिर्फ शकल अलग है।
Mantra 4
भास्वती नेत्री सूनृतानामचेति चित्रा वि दुरो न आवः । प्रार्प्या जगद्व्यु नो रायो अख्यदुषा अजीगर्भुवनानि विश्वा ॥
यह सवेरे वाली देवी चमक रही है और हमें सही रास्ता दिखाती है। वो साफ दिखने लगी है, जैसे कोई दरवाज़ा खोल दिया हो। वो पूरी दुनिया को हिला देती है। उषा ने हमारे लिए सब कुछ साफ कर दिया है। सवेरे ने सारी दुनिया को जगा दिया है।
Mantra 5
जिह्मश्ये चरितवे मघोन्याभोगय इष्टये राय उ त्वम् । दभ्रं पश्यद्भ्य उर्विया विचक्ष उषा अजीगर्भुवनानि विश्वा ॥
उषा सीधे लोगों के लिए भी अच्छी है और टेढ़े लोगों के लिए भी। वो सबको खुश करने वाली चीज़ें लाती है। जो लोग थोड़ा देखते हैं, उनको वो बड़ा नज़र देती है। सवेरे ने सारी दुनिया को जगा दिया है।
Mantra 7
एषा दिवो दुहिता प्रत्यदर्शि व्युच्छन्ती युवतिः शुक्रवासाः । विश्वस्येशाना पार्थिवस्य वस्व उषो अद्येह सुभगे व्युच्छ ॥
देखो, आकाश की बेटी हमारे सामने आ रही है। यह सवेरे वाली देवी है, एक जवान लड़की जैसी, चमकदार कपड़े पहनी हुई। यह पूरी दुनिया की दौलत की मालिक है। हे उषा, आज हमारे लिए अच्छा सवेरा ला।
Mantra 8
परायतीनामन्वेति पाथ आयतीनां प्रथमा शश्वतीनाम् । व्युच्छन्ती जीवमुदीरयन्त्युषा मृतं कं चन बोधयन्ती ॥
यह उसका रास्ता है जो लोगों के पीछे चलती है जो जा चुके हैं। और जो लोग आ रहे हैं, उनके आगे चलती है। वो कभी खत्म नहीं होती, हमेशा चलती रहती है। सुबह होने पर वो ज़िन्दा लोगों को उठाती है। वो किसी को भी मरा हुआ नहीं उठाती, बस ज़िन्दगी को जगाती है।
Mantra 9
उषो यदग्निं समिधे चकर्थ वि यदावश्चक्षसा सूर्यस्य । यन्मानुषान्यक्ष्यमाणाँ अजीगस्तद्देवेषु चकृषे भद्रमप्नः ॥
हे उषा, जब तुमने अग्नि को जलाया, जब तुमने सूरज की रोशनी फैलाई, और जब तुमने लोगों को जगाया जो पूजा के लिए तैयार बैठे थे, तब देवताओं के बीच तुमने अच्छा काम किया। सब कुछ ठीक कर दिया।
Mantra 10
कियात्या यत्समया भवाति या व्यूषुर्याश्च नूनं व्युच्छान् । अनु पूर्वाः कृपते वावशाना प्रदीध्याना जोषमन्याभिरेति ॥
इसका टाइम कितना लंबा है? जो सुबहें पहले आई थी और जो अब आ रही है, उनका हिसाब क्या है? वो पीछली सुबहों के साथ चलती है। चमकती हुई आगे बढ़ती है और दूसरों के साथ मिलकर चलती है।
Mantra 11
ईयुष्टे ये पूर्वतरामपश्यन्व्युच्छन्तीमुषसं मर्त्यासः । अस्माभिरू नु प्रतिचक्ष्याभूदो ते यन्ति ये अपरीषु पश्यान् ॥
वो लोग चले गए जिन्होंने पहली सुबह को देखा था जब वो उगी थी। अब वो हमें भी दिखाई दी। लेकिन वो लोग जो सिर्फ देखते रहते हैं, वो आगे निकल जाते हैं और पीछे रह जाते हैं।
Mantra 12
यावयद्द्वेषा ऋतपा ऋतेजाः सुम्नावरी सूनृता ईरयन्ती । सुमङ्गलीर्बिभ्रती देववीतिमिहाद्योषः श्रेष्ठतमा व्युच्छ ॥
वो बुराई और दुश्मनी को दूर भगाती है। वो सच्चाई की रखवाली करती है और सच्चाई से पैदा हुई है। वो अच्छी बातें लाती है और सच्चे बोल जगाती है। अच्छे शुभ संकेत लेकर देवताओं का रास्ता दिखाती है। आज की सुबह सबसे बड़ी सुबह हो।
Mantra 13
शश्वत्पुरोषा व्युवास देव्यथो अद्येदं व्यावो मघोनी । अथो व्युच्छादुत्तराँ अनु द्यूनजरामृता चरति स्वधाभिः ॥
पुराने ज़माने से उषा देवी चमक रही है। आज भी वो दुनिया को रोशन करती है। वो बूढ़ती नहीं, मरती नहीं। अपनी शक्ति से आगे बढ़ती रहती है।
Mantra 14
व्यञ्जिभिर्दिव आतास्वद्यौदप कृष्णां निर्णिजं देव्यावः । प्रबोधयन्त्यरुणेभिरश्वैरोषा याति सुयुजा रथेन ॥
उषा देवी आसमान से चमक के उठती है। अंधेरा दूर हो जाता है। वो अपने लाल घोड़ों की गाड़ी में आती है और सबको जगा देती है।
Mantra 15
आवहन्ती पोष्या वार्याणि चित्रं केतुं कृणुते चेकिताना । ईयुषीणामुपमा शश्वतीनां विभातीनां प्रथमोषा व्यश्वैत् ॥
उषा देवी अच्छी चीज़ें लेकर आती है। वो एक चमकदार निशान बनाती है। वो पहली उषा है जो सबको दिखाये देती है। बाकी सब उसका उदाहरण फॉलो करती हैं।
Mantra 16
उदीर्ध्वं जीवो असुर्न आगादप प्रागात्तम आ ज्योतिरेति । आरैक्पन्थां यातवे सूर्यायागन्म यत्र प्रतिरन्त आयुः ॥
अब हमारी जान में जान आयी है। अंधेरा गायब हो गया और रोशनी आ गयी। सूर्य के लिए रास्ता खुल गया है। हम वहीं पहुँच गए जहाँ ज़िन्दगी बनती है।
Mantra 17
स्यूमना वाच उदियर्ति वह्निः स्तवानो रेभ उषसो विभातीः । अद्या तदुच्छ गृणते मघोन्यस्मे आयुर्नि दिदीहि प्रजावत् ॥
अब हम दिल से प्रार्थना करते हैं। अग्नि ऊपर उठता है और उषा की महिमा गाता है। आज भी हमारे लिए चमक। हमारी ज़िन्दगी में बरकत हो।
Mantra 18
या गोमतीरुषसः सर्ववीरा व्युच्छन्ति दाशुषे मर्त्याय । वायोरिव सूनृतानामुदर्के ता अश्वदा अश्नवत्सोमसुत्वा ॥
जब सुबह होती है तोह चमक आती है। वोह जो लोग भगवान को पूजा में सामान देते हैं, उनके लिए यह सुबह खुशियों भरी होती है। हवा की तरह यह ऊपर उठती है और ताकत देती है। सोम रस निकाल के पूजा करने वाले को वोह सुबह की ताकत मिलती है। यह ताकत घोड़े जैसी तेज़ होती है।
Mantra 19
माता देवानामदितेरनीकं यज्ञस्य केतुर्बृहती वि भाहि । प्रशस्तिकृद्ब्रह्मणे नो व्युच्छा नो जने जनय विश्ववारे ॥
यह सुबह देवियों की माँ है और अदिति का चेहरा है। यह पूजा का निशान है और बहुत बड़ी चमक के साथ आती है। हमारी पूजा में सही बात बोलने वाले के लिए यह अच्छी तारीफ लाती है। हमें अच्छी चीज़ें दे और हमारे लोगों में अच्छा पैदा कर।
Mantra 20
यच्चित्रमप्न उषसो वहन्तीजानाय शशमानाय भद्रम् । तन्नो मित्रो वरुणो मामहन्तामदितिः सिन्धुः पृथिवी उत द्यौः ॥
जब सुबह आती है तोह वोह अच्छी चीज़ें लाती है। जो लोग भगवान की पूजा में लग के मेहनत करते हैं उनके लिए यह खुशी मिलती है। मित्र और वरुण भगवान हमारे लिए यह अच्छा बढ़ा दें। अदिति माँ, नदी, धरती और आसमान सब मिलकर हमें आशीर्वाद दें।
Uṣas is the goddess of Dawn, praised as the radiant power that reveals the world, awakens beings, and restores the daily order by replacing Night with light.
Along with celebrating sunrise, the hymn reminds us that human life is brief—many who saw earlier dawns are gone—so we should wake up inwardly and use the present day well.
It is best recited at dawn facing east, with a calm mind; it can accompany a simple morning fire offering or a quiet prayer for clarity, right action, and auspicious results.
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