
Sukta 1.102
Kutsa Āṅgirasa (standard attribution for this Indra hymn cluster)
Indra
Triṣṭubh
This Triṣṭubh hymn praises Indra as the unmatched, many-aided power who breaks obstacles, wins the “luminous herds” (cows/wealth), and carries the sacrificer through every surge of action. The poet offers an inspired thought (dhī) as praise, recalls Indra’s irresistible might in repeated deeds, and ends with a protective prayer for victory and fullness (vāja), broadened by the support of Mitra–Varuṇa, Aditi, Sindhu, Earth, and Heaven.
Mantra 1
इमां ते धियं प्र भरे महो महीमस्य स्तोत्रे धिषणा यत्त आनजे । तमुत्सवे च प्रसवे च सासहिमिन्द्रं देवासः शवसामदन्ननु ॥
मैं यह सोच तुम्हारे लिए लाया हूँ। यह बहुत बड़ी बात है, बड़े भगवान के लिए। जब हम स्तुति करते हैं, तब यह सोच काम करती है। इंद्र जो सब कुछ जीतता है, देवता उसके साथ रहते हैं और उसकी ताकत से खुश होते हैं।
Mantra 2
अस्य श्रवो नद्यः सप्त बिभ्रति द्यावाक्षामा पृथिवी दर्शतं वपुः । अस्मे सूर्याचन्द्रमसाभिचक्षे श्रद्धे कमिन्द्र चरतो वितर्तुरम् ॥
सात नदियाँ उसकी बड़ाई को ले जाती हैं। आसमान और धरती उसका रूप दिखाते हैं। सूरज और चाँद हमें देखते हैं। हे श्रद्धा, बताओ यह दोनों इंद्र के साथ कैसे चलते हैं और रास्ता कैसे बनाते हैं?
Mantra 3
तं स्मा रथं मघवन्प्राव सातये जैत्रं यं ते अनुमदाम संगमे । आजा न इन्द्र मनसा पुरुष्टुत त्वायद्भ्यो मघवञ्छर्म यच्छ नः ॥
हे देने वाले, वो रथ हमारे लिए लाओ जिससे हम जीतें। हम तुम्हारे साथ मिल कर खुश होते हैं। इंद्र, तुम अपनी मर्ज़ी से हमारे पास आओ। तुम्हारी बहुत स्तुति होती है। जो लोग तुम्हारे पास आते हैं, उन्हे बचाओ।
Mantra 4
वयं जयेम त्वया युजा वृतमस्माकमंशमुदवा भरेभरे । अस्मभ्यमिन्द्र वरिवः सुगं कृधि प्र शत्रूणां मघवन्वृष्ण्या रुज ॥
इंद्र, हम तेरे साथ मिलकर जीतना चाहते हैं। जो रास्ता बंद है वो खोल दे। जो हमारा हक़ है वो हमें मिल जाए। तू हमारे लिए रास्ता साफ कर दे। अपनी ताकत से दुश्मनों को तोड़ दे।
Mantra 5
नाना हि त्वा हवमाना जना इमे धनानां धर्तरवसा विपन्यवः । अस्माकं स्मा रथमा तिष्ठ सातये जैत्रं हीन्द्र निभृतं मनस्तव ॥
बहुत लोग तुझे पुकारते हैं, इंद्र। सब तुझसे माँगते हैं। पर तू हमारे रथ पर बैठ। हमारे लिए जीत ला। तेरा इरादा पक्का है, तू हमारे साथ है।
Mantra 6
गोजिता बाहू अमितक्रतुः सिमः कर्मन्कर्मञ्छतमूतिः खजंकरः । अकल्प इन्द्रः प्रतिमानमोजसाथा जना वि ह्वयन्ते सिषासवः ॥
इंद्र की ताकत से गायें और धन मिलता है। उसकी सोच का कोई एंड नहीं। वो हर काम में मदद करता है। मुश्किल काम भी आसान कर देता है। इंद्र जैसा कोई नहीं, वो सबसे बड़ा है। इसलिए लोग उससे पुकारते हैं और जीतना चाहते हैं।
Mantra 7
उत्ते शतान्मघवन्नुच्च भूयस उत्सहस्राद्रिरिचे कृष्टिषु श्रवः । अमात्रं त्वा धिषणा तित्विषे मह्यधा वृत्राणि जिघ्नसे पुरंदर ॥
इंद्र तेरी बड़ाई सौ लोगों से भी ज़्यादा है। हज़ारों लोगों से भी ऊपर है। लोग तेरे बारे में जानते हैं। तू बड़ा है, तेरे पास ताकत है। तू दुश्मनों को हरा देता है।
Mantra 8
त्रिविष्टिधातु प्रतिमानमोजसस्तिस्रो भूमीर्नृपते त्रीणि रोचना । अतीदं विश्वं भुवनं ववक्षिथाशत्रुरिन्द्र जनुषा सनादसि ॥
इंद्र, तू लोगों का राजा है। तीन दुनिया तुझपे टिकी है। तू ऊपर वाली दुनिया भी संभालता है। सारी दुनिया से बड़ा है तू। कोई तुझसे लड़ नहीं सकता। तू शुरू से ही ऐसा है।
Mantra 9
त्वां देवेषु प्रथमं हवामहे त्वं बभूथ पृतनासु सासहिः । सेमं नः कारुमुपमन्युमुद्भिदमिन्द्रः कृणोतु प्रसवे रथं पुरः ॥
हम सब देवताओं में पहले तुम्हे बुलाते हैं। तुम लड़ाइयों में जीतने वाले बन गए हो। इंद्र हमारे इस गायक को गुस्सा तोड़ने वाला बना दे। वो रास्ते के बंधन काट दे। आगे बढ़ने के लिए हमारी गाड़ी आगे लगा दे।
Mantra 10
त्वं जिगेथ न धना रुरोधिथार्भेष्वाजा मघवन्महत्सु च । त्वामुग्रमवसे सं शिशीमस्यथा न इन्द्र हवनेषु चोदय ॥
तुम जीत गए और तुमने हमारे धन को रोका नहीं। छोटी लड़ाई में भी और बड़ी में भी, हे देने वाले। तुम्हे, जो बलवान हो, हम अपनी रक्षा के लिए तेज़ करते हैं। फिर इंद्र, हमे आगे बढ़ा। जब हम पुकारें तो हमे सही दिशा दिख्हा।
Mantra 11
विश्वाहेन्द्रो अधिवक्ता नो अस्त्वपरिह्वृताः सनुयाम वाजम् । तन्नो मित्रो वरुणो मामहन्तामदितिः सिन्धुः पृथिवी उत द्यौः ॥
हर वक़्त इंद्र हमारा बोलने वाला और रक्षक हो। कोई हमे धोखा न दे, हम शक्ति पाएँ। मित्र और वरुण हमे बढ़ाएँ। अदिति, नदी, धरती और आसमान हमारा भला करें।
It asks Indra for victorious strength (vāja), protection from being misled or harmed, and the power to break obstacles and secure abundance (symbolized by cows/wealth/light).
These are Vedic images for removing hard constraints and releasing prosperity and light. Indra ‘wins cows’ by opening what is blocked—whether wealth, rain, or clarity—and ‘breaks knots’ by defeating forces that bind progress.
The hymn closes by widening the blessing: after invoking Indra’s decisive protection, it asks the sustaining powers of order, vastness, flow, and the cosmic parents (Earth and Heaven) to nurture and enlarge the worshipper’s success.
Answers come straight from the texts, with the shlokas they draw on. Ask in your own words.
A free sign-in with Google or Apple keeps your chat saved across web and the app.