Opening the text

कुशवंशवर्णनम् — The Line of Kuśa and the Disfigurement of Kuśanābha’s Daughters by Vāyu
बालकाण्ड
This sarga situates a dynastic micro-history within the broader ethical cartography of Bālakāṇḍa. The narration introduces Kuśa—Brahmā-born, ascetically steadfast, and devoted to honoring the virtuous—and details his four sons: Kuśāmba, Kuśanābha, Adhūrtarajas, and Vasu. Their righteous governance is expressed through city-foundations (Kauśāmbī, Mahodaya, Dharmāraṇya, Girivraja) and a geographic mapping of Vasu’s domain (Vasumatī) with the renowned Sumāgadhī/Māgadhī river amid five mountains. The discourse then pivots to Kuśanābha’s hundred daughters born of the apsaras Ghṛtācī, portrayed in ornate garden imagery. Vāyu, seeing their beauty and youth, proposes marriage and promises immortality and unfading youth; the maidens reject him, affirming their dharmic allegiance to paternal authority in marriage and warning of ascetic power. Enraged, Vāyu enters their limbs and twists them into hunchbacked forms. The daughters return weeping and ashamed; Kuśanābha questions the violation of virtue and enters a concentrated, inward state (samādhi), marking the episode as both moral case-study and narrative hinge.
Verse 1
Description of the four sons of Brahma and the dynasty of Kusanabha-- enraged Windgod turns the daughters of Kusanabha into humpedback ones.ब्रह्मयोनिर्महानासीत्कुशो नाम महातपा:।अक्लिष्टव्रतधर्मज्ञः सज्जनप्रतिपूजक:।।।।
ब्रह्मा का एक बेटा था जिसका नाम कुशा था। वो बड़ा तपस्वी था और अपने व्रत को कभी नहीं तोड़ा। धरम की बातें अच्छे से जानता था और अच्छे लोगों की हमेशा इज्जत करता था।
Verse 2
स महात्मा कुलीनायां युक्तायां सुगुणोल्बणान्।वैदर्भ्यां जनयामास चतुरस्सदृशान् सुतान्।।।।कुशाम्बं कुशनाभं च अधूर्तरजसं वसुम्।
देवता, हम सब कुशनाभ की बेटियाँ हैं। हम में इतनी ताकत है कि किसी देवता को भी उसकी जगह से हटा दें। पर हम अपनी तपस्या बचा के रखते हैं, इसलिए कुछ नहीं करती।
Verse 3
दीप्तियुक्तान् महोत्साहान् क्षत्रधर्मचिकीर्षया।।।।तानुवाच कुश: पुत्रान् धर्मिष्ठान् सत्यवादिन:।
हमारा बाप हमारा सबसे बड़ा है, हमारे लिए भगवान जैसा। जो इंसान हमारा बाप हमें दे देगा, वही हमारा पति बनेगा।
Verse 4
क्रियतां पालनं पुत्रा: धर्मं प्राप्स्यथ पुष्कलम्।।।।ऋषेस्तु वचनं श्रुत्वा चत्वारो लोकसम्मता:।निवेशं चक्रिरे सर्वे पुराणां नृवरास्तदा।।।।
जब वायु ने उनकी बात सुनी, वो बहुत गुस्सा हो गया। वो हवा का भगवान है और बहुत ताकतवाला है। उसने उन सबकी बॉडी में जाके उनको तोड़ दिया।
Verse 5
क्रियतां पालनं पुत्रा: धर्मं प्राप्स्यथ पुष्कलम्।।1.32.4।।ऋषेस्तु वचनं श्रुत्वा चत्वारो लोकसम्मता:।निवेशं चक्रिरे सर्वे पुराणां नृवरास्तदा।।1.32.5।।
हवा ने उन लड़कियों को तोड़ दिया, वो सब राजा के घर में घुस गई। वो ज़मीन पर गिर गई, बहुत डर गई, शरम से लाल हो गई, और उनकी आँखों में आँसू आ गए।
Verse 6
कुशाम्बस्तु महातेजा: कौशाम्बीमकरोत्पुरीम् ।कुशनाभस्तु धर्मात्मा पुरं चक्रे महोदयम्।।।।
राजा ने अपनी प्यारी लड़कियों को देखा, वो सब बहुत दुखी थी और तोड़ दी गई थी। राजा बहुत परेशान हो गया और बोला, यह क्या हो गया है।
Verse 7
अधूर्तरजसो राम धर्मारण्यं महीपति:।चक्रे पुरवरं राजा वसुश्चक्रे गिरिव्रजम्।।।।
राजा ने कहा, बेटा, बताओ क्या हुआ है। कौन है जो धरम की बात नहीं मानता। सब लड़कियाँ टेढ़ी कैसे हो गई, क्यों नहीं बता रही हो। राजा इतना दुखी हुआ कि चुप हो गया और सोचने लगा।
Verse 8
एषा वसुमती राम वसोस्तस्य महात्मन:।एते शैलवरा: पञ्च प्रकाशन्ते समन्तत:।।।
हे राम, यह ज़मीन वसुमती कहलाती है। यह उस राजा वसु की है जो बहुत बड़ा आदमी था। इसके चारों तरफ पाँच पहाड़ हैं। वो सब चमक रहे हैं और दिखाई दे रहे हैं।
Verse 9
सुमागधी नदी रम्या मगधान् विश्रुताययौ।पञ्चानां शैलमुख्यानां मध्ये मालेव शोभते।।।।
सुमागधी नाम की नदी है जो मगध में बहुती है। यह बहुत सुंदर है और लोग इसको जानते हैं। पाँच पहाड़ियों के बीच में यह ऐसे चमकती है जैसे कोई हार पहना हो।
Verse 10
सैषा हि मागधी राम वसोस्तस्य महात्मन:।पूर्वाभिचरिता राम सुक्षेत्रा सस्यमालिनी।।।।
राम, यह मगधी नदी है। यह उस बड़े वसु की है। पूरब की तरफ बहती है और इसके आस-पास अच्छी ज़मीन है। फसलें भी बहुत अच्छी उगती हैं यहाँ।
Verse 11
कुशनाभस्तु राजर्षि: कन्याशतमनुत्तमम्।जनयामास धर्मात्मा घृताच्यां रघुनन्दन।।।।
रघुकुल के आनंद राम, सुनो। राजर्षि कुसनाभ ने सौ बेटियाँ पैदा की थीं। उनकी माँ घृताची थी, जो अप्सरा थीं। वो बेटियाँ बहुत खूबसूरत थीं, कोई जैसी नहीं थीं।
Verse 12
तास्तु यौवनशालिन्यो रूपवत्य स्स्वलङ्कृता:।उद्यानभूमिमागम्य प्रावृषीव शतह्रदा:।।।।गायन्त्यो नृत्यमानाश्च वादयन्त्यश्च सर्वश:।आमोदं परमं जग्मुर्वराभरणभूषिता:।।।।
वो बेटियाँ जवान हो गई थीं और बहुत सुंदर लगती थीं। गहने पहन के गार्डन में गई थीं। बारिश के मौसम में बिजली चमकता है ना, वैसे ही वो चमक रही थीं। वो गाना गा रही थीं, नाच रही थीं और बाजा भी बजा रही थीं। बहुत मज़े कर रही थीं सब मिलकर।
Verse 13
तास्तु यौवनशालिन्यो रूपवत्य स्स्वलङ्कृता:।उद्यानभूमिमागम्य प्रावृषीव शतह्रदा:।।1.32.12।।गायन्त्यो नृत्यमानाश्च वादयन्त्यश्च सर्वश:।आमोदं परमं जग्मुर्वराभरणभूषिता:।।1.32.13।।
वो बेटियाँ जवान हो गई थीं और बहुत सुंदर लगती थीं। गहने पहन के गार्डन में गई थीं। बारिश के मौसम में बिजली चमकता है ना, वैसे ही वो चमक रही थीं। वो गाना गा रही थीं, नाच रही थीं और बाजा भी बजा रही थीं। बहुत मज़े कर रही थीं सब मिलकर।
Verse 14
अथ ताश्चारुसर्वाङ्ग्यो रूपेणाप्रतिमा भुवि।उद्यानभूमिमागम्य तारा इव घनान्तरे।।।।
वो लड़कियाँ हर तरह से परफेक्ट थी, सुंदर भी थी, जवान भी थी। उनके पास सब गुण थे। हवा के भगवान वायु ने उन्हें देखा। वो हर जगह मौजूद हैं। उन्होंने उन लड़कियों से बात की।
Verse 15
तास्सर्वगुणसम्पन्ना रूपयौवनसंयुता:।दृष्ट्वा सर्वात्मको वायुरिदं वचनमब्रवीत्।।।।
वायु ने कहा, मैं तुम सब को अपना बनाना चाहता हूँ। तुम सब मेरी पत्नी बनोगी। इंसान वाली बात छोड़ो, यह सोचना कि तुम मरने वाली हो। तुम्हे लंबी उम्र मिलेगी।
Verse 16
अहं व: कामये सर्वा भार्या मम भविष्यथ।मानुषस्त्यज्यतां भावः दीर्घमायुरवाप्स्यथ।।।।
जवानी हमेशा चंचल रहती है, इंसान में तो और भी। लेकिन तुम सदा जवान रहोगी, कभी बूढ़ी नहीं होगी। तुम अमर हो जाओगी, मरना नहीं है।
Verse 17
चलं हि यौवनं नित्यं मानुषेषु विशेषत:।अक्षय्यं यौवनं प्राप्ताः अमर्यश्च भविष्यथ।।।।
जब वो लड़कियों ने वायु की बात सुनी, वो हँसने लगी। उन्होंने सोचा यह क्या बोल रहा है। फिर सौ लड़कियों ने एक साथ जवाब दिया।
Verse 18
तस्य तद्वचनं श्रुत्वा वायोरक्लिष्टकर्मण:।अपहास्य ततो वाक्यं कन्याशतमथाब्रवीत् ।।।।
भगवान, तुम सब जीवों के अंदर रहते हो। तुम सबसे बड़े देवता हो। हम सब तुम्हारी शक्ति जानते हैं। फिर भी तुम हमें इतना नीचा समझते क्यों हो?
Verse 19
अन्तश्चरसि भूतानां सर्वेषां त्वं सुरोत्तम ।प्रभावज्ञा: स्म ते सर्वा: किमस्मानवमन्यसे।।।।
वो बड़े इंसान थे। उन्होंने विदर्भ की राजकुमारी से शादी की जो बिल्कुल उनके जैसी थी। उनके चार बेटे हुए, सब बड़े गुणी और अपने बाप जैसे। नाम थे कुशाम्ब, कुशनाभ, अधूर्तरजस और वसु।
Verse 20
कुशनाभसुतास्सर्वा: समर्थास्त्वां सुरोत्तम।स्थानाच्च्यावयितुं देवं रक्षामस्तु तपो वयम्।।।।
ऐसा मत सोचो कि हम बेवकूफ हैं। हमारा बाप सच बोलने वाला है, उसे मत ठुकराओ। हम धरम के साथ रहते हैं और अपने बाप की सुनते हैं।
Verse 21
माभूत्स कालो दुर्मेध: पितरं सत्यवादिनम्।नावमन्यस्व धर्मेण स्वयं वरमुपास्महे।।।।
ऐसा मत सोचो कि हम बेवकूफ हैं। हमारा बाप सच बोलने वाला है, उसे मत ठुकराओ। हम धरम के साथ रहते हैं और अपने बाप की सुनते हैं।
Verse 22
पिता हि प्रभुरस्माकं दैवतं परमं हि न:।यस्य नो दास्यति पिता स नो भर्ता भविष्यति।।।।
कुश ने अपने बेटे से कहा, तुम लोग बहुत ताकतवाले हो और राज का काम करना चाहते हो। धरम के हिसाब से राज करो, तुम लोग सच बोलने वाले हो और अच्छे इंसान हो।
Verse 23
तासां तद्वचनं श्रुत्वा वायु: परमकोपन:।प्रविश्य सर्वगात्राणि बभञ्ज भगवान् प्रभु:।।।।
जब वो लड़कियों की बात सुनी, वायु बहुत गुस्सा हो गया। वायु बहुत ताकतवाला था और सब इज्जत करते थे। उसने उनकी बॉडी में जाके उनकी हड्डी-पसली तोड़ दी। गुस्से में उसने उन्हे इतना मारा कि वो टूट गई।
Verse 24
ता: कन्या वायुना भग्ना विविशुर्नृपतेर्गृहम्।प्रापतन् भुवि सम्भ्रान्तास्सलज्जा स्सास्रलोचना:।।।।
वायु ने उन्हे इतना तोड़ दिया कि वो राजा के महल में गई। वो काँप रही थी, दुखी थी, शरम से गई थी। आँखों में आँसू थे। वो ज़मीन पर गिर गई।
Verse 25
स च ता दयिता दीना: कन्या: परमशोभना:।दृष्ट्वा भग्नास्तदा राजा सम्भ्रान्त इदमब्रवीत्।।।।
राजा ने अपनी प्यारी बेटियाँ देखी। वो इतनी खूबसूरत थी, अब दुखी थी और टूटी हुई थी। राजा देख के हिल गया। उसने बोला, क्या हो गया है तुम लोगों को।
Verse 26
किमिदं कथ्यतां पुत्र्य: को धर्ममवमन्यते।कुब्जा: केन कृता: सर्वा वेष्टन्त्यो नाभिभाषथ।एवं राजा विनिश्श्वस्य समाधिं सन्दधे तत:।।।।
राजा ने कहा, यह क्या है? मेरी बेटियाँ बताओ, किसने धरम की हंसी उड़ाई? किसने तुम्हे ऐसा तोड़ दिया? तुम मेरे पास खड़ी हो, फिर भी कुछ नहीं बोल रही। राजा ने गहरा साँस लिया। फिर उसने अपना दिमाग सेट किया और ध्यान में बैठ गया।
The pivotal action is Vāyu’s unsolicited marriage proposal to Kuśanābha’s daughters and their refusal grounded in dharma: they assert that marriage must occur through their father’s righteous decision, not through coercion or divine intimidation.
The sarga contrasts desire and entitlement with disciplined moral order: even a powerful deity becomes ethically blameworthy when anger overrides restraint, while the daughters exemplify dharmic agency through fidelity to lawful guardianship and protection of tapas.
The chapter maps early political geography through the founding of Kauśāmbī, Mahodaya, Dharmāraṇya, and Girivraja, and locates Vasu’s territory (Vasumatī) amid five mountains, with the renowned Sumāgadhī/Māgadhī river flowing through Magadha.
Answers come straight from the texts, with the shlokas they draw on. Ask in your own words.
A free sign-in with Google or Apple keeps your chat saved across web and the app.
Read Valmiki Ramayana in the Vedapath app
Scan the QR code to open this directly in the app, with word-by-word meanings, Sanskrit recitation where available, and more.